kalam singh chauhan – Research Diary https://researchdiary.in Research Diary Fri, 28 Nov 2025 14:25:42 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://i0.wp.com/researchdiary.in/wp-content/uploads/2023/07/cropped-Research-Diary-Logo.jpeg?fit=32%2C32&ssl=1 kalam singh chauhan – Research Diary https://researchdiary.in 32 32 230867523 जन जन तक पहुंचाए जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी : महानिदेशक सूचना https://researchdiary.in/ias-vanshidhar-tiwari/ https://researchdiary.in/ias-vanshidhar-tiwari/#respond Fri, 28 Nov 2025 14:20:56 +0000 https://researchdiary.in/?p=20756

 

By – Prem Pancholi

 

महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने आज सूचना निदेशालय में जिला सूचना अधिकारियों (DIOs) की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने सभी DIOs को सरकार के जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों एवं योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रभावी संचार रणनीति बनाकर पेशेवर दक्षता के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया से बेहतर समन्वय बनाने और पत्रकारों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के भी निर्देश दिए।

महानिदेशक ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करना विभाग की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सभी अधिकारी और कर्मचारी समन्वित रूप से कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि योजनाओं से संबंधित सभी सूचनाएं स्पष्ट, सटीक और समय पर जनता तक पहुँचे। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकारी कार्यक्रमों और उपलब्धियों की जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि Success Stories और रोचक लेखों का नियमित रूप से प्रकाशन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिला सूचना कार्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए जिला स्तर पर मीडिया से समन्वय और अधिक मजबूत किया जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि DIO सभी सरकारी कार्यक्रमों और जनहितकारी गतिविधियों की समयबद्ध कवरेज सुनिश्चित करें। आपदा सहित अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की कवरेज की व्यवस्थाओं के संबंध में SOP तैयार की जाए। Press Sewa Portal एवं फिल्म शूटिंग की अनुमति के लिए Single Window System से संबंधित कार्य भी समयबद्ध ढंग से संपादित किए जाएं।

महानिदेशक ने कहा कि नए दौर की संचार आवश्यकताओं के अनुरूप विभागीय कार्यों की दक्षता बढ़ाने हेतु आवश्यक सुविधाओं से लैस करने के साथ ही विभाग को सशक्त बनाने हेतु भी ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। विभागीय पुनर्गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। खाली पदों को भरने के लिए अधियाचन भेजा गया है।

उन्होंने जिला सूचना कार्यालयों के कार्यों की प्रगति एवं व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी लेते हुए कहा कि कार्यालयों को शासकीय कार्यों के संपादन के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने जिला सूचना कार्यालयों के भवन निर्माण के लिए भूमि तलाश करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में संयुक्त निदेशक के.एस. चौहान, डॉ. नितिन उपाध्याय, वरिष्ठ वित्त अधिकारी श्रीमती शशि सिंह, उप निदेशक रवि बिजारनिया, मनोज श्रीवास्तव सहित विभिन्न जिलों के जिला सूचना अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

]]>
https://researchdiary.in/ias-vanshidhar-tiwari/feed/ 0 20756
नजीर बन गई जौनसारी फिल्म मेरे गांव की बाट https://researchdiary.in/jaunsari-film/ https://researchdiary.in/jaunsari-film/#respond Sun, 29 Dec 2024 10:33:26 +0000 https://researchdiary.in/?p=1485

मेरे गांव की बाट यानी मेरे गांव का रास्ता नाम से पहली बार जौनसारी पहाड़ी बोली-भाषा की फिल्म सामने आई है। आजकल उत्तराखंड की राजधानी से लेकर एनसीआर दिल्ली और हिमाचल तक इस फिल्म ने दर्शकों के दिल में अमिट छाप छोड़ी है।

दरअसल कहानी में बहुत ट्वीट्स है। फिल्म का कथानक बहुत ही संभावनाओं, समस्या के समाधानों और पहाड़ी रीति रिवाजों से जिस तरह प्रस्तुत किया गया है वह कबीले तारीफ है। अर्थात इन्हीं विषयों में ही प्यार और मुहब्बत को दर्शाया गया है। जबकि आम तौर पर “प्यार” को बहुत ही ग्लैमर में दिखाया जाता है। मगर इस जौनसारी भाषा की पहली फिल्म ग्लैमर की दुनिया में भी जगह बना गई है।

जो गांव छोड़कर गया था वह मजबूरी में नहीं बल्कि एक पारिवारिक संकट की वजह से गांव छोड़ चुका था के दृश्य को जिस तरह से निर्देशक ने संवाद, गीत और संगीत से भरा है वह हर दर्शक को भावविभोर कर देता है।

Jaunsari film
Jaunsari film

फिल्म के कथानाक का मुख्य बिंदु जौनसारी जनजातीय शादी के रिवाज “जोजोड़े” को रखा गया है। यही दृश्य दर्शकों की सबसे पहली पसंद बनती जा रही है। “जाेजोड़े” शादी में दुल्हा नहीं बल्कि दुल्हन को दूल्हे के घर जाना होता है। इस शादी को निर्देशक ने जिस कलात्मक ढंग से संजोया है उसकी तारीफ मे हर दर्शक सिनेमा हॉल से बाहर आकर यही कह रहे है कि “कबीलेतारीफ” फिल्म है। इस फिल्म को जो भी देखे वह यही कहेगा कि अपने बेटे या बेटी की शादी नहीं बल्कि “जोजोड़ा” एक आयोजन करेंगे।

इस फिल्म में समाज के बहुत ही महत्वपूर्ण पक्ष “महिला समानता” को बखूबी दिखाया गया है। ऐसा भावनात्मक संवाद जो हर दर्शक के आंखों में आंसू छलका देता है।कथानक में महिला सम्मान का दृश्य तब सामने आया जब कहानी के एक पात्र के बेटे की शादी उसके जानी दुश्मन की बेटी से होनी थी। मगर दुश्मनी को कैसे एक महिला के सम्मान ने दोस्ती में बदल दी इसे यह फिल्म दिखाने में बहुत ही सफल रही है। जबकि यह दुश्मनी एक राजनीतिक दल के कारण बढ़ी थी। फिल्म की कहानी बताती है कि अलग अलग गांव के दो दोस्त अलग अलग राजनीतिक पार्टी में थे, चुनाव के दौरान एक दोस्त से भावावेश दूसरे दोस्त के उम्मीदवार का पोस्टर फाड़ा गया, जिस पर तत्काल इन दोनों में बड़ा झगड़ा हुआ। जिसका समाधान गांव के सयानों ने भी नहीं निकाल पाया। खैर बीस बरस बाद इन्हीं दोस्त दुश्मन के बेटा बेटी का “प्यार” परवान चढ़ गया। एक दोस्त अपने बेटे के प्यार को मांगने से पहले माफी मांगने गया। पर उस दोस्त दुश्मन ने वही उन दिनों की बात दोहराई जो चुनाव के दौरान पोस्टर फाड़ा गया था। यहां तक कह दिया कि वापस लौट जाओ वरना पोस्टर के जैसे टुकड़े टुकड़े कर दूंगा। इस पर उसके बेटे को भी गुस्सा आया और कहा कि बाबा चलो ऐसे रिश्ते न ही हों तो अच्छा है। माफी मांगने के बाद धमकी। इस पर साथ में जा रखी लड़के की मां ने अपना ढाटू लड़की के पिता के चरणों में डाल दिया और कहा कि जौनसार में महिला का बड़ा सम्मान होता है। यह भी कहा कि बहन के नाते अब तो पुराना गुस्सा छोड़ दो और उनके पति को माफ कर दो। बस इस व्यवहार से दोनों परिवार आपस में सुलहनामा करके अपनी बेटा बेटी का एक दूसरे के साथ “जोजोड़ा” रचाते है। यहीं पर फिल्म समाप्त होती है।

Jaunsari film
Jaunsari film

यह सिर्फ जौनसारी समाज में है कि जिस संकट को कोई नहीं सुलझा सकता है, उसे महिलाएं सुलझाती है और समाज उन्हें पूरा पूरा सम्मान भी देता है। अर्थात महिला समानता की जीती जाती तस्वीर इस जौनसारी फिल्म ने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

फिल्म के कथानक में और कई मोड सामने आते है। हास्य, व्यंग्य और दीदार से लबरेज यह फिल्म गांव समाज के साथ साथ गांव में स्वावलंबन को बहुत ही कुशलता के साथ दिखाती है। दरअसल इसी तरह गांव में रोजगार के उम्दा साधन खोजे जा सकते है।

संयुक्त परिवार के प्यार मुहब्बत को जिस तरह से हरेक कलाकार निभा रहा था, वह आज के समाज और एकल परिवारों के लिए सीख दे गये है। हालांकि संयुक्त परिवार आज भी जौनसार बावर में विद्यमान है। जहां जहां संयुक्त परिवार है वहां वहां खुशहाली का अंबार भी देखने को मिलता है।

और हां! फिल्म में जौनसारी गीत, नृत्य ने जो रंग भरने का कार्य किया है उससे समाज, संस्कृति और सभ्यता का बखूबी परिचय दिया गया है।

कुलमिलाकर इस जौनसारी फिल्म में अधिकांश जगह गीतों का सहारा लिया गया है। फिर भी कम संवादों में जिस तरह से फिल्म ने दर्शकों के बीच जो जगह बनाई है उसकी चहुंओर चर्चा है। हालांकि निर्देशक को ऐसा महसूस हुआ होगा कि जौनसार क्षेत्र में या उत्तराखंडी फिल्मों में बहुत ही मंझे हुए कलाकार नहीं मिल पाएंगे। फलस्वरूप फिल्म के मुख्य अभिनेता अभिनव चौहान ने सम्पूर्ण फिल्म में अभिनय कर रहे कलाकारों को बांधने का शगल प्रयास किया है। अभिनव चौहान ने कई टीवी सीरियलो में कार्य किया है। यही वजह रही कि इस फिल्म में अन्य अभिनय करने वाले नए कलाकारों को अभिनव से सीखने का सहज समय मिल गया है। खास बात यह है कि जाने माने फिल्म निर्देशक अनुज जोशी और फिल्म की संकल्पना करने वाले के० एस० चौहान (संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग) ने जो मिलकर एकदम नए कलाकारों यहां कास्ट किया है वह आने वाली फिल्मों के लिए एक नजीर बन गई है।

]]>
https://researchdiary.in/jaunsari-film/feed/ 0 1485