Deputy Director of Chauras Campus Prof. Rajendra Singh Negi – Research Diary https://researchdiary.in Research Diary Mon, 07 Sep 2026 15:17:01 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://i0.wp.com/researchdiary.in/wp-content/uploads/2023/07/cropped-Research-Diary-Logo.jpeg?fit=32%2C32&ssl=1 Deputy Director of Chauras Campus Prof. Rajendra Singh Negi – Research Diary https://researchdiary.in 32 32 230867523 डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://researchdiary.in/dijital-yug/ https://researchdiary.in/dijital-yug/#respond Mon, 07 Sep 2026 15:12:04 +0000 https://researchdiary.in/?p=21880

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा “डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई है। उद्घाटन सत्र में बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह तथा मुख्य अतिथि के रूप में गढ़ गौरव लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के मीडिया अध्यक्ष प्रो॰ गोविन्द सिंह व जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण उपस्थित रहे हैं।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की है। उन्होने डिजिटल युग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने लोकगायक के रूप में अपनी अब तक की यात्रा के माध्यम से लोक संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। कहा कि डिजिटल माध्यमों ने कलाकारों को सृजनात्मक स्वतंत्रता के साथ-साथ व्यापक सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। वर्तमान डिजिटल दौर की संभावनाओं और चुनौतियों पर उन्होंने चर्चा करते हुए उभरते गीतकारों एवं कलाकारों से लोकसंस्कृति के मूल स्वरूप और लोकजीवन से जुड़े गीतों के सृजन का आह्वान किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी के लिए आयोजन मंडल को बधाई दी। विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अपने लोक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थी और अध्यापक के आपसी सामंजस्य तथा भारतीय जीवन परंपरा में निहित लोक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराखंड के कण-कण में लोक संस्कृति के संवाहक सूत्र समाहित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लोक संस्कृति के विविध पक्षों को जानने और समझने के लिए प्रेरित किया।

विशेष उद्बोधन में जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने पर्वतीय लोक संस्कृति और लोकगीत परंपरा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विभूतियों को नमन किया तथा लोक के विविध पक्षों की व्याख्या की। उन्होंने डिजिटल युग में गंभीरता और स्वीकार्यता के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए ढोल सागर, पंवाड़ा आदि पर्वतीय लोक विधाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

इससे पूर्व प्रो. मंजुला राणा ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डिजिटल युग में “क्या खोया और क्या पाया” जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाया। उन्होंने पर्वतीय लोक संस्कृति के क्षेत्र में अतिथि वक्ताओं के योगदान को रेखांकित करते हुए डिजिटल युग में युवाओं में कम होते धैर्य एवं सहिष्णुता पर भी विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर लोकगायिका अनुराधा निराला, प्रो॰ कुलसचिव प्रो॰ वाई पी रैवानी, छात्र सलाहकार प्रो॰ एमएम सेमवाल, एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो॰ डी एस नेगी, चौरास परिसर के उप निदेशक प्रो॰ राजेंद्र सिह नेगी, प्रो॰ मोनिका गुप्ता मेम, प्रो॰ जी. पी. भट्ट, प्रो॰ एम. एस. नेगी, प्रो॰ वी. पी. नेथानी, प्रो॰ गुड्डी बिष्ट, डॉ. विश्वेश वाग्मी, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, डॉ सविता भंडारी, डॉ आरुषि उनियाल, डॉ सुभाष चन्द्र, डॉ नितिन, डॉ. शंकर परगाई जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा, इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अन्य अतिथि शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने शिरकत की। जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ॰ अनूप सेमवाल ने किया है।

]]>
https://researchdiary.in/dijital-yug/feed/ 0 21880