P saninath jauranlist – Research Diary https://researchdiary.in Research Diary Sun, 08 Feb 2026 15:39:17 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://i0.wp.com/researchdiary.in/wp-content/uploads/2023/07/cropped-Research-Diary-Logo.jpeg?fit=32%2C32&ssl=1 P saninath jauranlist – Research Diary https://researchdiary.in 32 32 230867523 मीडिया कवरेज का एक बड़ा हिस्सा अति-अमीरों की सफलता की कहानियों का गुणगान करता है – वरिष्ठ पत्रकार पी सांई नाथ https://researchdiary.in/p-sani-nath/ https://researchdiary.in/p-sani-nath/#respond Sun, 08 Feb 2026 15:38:14 +0000 https://researchdiary.in/?p=21094

तृतीय सुरजीत दास स्मृति व्याख्यान – 2026 में वरिष्ठ पत्रकार पी. साईनाथ का व्याख्यान।

 

देहरादून, 8 फरवरी, 2026.

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सायं तृतीय सुरजीत दास स्मृति व्याख्यान – 2026 आयोजित किया गया. वरिष्ठ पत्रकार पी. साईनाथ ने असमानता के युग में भारत विषय पर व्याख्यान दिया. व्याख्यान में पी. साईं नाथ ने मुख्य रुप से पत्रकारों, लेखकों, फिल्म निर्माताओं को किन विषयों पर लिखना चाहिए? इस बात को केन्द्रित किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतराष्ट्रीय स्तर की फिल्म निर्माता, लेखिका शाश्वती तालुकदार ने की.

कार्यक्रम से पूर्व रविन्द्र संगीत तथा स्व. सुरजीत दास पर केंद्रित लघु ऑडियो विजुवल भी प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के निदेशक श्री एन.रविशंकर ने पी. साईं नाथ व उपस्थित लोगों का स्वागत किया और श्रीमती विभापुरी दास ने श्री पी साईंनाथ को प्रतीक चिन्ह भेंट किया. केन्द्र के अध्यक्ष प्रो. बी के. जोशी ने सुरजीत दास स्मृति व्याख्यान श्रृंखला का परिचय और उसकी प्रांसगिता देते हुए दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की गतिविधियों से अवगत कराया.कार्यक्रम का संचालन निकोलस हॉफलैण्ड ने किया.

व्याख्यान में बोलते हुए पीं साईंनाथ ने कहा कि भारत में असमानता का स्तर अब ब्रिटिश राज के चरम काल, 1920 के दशक के स्तर के बराबर है, और संभवतः उससे भी आगे निकल गया है।

फिर भी, असमानता पर मीडिया कवरेज का एक बड़ा हिस्सा – जहाँ भी यह होता है – अति-अमीरों की सफलता की कहानियों का गुणगान करता है। एमजीएनआरईजीए के बंद होने के खतरों पर कोई गंभीर चर्चा नहीं होती – जो कोरोना वायरस महामारी के दौरान लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा थी। ऐसी स्थिति में, साईनाथ ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाये कि चिंतित पत्रकारों, स्वतंत्र मीडिया और अन्य लोगों को क्या करना चाहिए.

पलगुम्मी साईनाथ का जन्म 13 मई 1957 को हुआ था. वह भारतीय स्तंभकार और चर्चित पुस्तक “एवरीबॉडी लव्स अ गुड ड्रॉट” के लेखक हैं। उन्होंने ग्रामीण भारत पर व्यापक रूप से लिखा है, और उनके लेखन की प्रमुख रुचियां गरीबी, संरचनात्मक असमानताएं, जातिगत भेदभाव और किसानों के विरोध प्रदर्शन हैं।

उन्होंने 2014 में पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया (पीआरआई) की स्थापना की, जो एक ऑनलाइन मंच है और भारत में सामाजिक और आर्थिक असमानता, ग्रामीण मामलों, गरीबी और वैश्वीकरण के प्रभावों पर केंद्रित है। वे ट्राइकंटिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च में वरिष्ठ फेलो रहे हैं और इससे पूर्व 2014 में त्यागपत्र देने पहले द हिंदू में ग्रामीण मामलों के संपादक थे।

उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने उन्हें “अकाल और भूख के विश्व के महान विशेषज्ञों में से एक” बताया है। उनकी पुस्तक “एवरीबॉडी लव्स अ गुड ड्रॉट” एक पत्रकार के रूप में उनके क्षेत्र अध्ययनों का संकलन है और भारत में ग्रामीण अभाव के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित है।

इस अवसर पर, राजीव लोचन साह, शहाब नकवी, गौरव मिश्रा, डॉ.पंकज नैथानी, चन्द्रशेख तिवारी, डॉ. डी. के. पाण्डे,राकेश अग्रवाल, डॉ. पंकज नैथानी, जगदीश महर, योगिता थपलियाल, डॉ सुशील उपाध्याय, श्रीमती शांता एन शंकर, जे.बी. गोयल, राजीव नागिया, अरविंद शेखर,हिमांशु आहूजा, बिजू नेगी, सुंदर विष्ट सहित अनेक लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, बौद्धिक चिंतक,सामाजिक कार्यकर्ता व शहर के अनेक लोग मौजूद थे।
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