HC nainital – Research Diary https://researchdiary.in Research Diary Sun, 16 Nov 2025 02:08:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://i0.wp.com/researchdiary.in/wp-content/uploads/2023/07/cropped-Research-Diary-Logo.jpeg?fit=32%2C32&ssl=1 HC nainital – Research Diary https://researchdiary.in 32 32 230867523 उपनल कर्मियों की धामी सरकार पर टिकी है नजरें। पढ़े यह रिपोर्ट https://researchdiary.in/upnal-worker/ https://researchdiary.in/upnal-worker/#respond Sun, 16 Nov 2025 02:08:14 +0000 https://researchdiary.in/?p=20692

उपनल कर्मियों पर “सुप्रीम कोर्ट” के फैसले के बाद अब उम्मीद “धामी सरकार” पर

हजारों परिवारों के भविष्य की सुरक्षा का है सवाल

By – Avdhesh Nautiyal

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उपनल कर्मचारियों से जुड़ी सभी पुनर्विचार याचिकाओं को एक साथ खारिज कर दिया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि 15 अक्तूबर 2024 के अपने आदेश में कोई विधिक त्रुटि नहीं है, इसलिए पुनर्विचार का प्रश्न ही नहीं उठता। यह निर्णय अब इस मुद्दे को न्यायिक रूप से अंतिम रूप देता है।

सच यह है कि उपनल कर्मियों का संघर्ष वर्षों से जारी है। 2018 के हाईकोर्ट के आदेश जिसमें चरणबद्ध नियमितीकरण का मार्ग सुझाया गया था पर अमल कानूनी खींचतान में अटक गया। बाद में दायर सभी विशेष अनुमति और पुनर्विचार याचिकाएँ अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त की जा चुकी हैं। अब सवाल यह नहीं कि अदालत क्या कहती है, सवाल यह है कि सरकार आगे क्या करती है।

वर्तमान धामी सरकार ने संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के विषय में पिछले वर्षों में कई सकारात्मक निर्णय लिए हैं। यही कारण है कि उपनल कर्मियों में यह उम्मीद बनी हुई है कि सरकार अब इस मामले को “कानूनी जटिलता” नहीं, बल्कि एक मानवीय और व्यावहारिक विषय के रूप में लेगी। उपनल कर्मचारी राज्य की स्वास्थ्य और तकनीकी सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे न्यूनतम सुरक्षा और सीमित अधिकारों के बावजूद वर्षों से निरंतर सेवा दे रहे हैं। अब जब न्यायिक मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है, तो अपेक्षा स्वाभाविक है कि सरकार नीतिगत समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए।

यह निर्णय सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ा देता है कानून का सम्मान भी, और हजारों परिवारों के भविष्य की सुरक्षा भी।
धामी सरकार यदि इस प्रश्न पर संवेदनशील और दूरदर्शी फैसले लेती है, तो यह न केवल उपनल कर्मियों के संघर्ष का अंत होगा, बल्कि एक बड़ी प्रशासनिक सुधार की शुरुआत भी।

उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री प्रमोद सिंह गुसाईं के मुताबिक न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि पूर्व में 15 अक्तूबर 2024 को पारित आदेश में किसी भी तरह की स्पष्ट त्रुटि नहीं है, इसलिए उसके पुनर्विचार का कोई आधार नहीं बनता।उपनल कर्मचारियों के मामले में हाईकोर्ट के वर्ष 2018 के फैसले में कहा गया था कि कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित किया जाए।

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पुरोला की ब्लॉक प्रमुख पर लटक सकती है तलवार https://researchdiary.in/bdc-purola-2/ https://researchdiary.in/bdc-purola-2/#respond Thu, 13 Nov 2025 07:47:12 +0000 https://researchdiary.in/?p=20688

उच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक मालचंद की पुत्रवधू श्रीमती निशिता को राहत देने से इनकार कर दिया है और शख्त निर्देश दिए कि तीन सप्ताह के भीतर न्यायालय में जबाव दाखिल करें।

बता दें कि हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में उत्तरकाशी के पुरोला से निशिता शाह ने क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर जीत हासिल करने के बाद पुरोला की क्षेत्र पंचायत प्रमुख पद पर भी जीत हासिल की है। विपक्षी सदस्य ने आरोप लगाया कि निशिता शाह का जाति प्रमाण पत्र अनुसूचित जनजाति का है जबकि वह अनुसूचित जाति पर कब्जा कर बैठी। जो न्याय संगत नहीं है। इस पर तब से न्यायालय में विवेचना चल रही थी जो अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गया। इसी निर्णय को माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल ने सुरक्षित रखकर निर्देश दिए कि तीन सप्ताह के भीतर न्यायालय में अपना जबाव दाखिल करें।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ब्लॉक अध्यक्ष, पुरोला श्रीमती निशिता (पूर्व विधायक मालचंद की पुत्रवधू) को एक महत्वपूर्ण मामले में राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने संबंधित पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह मामला श्रीमती निशिता द्वारा माननीय जिला न्यायालय, उत्तरकाशी सीनियर डिवीजन के माननीय न्यायाधीश श्रीमती जय श्री राणा के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई याचिका से उपजा है। उक्त आदेश में न्यायाधीश ने श्रीमती निशिता के खिलाफ दो अलग-अलग जाति प्रमाण पत्रों का लाभ लेने के गंभीर आरोपों पर विचार किया था।

श्रीमती आंचल की याचिका में, श्रीमती निशिता ने न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों के स्टे के निर्देश दिए गए थे।

मामले की मुख्य बातें:

1. दोहरे जाति प्रमाण पत्र का आरोप: श्रीमती निशिता पर दो अलग-अलग जाति प्रमाण पत्रों का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करने का आरोप है।
2. गलत नामांकन स्वीकार्य: यह स्वीकार किया गया है कि एक गलत तरीके से प्राप्त जाति प्रमाण पत्र के आधार पर उनका नामांकन ब्लॉक प्रमुख पद के लिए स्वीकार किया गया था।
3. जिला न्यायालय में मुकदमा जारी: उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, अब इस मामले की सुनवाई माननीय जिला न्यायालय, उत्तरकाशी सीनियर डिवीजन में जारी रहेगी, जहां आगे की कार्यवाही होनी है।

उच्च न्यायालय ने इस मामले में त्वरित सुनवाई की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, संबंधित सभी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर अपना-अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय होगी।

यह निर्णय पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत को मजबूत करता है और दर्शाता है कि कानून का शासन सभी पर समान रूप से लागू होता है।

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