Research Diary https://researchdiary.in Research Diary Fri, 11 Sep 2026 14:29:56 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://i0.wp.com/researchdiary.in/wp-content/uploads/2023/07/cropped-Research-Diary-Logo.jpeg?fit=32%2C32&ssl=1 Research Diary https://researchdiary.in 32 32 230867523 हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार https://researchdiary.in/gov-of-uttarakhand-3/ https://researchdiary.in/gov-of-uttarakhand-3/#respond Fri, 11 Sep 2026 14:29:56 +0000 https://researchdiary.in/?p=21900

  • हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान
  • यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति
  • चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की होगी व्यवस्था
  • विद्यालयों को आपदा के प्रति सुरक्षित एवं सक्षम बनाने की दिशा में बड़ा कदम
  • चेतावनी, निकासी, प्राथमिक उपचार और बचाव के लिए बनेंगी विशेष टीमें
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालयों को आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित बनाने, आपदा के समय त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने तथा छात्र-छात्राओं एवं विद्यालय स्टाफ की सुरक्षा के लिए आवश्यक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक द्वारा हाल ही में राज्य के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों का आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय का आपदा प्रबंधन प्लान उस विद्यालय की स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित जोखिमों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए विद्यालय स्तर पर स्थानीय आपदा जोखिमों का आकलन किया जाएगा तथा उसी के अनुरूप सुरक्षा एवं बचाव की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए शिक्षा विभाग तथा यूएसडीएमए में समिति की गठन किया जाएगा।

विद्यालय एवं उसके आसपास के क्षेत्र में भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमपात, हिमस्खलन, आग तथा अन्य स्थानीय आपदाओं की संभावित स्थिति का चिन्हांकन किया जाएगा। आपदा की स्थिति में विद्यार्थियों एवं स्टाफ को विद्यालय भवन से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट निकासी मार्ग निर्धारित किए जाएंगे। प्रत्येक कक्षा एवं भवन के लिए आवश्यक निकासी व्यवस्था और सुरक्षित स्थान चिन्हित किए जाएंगे। विद्यालय परिसर में आपदा के समय एकत्रित होने के लिए सुरक्षित स्थान निर्धारित किया जाएगा। आपदा की स्थिति में कौन क्या भूमिका निभाएगा, इसकी स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। विद्यालय प्रधानाचार्य, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी तथा आवश्यकतानुसार विद्यार्थियों के स्तर पर भी जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।

पुलिस, फायर, स्वास्थ्य विभाग, राज्य व जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, तहसील एवं अन्य संबंधित विभागों के महत्वपूर्ण आपातकालीन संपर्क नंबर विद्यालय स्तर पर उपलब्ध एवं प्रदर्शित किए जाएंगे। विद्यालय में प्राथमिक उपचार की आवश्यक व्यवस्था, फस्र्ट एड किट तथा आवश्यक आपदा राहत एवं बचाव सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। विद्यार्थियों एवं विद्यालय स्टाफ को भूकंप, आग, भूस्खलन तथा अन्य संभावित आपदाओं के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षित प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी। समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर आपदा प्रबंधन प्लान की व्यवहारिकता को भी परखा जाएगा।

सचिव श्री सुमन ने बताया कि दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के सुरक्षित एवं त्वरित निकासी के लिए अलग से आवश्यक व्यवस्था और सहायता की पहचान की जाएगी। विद्यालय भवन, कक्षाओं, विद्युत व्यवस्था, गैस, रसोई, पानी की टंकियों, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का परीक्षण किया जाएगा तथा संभावित खतरों को कम करने के उपाय किए जाएंगे। आपदा के समय विद्यालय एवं अभिभावकों के बीच प्रभावी संचार व्यवस्था विकसित की जाएगी। स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायत, स्थानीय समुदाय एवं उपलब्ध संसाधनों को भी आवश्यकता के अनुसार आपदा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

बैठक में एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, डीजी शिक्षा श्रीमती आकांक्षा कोण्डे, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, डाॅ. पीडी माथुर आदि उपस्थित रहे।


स्कूलों में इन टीमों का होगा गठन

प्रत्येक विद्यालय के आपदा प्रबंधन प्लान के तहत चेतावनी एवं सूचना टीम, निकासी टीम, प्राथमिक उपचार टीम, अग्नि सुरक्षा टीम, खोज एवं बचाव टीम तथा सहायता एवं मनोसामाजिक टीम का गठन किया जाएगा। इन टीमों के माध्यम से आपदा की स्थिति में विद्यालय स्तर पर तत्काल एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इन टीमों का नेतृत्व बच्चों द्वारा किया जाएगा, जबकि शिक्षक एवं विद्यालय स्टाफ उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करेंगे। बच्चों को उनकी आयु एवं क्षमता के अनुरूप जिम्मेदारियां देकर आपदा के प्रति जागरूक, आत्मनिर्भर एवं सक्षम बनाया जाएगा।

]]>
https://researchdiary.in/gov-of-uttarakhand-3/feed/ 0 21900
हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय https://researchdiary.in/dr-nitin-upadhyay/ https://researchdiary.in/dr-nitin-upadhyay/#respond Wed, 09 Sep 2026 06:56:23 +0000 https://researchdiary.in/?p=21896

By – Dr. Nitin upadhyay

अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस से देहरादून एयर इंडिया फ्लाइट का गजब अनुभव रहा पिछले दिनों। आमतौर पर मैं टर्मिनल चेंज करने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट अवॉयड करता हूँ। साथ ही दोनों फ्लाइट्स में कम से कम एक डेढ़ घंटे का अंतर हो। तो इसी भावना से ये बनारस दिल्ली और दिल्ली देहरादून एयर इंडिया फ्लाइट्स बुक की । दोनों ही टर्मिनल 3 की फ्लाइट्स थीं और १ घंटे का सेफ गैप था। चूँकि मैं डिजी यात्रा का उपयोग करता हूँ तो चेक इन सिक्योरिटी सारे कामों में फ़ास्ट ट्रैक लेन मिल जाती है।

लेकिन इस बार जब बनारस से दिल्ली फ्लाइट AI 1111 पर वेब चेक इन करने बैठा तो बार बार एरर और एयरपोर्ट काउंटर पर ही आने को बोला गया। अब यह बड़ा फ्रस्ट्रेटिंग अनुभव था क्योंकि वेब चेक इन हो जाने से एक तो आपको एयरपोर्ट बहुत पहले नहीं पहुंचना होता, दूसरे आपका बोर्डिंग पास जनरेट हो जाता है तो आप आराम से डिजी यात्रा में भी अपना डाटा फीड कर सकते हैं और एयरपोर्ट के बाहर से ही आप डिजी यात्रा की फैसिलिटी का लाभ ले सकते हैं। परंतु बार-बार एरर मैसेज आने से यह पता चल गया कि इस फ्लाइट का वेब चेक इन किसी वजह से नहीं हो पा रहा है और एयरपोर्ट पर ही जाना पड़ेगा तो मुझे अपना सारा ट्रेवल प्लान 20-25 मिनट अर्ली करना पड़ा और फिर मैं अगले दिन निर्धारित समय से भी आधे घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचा। लाइन में लगकर पुराने तरीके से अपनी आईडी दिखाकर मैंने एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश किया। फिर मैं एयर इंडिया के काउंटर पर पहुंचा और फिर वहां पर उन्होंने मुझे अपना बोर्डिंग पास इशू किया और तब मैंने उनसे पूछा कि भाई यह बोर्डिंग पास मेरे वेब चेक इन क्यों नहीं हुआ और क्यों इशू नहीं हुआ? तब उन्होंने जो एक बात बताई वह मेरे लिए बिल्कुल नई बात थी और इसलिए मैं यह कहानी यहां लिख रहा हूं।

उन्होंने बोला कि सर यह इंटरनेशनल फ्लाइट है और इंटरनेशनल फ्लाइट में आपका वेब चेक इन नहीं होगा क्योंकि इमीग्रेशन की बहुत सी फॉर्मेलिटीज होती हैं और उन्होंने बताया यह हब एंड स्पोक मॉडल है जो कि अभी एयर इंडिया ने लॉन्च किया है जून में और यहां से फिर मेरे दिमाग की बत्ती जली और मैंने फिर रिसर्च करना शुरू किया कि यह हब एंड स्पोक मॉडल क्या होता है।

दरअसल एयर इंडिया ने 25 जून 2026 को बनारस (लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) से एयर इंडिया की AI 1111 फ़्लाइट्स के साथ ‘ईज़ी कनेक्ट’ (Easy Connect) नाम से “हब एंड स्पोक” मॉडल की आधिकारिक शुरुआत की। सरल शब्दों में समझें तो साइकिल के पहिये के बीच का केंद्र ‘हब’ होता है और उससे निकलने वाली तीलियाँ ‘स्पोक’ होती हैं। एयरलाइंस का प्लान यह है कि बनारस, देहरादून, अमृतसर या अहमदाबाद जैसे स्पोक शहरों से यात्रियों को उठाकर दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े हब पर लाया जाए। जो यात्री लंदन, फ्रैंकफर्ट, दुबई या सिंगापुर जा रहे हैं, वे अपने पहले शहर में ही अपना अंतरराष्ट्रीय इमीग्रेशन और बैगेज चेक-इन पूरा कर लेंगे। दिल्ली पहुँचकर उन्हें दोबारा इमीग्रेशन या सुरक्षा जाँच की लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा और वे सीधे अपनी कनेक्टिंग इंटरनेशनल फ्लाइट में बैठ जाएँगे।

कागज़ों पर और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के दृष्टिकोण से यह एक क्रांतिकारी और ‘सीमलेस’ व्यवस्था है। लेकिन इसी सिक्के का दूसरा पहलू वह है, जिसका सामना मेरे जैसे एक डोमेस्टिक यात्री ने किया। मुझे लगा था कि दिल्ली के टर्मिनल 3 पर उतरकर मैं हमेशा की तरह डोमेस्टिक ट्रांसफर एरिया की तरफ़ आराम से बढ़ जाऊँगा और अपने अगले बोर्डिंग गेट पर पहुँच जाऊँगा।

लेकिन चूँकि यह फ़्लाइट हब एंड स्पोक मॉडल में सीधे इंटरनेशनल अराइवल पर उतरी, इसलिए पूरी फ़्लाइट के यात्रियों को इंटरनेशनल क्षेत्र में ही डी-बोर्ड किया गया।मेरे पास दिल्ली से देहरादून की कनेक्टिंग फ़्लाइट के लिए महज़ 50 मिनट का लेओवर टाइम बचा था। डोमेस्टिक यात्रियों के लिए वहाँ कोई अलग, आसान रास्ता या स्पष्ट साइनबोर्ड नहीं था। एयर इंडिया के एक ग्राउंड स्टाफ ने हमें एस्कॉर्ट करना शुरू किया और उसके बाद जो भाग-दौड़ शुरू हुई, वह किसी मैराथन से कम नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय इमीग्रेशन काउंटरों के पास से होते हुए, एयरलाइन स्टाफ की मदद से हमें किसी तरह फास्ट-ट्रैक कराया गया। इसके बाद पूरे टर्मिनल से बाहर निकलकर, इंटरनेशनल अराइवल से वापस ऊपर डोमेस्टिक डिपार्चर एरिया की तरफ़ भागना पड़ा। वहाँ दोबारा से सुरक्षा जाँच की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा। 40 मिनट तक लगातार भागते-दौड़ते रहने के बाद, जब हम हाँफते हुए देहरादून जाने वाले बोर्डिंग गेट पर पहुँचे, तब जाकर जान में जान आई।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मैंने देखा कि मेरे साथ कई ऐसे यात्री भी थे, जो ‘फ्रीक्वेंट फ्लायर्स’ नहीं थे। वे पूरी तरह से भ्रमित थे कि उन्हें किधर जाना है। इसके लिए सबसे पहले मेकमायट्रिप, गोइबीबो , एयरलाइन आदि की आधिकारिक वेबसाइट पर टिकट बुकिंग के दौरान ही स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि यह एक ‘हब एंड स्पोक’ या इंटरनेशनल-लिंक्ड फ्लाइट है, ताकि यात्री को पहले से ज्ञात रहे कि इसका वेब चेक-इन उपलब्ध नहीं होगा। इसके अलावा, ऐप पर केवल कोई तकनीकी खराबी दिखाने के बजाय स्पष्ट संदेश आना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट और इमीग्रेशन प्रक्रिया के कारण बोर्डिंग पास केवल काउंटर पर मिलेगा, जिससे यात्री पैनिक न हो और समय से पहले एयरपोर्ट पहुँचे। साथ ही, वेब चेक-इन न होने की स्थिति में एयरपोर्ट के मुख्य द्वार पर ऐसे डोमेस्टिक यात्रियों के लिए विशेष काउंटर की सुविधा होनी चाहिए ताकि वे बिना डिजी यात्रा के आसानी से प्रवेश पा सकें, और अंत में, दिल्ली T3 जैसे बड़े हब एयरपोर्ट्स पर इंटरनेशनल टर्मिनल में उतरने वाले डोमेस्टिक यात्रियों के लिए एक अलग व समर्पित ट्रांजिट कॉरिडोर बनाया जाना चाहिए, जो उन्हें इमीग्रेशन या मुख्य निकास क्षेत्र में भेजे बिना सीधे डोमेस्टिक डिपार्चर सुरक्षा क्षेत्र तक पहुँचा सके।

]]>
https://researchdiary.in/dr-nitin-upadhyay/feed/ 0 21896
कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान https://researchdiary.in/k-s-chauhan/ https://researchdiary.in/k-s-chauhan/#respond Tue, 08 Sep 2026 15:23:44 +0000 https://researchdiary.in/?p=21892

  • चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना
  • तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन की रुचि
  • कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा


चेन्नई में मंगलवार को ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ’ में उत्तराखंड की फिल्म नीति और राज्य की खूबसूरत शूटिंग लोकेशंस को प्रस्तुत किया गया। कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रमुख फिल्ममेकर्स, प्रोड्यूसर्स तथा फिल्म कमीशन के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में प्रसार भारती वेव्स ओटीटी, उत्तराखंड एफडीसी और महाराष्ट्र एफएससीडीसी सहित विभिन्न प्रदर्शकों ने प्रतिभाग किया। साथ ही ट्यूनीशिया, इटली, थाईलैंड, रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और अजरबैजान सहित कई देशों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रही। कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद् के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने प्रतिभाग कर राज्य की फिल्म नीति और शूटिंग की संभावनाओं के संबंध में विचार साझा किए।

श्री चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड में फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहन देने के लिए फिल्म नीति लागू की गई है। फिल्म नीति के तहत फिल्म निर्माताओं को हर सम्भव सहायता प्रदान की जा रही है। उत्तराखंड में फिल्माई गई हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में फिल्म शूटिंग की अनुमति अब ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने के साथ सिंगल विंडो सिस्टम के तहत 7 दिनों के भीतर फिल्मांकन की अनुमति प्रदान की जा रही है। प्रदेश में शूटिंग शुल्क को माफ किया गया है। शूटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था तथा जीएमवीएन और केएमवीएन गेस्ट हाउसों में विशेष छूट भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष 200 से अधिक फिल्म वेब सीरीज सीरियल की शूटिंग उत्तराखण्ड में हो रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

श्री चौहान ने बताया कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त राज्य है। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनाते हुए उत्तराखण्ड को एक सशक्त फिल्म शूटिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

कॉन्क्लेव के दौरान उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद् के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान द्वारा तमिल फिल्म इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स एवं डायरेक्टर्स के साथ वन-टू-वन बैठकें आयोजित की गईं। इंडिया टॉकीज, स्टोन बीच स्टूडियो, गिरीश प्रधान, बीटीजीआई प्रोडक्शंस (यूएस), पारसा पिक्चर, लाइका प्रोडक्शंस, मसाला पिक्स और कवि क्रिएशन्स, ड्रीम वारियर पिक्चर सहित कई प्रोडक्शन हाउस ने उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग के प्रति रुचि दिखाई है।

श्री चौहान ने बताया कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों और अनुकूल फिल्म नीति के दृष्टिगत इस आयोजन में सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ-साथ फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

]]>
https://researchdiary.in/k-s-chauhan/feed/ 0 21892
सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना https://researchdiary.in/wadia-institute-of-himalayan-geology-nih-roorkee-sdrf-ndrf-and-nehru-institute-of-mountaineering/ https://researchdiary.in/wadia-institute-of-himalayan-geology-nih-roorkee-sdrf-ndrf-and-nehru-institute-of-mountaineering/#respond Tue, 08 Sep 2026 15:06:00 +0000 https://researchdiary.in/?p=21886

  • सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना
  • सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी
  • मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं


प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से संभावित जोखिमों को कम करने तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल मंगलवार को रवाना हो गया है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं।

माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इसके अंतर्गत झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली तथा अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जाएगा।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से 04 ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जबकि शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का बैथीमेट्री सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल को रवाना किया गया है। सर्वेक्षण के दौरान दोनों ग्लेशियर झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। श्री सुमन ने बताया कि सरस्वती ताल लगभग 5700 मीटर तथा केदारताल लगभग 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अत्यधिक ऊंचाई एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित इन झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

वहीं उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग विनय रुहेला तथा ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने भी विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा आदि उपस्थित रहे।

विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों की संयुक्त भागीदारी

सर्वेक्षण अभियान में विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों एवं सुरक्षा बलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ दल में यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी, बाबा साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की संयुक्त भागीदारी से ग्लेशियर झीलों की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का बहुआयामी एवं वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। दल में रोहित कुमार (यूएसडीएमए, देहरादून), निखिल पुनिया (यूएसडीएमए, देहरादून), डॉ. विशाल (यूएलएमएमसी, देहरादून), दीपक भट्ट (यूएलएमएमसी, देहरादून), डॉ. शेख नवाज अली (बीएसआईपी, लखनऊ), शुभजीत घोष (बीएसआईपी, लखनऊ), प्रकाश रंजन जेना (बीएसआईपी, लखनऊ), डॉ. पिंकी बिष्ट (वाडिया, देहरादून), स्वप्निल बिष्ट (वाडिया, देहरादून), शिव्यांक सिंह नेगी (वाडिया, देहरादून), शिव शंकर यादव (एनआईएच, रुड़की), डॉ. शिवानंद मंडराहा (एनआईएच, रुड़की), नितेश खेतवाल (एसडीआरएफ, देहरादून), संदीप सिंह (एसडीआरएफ, देहरादून), सचिन कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), मनीष कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), महेंद्र (जिला चमोली), मनोज सिंह (जिला चमोली), शार्दुल गुसाईं, डीडीएमओ (जिला उत्तरकाशी) तथा इंजी. नरेंद्र सिंह रावत (जिला उत्तरकाशी) शामिल हैं।

]]>
https://researchdiary.in/wadia-institute-of-himalayan-geology-nih-roorkee-sdrf-ndrf-and-nehru-institute-of-mountaineering/feed/ 0 21886
जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर https://researchdiary.in/mike-hydro-basin/ https://researchdiary.in/mike-hydro-basin/#respond Mon, 07 Sep 2026 15:38:39 +0000 https://researchdiary.in/?p=21883
  • जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

  • देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी हाइब्रिड मोड में कर रहे प्रतिभागिता

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून में जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला ‘Integrated Water Resources Modeling and Basin Management Using MIKE Hydro Basin’ का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। 7 एवं 8 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन ICAR-IISWC, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), देहरादून तथा DHI India के संयुक्त तत्वावधान में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के INCCC प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया जा रहा है।
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 400 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन एवं ऑन-साइट हाइब्रिड मोड के माध्यम से भाग ले रहे हैं। इनमें SARRA से जुड़े हाइड्रोलॉजिस्ट, GIS विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विभिन्न शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के संकाय सदस्य, पर्यावरण वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हैं। यह व्यापक सहभागिता देश में जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक मॉडलिंग तकनीकों के प्रति बढ़ती रुचि और आवश्यकता को दर्शाती है।

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य प्रतिभागियों को MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन एवं बेसिन प्लानिंग की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। प्रशिक्षण के दौरान GIS डेटा प्रोसेसिंग, हाइड्रोलॉजिकल सिमुलेशन, मॉडल सेट-अप, इनपुट डेटा तैयार करने, मॉडल कैलिब्रेशन एवं वैलिडेशन, परिदृश्य विश्लेषण तथा निर्णय समर्थन प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन तथा भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप जल संसाधन प्रबंधन की रणनीति विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

आयोजन अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक (SWCE) डॉ. अमरीश कुमार ने स्वागत संबोधन में कार्यशाला के उद्देश्यों और इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक मॉडलिंग एवं वैज्ञानिक डेटा आधारित तकनीकों का प्रभावी उपयोग जल संसाधनों के बेहतर नियोजन और दीर्घकालिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक जलागम डॉ. ए.के. डिमरी, उप निदेशक SARRA डॉ. डी.एस. रावत, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश (LWME), डॉ. उदय मंडल (SWCE), डॉ. रमा पाल सहित अनेक वैज्ञानिक, विशेषज्ञ एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हिमालयी नदियों से लेकर भूजल पुनर्भरण तक विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला के प्रथम दिवस राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के पूर्व वैज्ञानिक ‘जी’ एवं अध्यक्ष डॉ. आर.पी. पांडे ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में नदियों के पुनरुद्धार की रणनीतियों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नदी पुनरुद्धार के लिए वैज्ञानिक एवं समेकित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके पश्चात DHI India की विशेषज्ञ टीम ने MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर के परिचय, प्रोजेक्ट इनिशियलाइजेशन तथा सॉफ्टवेयर के विभिन्न टूल्स एवं कार्यप्रणाली से प्रतिभागियों को परिचित कराया।
NIH रुड़की के वैज्ञानिक ‘सी’ डॉ. अजय अहिरवार ने MIKE Hydro Basin में मॉडल सेट-अप एवं आवश्यक इनपुट डेटा तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रतिभागियों को मॉडल सिमुलेशन, कैलिब्रेशन एवं वैलिडेशन के साथ-साथ वास्तविक डेटा पर Hands-on Exercises के माध्यम से तकनीकी दक्षता विकसित करने का अवसर दिया जा रहा है।
कार्यशाला में बेसिन प्रबंधन के लिए विभिन्न संभावित परिस्थितियों का Scenario Analysis तथा प्रभावी नीति एवं योजना निर्माण हेतु Decision Support System के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इसी क्रम में CSSRI करनाल के पूर्व निदेशक डॉ. एस.के. कामरा द्वारा ‘Water Positive Landscape’ विकसित करने के लिए भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के डिजाइन, उपयुक्त स्थल चयन एवं प्रभावी कार्यान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ विचार साझा किए जाएंगे।

जल संकट की चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती जल मांग, जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के दौर में केवल पारंपरिक जल प्रबंधन उपाय पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में डेटा आधारित मॉडलिंग, वैज्ञानिक विश्लेषण और आधुनिक निर्णय समर्थन प्रणालियां भविष्य की जल नीति एवं बेसिन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला वैज्ञानिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं, जल विशेषज्ञों एवं युवा शोधकर्ताओं के बीच ज्ञान एवं तकनीकी अनुभव के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच उपलब्ध करा रही है। साथ ही, इससे हिमालयी एवं अन्य नदी बेसिनों के समेकित प्रबंधन, जल सुरक्षा, भूजल पुनर्भरण, नदी पुनरुद्धार और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल जल संसाधन रणनीतियां विकसित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।
कार्यशाला को जल संकट की चुनौतियों से निपटने, जल संसाधनों के बेहतर नियोजन तथा टिकाऊ एवं जल-सुरक्षित बेसिन विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
]]>
https://researchdiary.in/mike-hydro-basin/feed/ 0 21883
डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://researchdiary.in/dijital-yug/ https://researchdiary.in/dijital-yug/#respond Mon, 07 Sep 2026 15:12:04 +0000 https://researchdiary.in/?p=21880

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा “डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई है। उद्घाटन सत्र में बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह तथा मुख्य अतिथि के रूप में गढ़ गौरव लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के मीडिया अध्यक्ष प्रो॰ गोविन्द सिंह व जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण उपस्थित रहे हैं।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की है। उन्होने डिजिटल युग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने लोकगायक के रूप में अपनी अब तक की यात्रा के माध्यम से लोक संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। कहा कि डिजिटल माध्यमों ने कलाकारों को सृजनात्मक स्वतंत्रता के साथ-साथ व्यापक सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। वर्तमान डिजिटल दौर की संभावनाओं और चुनौतियों पर उन्होंने चर्चा करते हुए उभरते गीतकारों एवं कलाकारों से लोकसंस्कृति के मूल स्वरूप और लोकजीवन से जुड़े गीतों के सृजन का आह्वान किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी के लिए आयोजन मंडल को बधाई दी। विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अपने लोक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थी और अध्यापक के आपसी सामंजस्य तथा भारतीय जीवन परंपरा में निहित लोक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराखंड के कण-कण में लोक संस्कृति के संवाहक सूत्र समाहित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लोक संस्कृति के विविध पक्षों को जानने और समझने के लिए प्रेरित किया।

विशेष उद्बोधन में जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने पर्वतीय लोक संस्कृति और लोकगीत परंपरा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विभूतियों को नमन किया तथा लोक के विविध पक्षों की व्याख्या की। उन्होंने डिजिटल युग में गंभीरता और स्वीकार्यता के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए ढोल सागर, पंवाड़ा आदि पर्वतीय लोक विधाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

इससे पूर्व प्रो. मंजुला राणा ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डिजिटल युग में “क्या खोया और क्या पाया” जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाया। उन्होंने पर्वतीय लोक संस्कृति के क्षेत्र में अतिथि वक्ताओं के योगदान को रेखांकित करते हुए डिजिटल युग में युवाओं में कम होते धैर्य एवं सहिष्णुता पर भी विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर लोकगायिका अनुराधा निराला, प्रो॰ कुलसचिव प्रो॰ वाई पी रैवानी, छात्र सलाहकार प्रो॰ एमएम सेमवाल, एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो॰ डी एस नेगी, चौरास परिसर के उप निदेशक प्रो॰ राजेंद्र सिह नेगी, प्रो॰ मोनिका गुप्ता मेम, प्रो॰ जी. पी. भट्ट, प्रो॰ एम. एस. नेगी, प्रो॰ वी. पी. नेथानी, प्रो॰ गुड्डी बिष्ट, डॉ. विश्वेश वाग्मी, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, डॉ सविता भंडारी, डॉ आरुषि उनियाल, डॉ सुभाष चन्द्र, डॉ नितिन, डॉ. शंकर परगाई जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा, इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अन्य अतिथि शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने शिरकत की। जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ॰ अनूप सेमवाल ने किया है।

]]>
https://researchdiary.in/dijital-yug/feed/ 0 21880
Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas https://researchdiary.in/shaurya-and-legacy-of-karmaveer-jayanand-bharti-remembered-on-the-94th-anniversary-of-pauri-kranti-diwas/ https://researchdiary.in/shaurya-and-legacy-of-karmaveer-jayanand-bharti-remembered-on-the-94th-anniversary-of-pauri-kranti-diwas/#respond Mon, 07 Sep 2026 14:14:07 +0000 https://researchdiary.in/?p=21874

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

By – Prem Pancholi
The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized a commemorative programme in Kotdwar, Garhwal, to honour Karmaveer Jayanand Bharti on the 94th anniversary of the historic Pauri Kranti Diwas, observed on September 6, 1932, as a significant chapter in the freedom struggle in Garhwal.
During the programme, speakers reflected on Jayanand Bharti’s historic Dola-Palki Movement and his contribution to India’s freedom struggle. They emphasized that the issues and principles for which Bharti fought remain relevant even today, and that society needs movements inspired by his legacy to address contemporary challenges.
The programme was chaired by Jogaram Tamta, veteran journalist and Editor of Shilpkar Times. Former Cabinet Minister Surendra Singh Negi was the chief guest.
On the occasion, the Shail Shilpi Vikas Sangathan conferred the Jayanand Bharti Award upon Kishore, an RTI activist and journalist from Pithoragarh.
Speaking on the occasion, former minister Surendra Singh Negi said that the valour and contribution of Jayanand Bharti could never be forgotten. He said that Karmaveer Jayanand Bharti fulfilled his responsibilities as a freedom fighter with dedication, although he was never officially accorded the government’s recognition as a freedom fighter. Nevertheless, society has always regarded him as one.
Negi said that along with participating in the freedom struggle, Bharti also led a widespread movement against social evils and discriminatory practices prevalent in society. His struggle ultimately succeeded and the Dola-Palki Movement became an inspiring example in the Himalayan region of Uttarakhand.
He further said that Jayanand Bharti was imprisoned and remained steadfast in his opposition to British rule. His life, he said, should not merely be remembered as a part of history; his ideals and activism remain relevant even today.
Expressing concern over the present situation, Negi said that the condition of society has deteriorated considerably and that freedom of expression is increasingly under threat. “This is precisely why there is a need today to follow in the footsteps of Jayanand Bharti,” he said.
Social thinker Indresh Maikhuri said that the courage and struggles of Jayanand Bharti remain alive in history. Addressing both historical and contemporary issues, he said that while society is moving towards technology and new innovations, attempts are simultaneously being made to push India, and particularly Uttarakhand, back into a regressive and conservative social environment. He warned that such a trend could create serious challenges for the future.
Maikhuri emphasized that “Jayanand Bharti is needed once again today”, particularly to inspire society to stand against injustice and regressive practices.
Among those present on the occasion were Jogaram Tamta, Editor of Shilpkar Times; Vinod Arya, Assistant Director, Urban Development; Raghunath Lal Arya; Om Prakash Bharti; Dheeraj Barswan; Advocate Avnish Negi; Dr. Diwakar Bauddh; M. L. Bharti; Surendra Lal Arya; Dr. Surendra Arya; and environmentalist Mr. Soni.
]]>
https://researchdiary.in/shaurya-and-legacy-of-karmaveer-jayanand-bharti-remembered-on-the-94th-anniversary-of-pauri-kranti-diwas/feed/ 0 21874
समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान https://researchdiary.in/dm-dr-aashish-chauhan/ https://researchdiary.in/dm-dr-aashish-chauhan/#respond Mon, 07 Sep 2026 14:05:11 +0000 https://researchdiary.in/?p=21871
जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में हुई जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से संबंधित 120 शिकायतें दर्ज की गईं। जिलाधिकारी ने शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने ई-ऑफिस, सीएम घोषणा एवं सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा भी की और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का भी प्राथमिकता एवं समयबद्वता से निस्तारण करने के निर्देश दिए।
ऋषिकेश भजन आश्रम के सचिव ने अद्वैतानंद मार्ग स्थित भजन आश्रम भवन संख्या-2 तथा तिलक मार्ग स्थित भवन संख्या-3 के जर्जर होने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि दोनों भवनों में करीब 90 किराएदार रह रहे हैं और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद भवन खाली नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने संभावित दुर्घटना की आशंका जताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम ऋषिकेश एवं नगर निगम को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
70 वर्षीय विधवा प्रेमा रावत ने भूमि धोखाधड़ी का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी डीलर ने धोखाधड़ी कर उनकी 228 वर्गमीटर भूमि का विक्रय पत्र तैयार कर भूमि बेच दी तथा उन्हें 90 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया। पैसा मांगने पर जान से मारने की धमकी दिए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर को मामले की जांच के निर्देश दिए।
रायपुर निवासी कृष्ण कुमार ने शिकायत की कि उन्होंने संजय कुमार के पास पांच लाख रुपये की तीन कमेटियां 15 माह के लिए डाली थीं। इसके अतिरिक्त 30.75 लाख रुपये उधार दिए गए, लेकिन संबंधित व्यक्ति द्वारा धनराशि वापस नहीं की जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए सीओ रायपुर को निर्देशित किया।
ग्राम पंचायत सिंधवाल के उपप्रधान ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन की जर्जर छत की मरम्मत न होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को मौके की जांच कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
त्यूनी-चकराता-मसूरी मोटर मार्ग पर बारिश के कारण बोल्डर गिरने और पुस्ता क्षतिग्रस्त होने से आवागमन बाधित होने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने एनएच के अधिकारियों को सड़क को शीघ्र सुगम बनाने के निर्देश दिए।
सहसपुर के ग्राम पंचायत छरबा में आवासीय भूमि पर मोबाइल टावर लगाए जाने तथा एमडीडीए द्वारा टावर को अवैध घोषित किए जाने के बावजूद उसे न हटाए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने एमडीडीए को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं कृष्णा विहार में घनी आबादी के बीच मकान की छत पर मोबाइल टावर लगाए जाने की शिकायत पर ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को जांच के निर्देश दिए गए।
पटेल नगर निवासी 75 वर्षीय विधवा ऊषा सूरी ने किराएदार पर उत्पीड़न करने, किराया न देने तथा मकान पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ पटेल नगर को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
रेसकोर्स निवासी 65 वर्षीय माला देवी ने अपने छोटे बेटे और बहू पर मारपीट का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर ही प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए।
नत्थनपुर छह नंबर पुलिया के आसपास सब्जियों एवं अन्य सामान की ठेलियों के कारण यातायात जाम और अन्य समस्याओं की शिकायत पर नगर निगम देहरादून को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
आर्थिक रूप से कमजोर अनिता निवासी नीलकंठ और अनिता थापा निवासी मोथरोवाला ने कच्चे मकानों की मरम्मत के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। वहीं ऋषिकेश निवासी रीना ने नंदा-सुनंदा योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने का अनुरोध किया।
ग्राम पंचायत रामपुर कलां में पंचायत भवन की खाली भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत पर जिला पंचायत राज अधिकारी को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। ग्राम पंचायत चान्जोई में बहुउद्देशीय भवन निर्माण की मांग पर प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया।
चकराता क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुनैन के ग्राम सैंज में दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त नहर की सुरक्षा दीवार एवं गूल की मरम्मत की मांग पर ओसी कलेक्ट्रेट को मौके पर जांच कर प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक प्रकरण में गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) केके मिश्रा, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई दीक्षांत गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम लाल भारती, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी शशि कांत गिरी, मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र राणा सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
https://www.facebook.com/janmanchaajkal/?locale=hi_IN
]]>
https://researchdiary.in/dm-dr-aashish-chauhan/feed/ 0 21871
झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं। https://researchdiary.in/jheel-gaumukh/ https://researchdiary.in/jheel-gaumukh/#respond Sat, 05 Sep 2026 06:11:11 +0000 https://researchdiary.in/?p=21868
गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया

मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए ने वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान से मांगी स्थिति की जानकारी


———————————————————-
गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में कुछ छोटी हिमनदीय झीलों के दिखाई देने तथा इनके कारण संभावित खतरे से संबंधित खबरें विभिन्न मीडिया माध्यमों में प्रसारित हो रही थीं। इन खबरों के संदर्भ में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून से इस संबंध में वैज्ञानिक स्थिति एवं वर्तमान परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की गई। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की ओर से ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध नवीनतम उपग्रह चित्रों, क्षेत्रीय अवलोकनों तथा ग्लेशियर की भौगोलिक एवं जलवैज्ञानिक परिस्थितियों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की गई है।

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अनुसार उपलब्ध सेटेलाइट इमेज, क्षेत्रीय अवलोकनों तथा ग्लेशियर की भौगोलिक एवं जलवैज्ञानिक परिस्थितियों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाता है कि इस क्षेत्र में देखी जाने वाली अधिकांश छोटी ग्लेशियल झीलें अस्थायी प्रकृति की हैं तथा इनमें जल की मात्रा बहुत कम होती है। इन झीलों का निर्माण मुख्यतः ग्लेशियर की सतह पर बर्फ के पिघलने से बने छोटे-छोटे अवसादों में जल के अस्थायी रूप से एकत्रित होने के कारण होता है। तापमान, हिमपिघलन, वर्षा तथा ग्लेशियर की सतह की परिस्थितियों में परिवर्तन के साथ इन झीलों का आकार और जल की मात्रा तेजी से बदल सकती है। परिणामस्वरूप, ये झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं और बाद में जल के निकास, बर्फ के पुनः जमने अथवा सतही परिवर्तन के कारण स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में देखी गई इन झीलों का आकार अपेक्षाकृत छोटा तथा जल आयतन बहुत कम है। इनमें सामान्यतः बड़े हिमनदीय झीलों की तरह विशाल मात्रा में जल संचित होने की क्षमता नहीं होती। इसलिए वर्तमान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन छोटी सुप्राग्लेशियल झीलों से अचानक बड़े पैमाने पर बाढ़ अथवा ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड जैसी किसी गंभीर आपदा का तत्काल खतरा नहीं पाया गया है।  यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि सभी जल निकायों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं है। किसी हिमनदीय झील के संभावित खतरे का आकलन केवल उसके अस्तित्व के आधार पर नहीं, बल्कि उसके आकार, जल आयतन, जल संचयन की प्रकृति, बांध, हिमनदीय संरचना, संभावित निकासी मार्ग तथा आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों के समग्र अध्ययन के आधार पर किया जाता है।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में समय-समय पर दिखाई देने वाली छोटी सुप्रो ग्लेशियल झीलें मुख्यतः अस्थायी, छोटे आकार की तथा कम जल मात्रा वाली हैं। इनका निर्माण और विलुप्त होना ग्लेशियर की प्राकृतिक मौसमी एवं सतही प्रक्रियाओं का हिस्सा है। वर्तमान वैज्ञानिक आकलन के अनुसार इन छोटी झीलों से किसी बड़े तात्कालिक खतरे की स्थिति नहीं है। हिमालयी ग्लेशियरों एवं हिमनदीय झीलों में जलवायु तथा हिमपिघलन की परिस्थितियों के कारण समय के साथ होने वाले परिवर्तनों की निगरानी के लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून द्वारा उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, देहरादून के सहयोग से ऐसी हिमनदीय झीलों की उपग्रह आधारित तथा क्षेत्रीय निगरानी पहले से ही की जा रही है। इसके अंतर्गत उपग्रह आंकड़ों के माध्यम से नियमित निगरानी के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार क्षेत्रीय वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं अध्ययन भी किए जाते हैं, ताकि हिमनदीय झीलों में होने वाले परिवर्तनों तथा उनसे जुड़े संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सके।

यह भी महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक हिमनदीय झील की प्रकृति, भौगोलिक स्थिति, जलग्रहण क्षेत्र, हिमनदीय परिस्थितियों तथा स्थानीय भू-आकृतिक विशेषताएं अलग-अलग होती हैं। प्रत्येक झील के संभावित जोखिम का आकलन उसके स्थानीय भौगोलिक, हिमनदीय एवं जलवैज्ञानिक परिस्थितियों के आधार पर पृथक रूप से किया जाना आवश्यक होता है।

]]>
https://researchdiary.in/jheel-gaumukh/feed/ 0 21868
आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार https://researchdiary.in/aayog-sc-uttarakhand-mukesh-kumar/ https://researchdiary.in/aayog-sc-uttarakhand-mukesh-kumar/#respond Sat, 05 Sep 2026 05:59:43 +0000 https://researchdiary.in/?p=21864

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता में आयोग कार्यालय देहरादून में आयोजित तीन दिवसीय जनसुनवाई कार्यक्रम में कुल 45 शिकायतों की सुनवाई की गई। इनमें से दोनों पक्षों की मौजूदगी में 26 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

आयोग अध्यक्ष ने कहा कि आयोग का उद्देश्य अनुसूचित जाति समाज के पीड़ित एवं वंचित लोगों को संविधान एवं कानून के तहत त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। आयोग शिकायतों की सुनवाई के साथ पात्र एवं जरूरतमंद लोगों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी से शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण में सुविधा होती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने दायित्वों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आयोग तक आने की आवश्यकता न पड़े।

आयोग की सचिव कविता टम्टा ने बताया कि 1 से 3 सितंबर तक आयोजित जनसुनवाई में टिहरी, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर सहित विभिन्न जिलों से आए लोगों की समस्याएं सुनी गईं। उन्होंने अधिकारियों को आयोग द्वारा दिए जाने वाले आदेशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई में अनुसूचित जाति परिवारों की भूमि से अवैध कब्जा हटाने, भूमि पैमाइश, उत्पीड़न, आउटसोर्स कार्मिकों को सेवा से न हटाने, भूमि का मालिकाना हक, पदोन्नति, सेवा बहाली एवं जातिगत भेदभाव सहित विभिन्न मामलों की सुनवाई की गई।

इस अवसर पर आयोग के सदस्य विशाल मुखिया, सुनीता देवी, भागीरथी कुंजवाल, विधि सलाहकार राजू मेहर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

]]>
https://researchdiary.in/aayog-sc-uttarakhand-mukesh-kumar/feed/ 0 21864