By – Mahabewr Rawanlta
हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाएं विभाग, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी
उत्तराखण्ड भाषा संस्थान देहरादून, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिमालय के लोकवृत में उत्तराखण्ड का भाषा परिवार’ पर आयोजित द्धि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुस्तक मेला के अवसर पर मुझे ‘गढ़वाली भाषा का सीमांत’ सत्र में जौनसारी के भजन दास एवं बंगाली के सुभाष रावत के साथ अध्यक्षता करने का अवसर मिला।सत्र संचालन डॉ पुष्पा बुढलाकोटी ने किया। उद्घाटन सत्र का आरंभ मेरी मातृभूमि–गीत के गायन व दीप प्रज्ज्ववन से हुआ। स्वागत प्रो गिरजा पांडे,विषय प्रवेश डॉ शशांक शुक्ला,बीज वक्तव्य प्रो बी आर जगन्नाथन, विशिष्ट वक्तव्य प्रो जितेन्द्र श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि प्रो लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’,प्रो जगत सिंह बिष्ट (पूर्व कुलपति सोवन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा) मुख्य अतिथि डॉ गजराज सिंह बिष्ट, महापौर,नगर निगम, हल्द्वानी एवं अध्यक्षता प्रो नवीन चन्द्र लोहनी,कुलपति, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने की। धन्यवाद डॉ राजेन्द्र कैड़ा और संचालन डॉ अनिल कार्की ने किया।’कुमाउंनी उपभाषाएं और हाशिए का संदर्भ’ सत्र की अध्यक्षता प्रो देव सिंह पोखरिया, वक्तव्य प्रो चन्द्रकला रावत,प्रो प्रभा पन्त,प्रो राजेन्द्र प्रसाद संचालन डॉ कुमार मंगलम ने किया।’गढवाली उपभाषाएं और हाशिए का संदर्भ’
सत्र की अध्यक्षता डॉ नन्द किशोर हटवाल, विशिष्ट अतिथि रमाकांत बेंजवाल, मुख्य अतिथि गणेश खुशगवार ‘गणि’, वक्तव्य मुकेश नौटियाल और संचालन डॉ पुष्पा बुढलाकोटी का रहा।’कुमाउंनी भाषा का सीमांत’ सत्र में राजी पर डॉ प्रयाग जोशी,थारु पर प्रो सिद्धेश्वर सिंह,रं पर श्रीमती आशा गार्खाल बोहरा, नेपाली पर डा दिनेश शर्मा,बुक्साड़ी डॉ जगदीश पन्त ‘कुमुद’ के वक्तव्य व संचालन डॉ अनिल कार्की ने किया। संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के कुमाउंनी पर केन्द्रित प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो उमा भट्ट, विशिष्ट अतिथि डॉ हयात सिंह रावत, मुख्य अतिथि डॉ प्रीति आर्य, वक्तव्य डॉ चन्द्रकांत तिवारी व संचालन डॉ उमेश ध्यानी का रहा।गढ़वाली पर केन्द्रित सत्र की अध्यक्षता प्रो देव सिंह पोखरिया, मुख्य अतिथि गणेश खुगशाल ‘गणि’, वक्तव्य दिनेश रावत तथा संचालन डॉ विवेक ममगाईं ने किया।इस सत्र में शोधार्थियों द्वारा शोध पत्रों का वाचन भी किया गया।समापन सत्र ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषिक संदर्भ’ का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन व कुलगीत गायन से हुआ। विशिष्ट वक्तव्य प्रो पी डी पंत,प्रो एच पी शुक्ला,प्रो जे के जोशी, विशिष्ट अतिथि डॉ मोहन सिंह बिष्ट, विधायक, लालकुआं, मुख्य अतिथि माननीय भाषा मंत्री सुबोध उनियाल, अध्यक्षता उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नवीन चन्द्र लोहनी, धन्यवाद कुल सचिव डॉ खेमराज भट्ट तथा संचालन डॉ कुमार मंगलम ने किया।इस अवसर पर लगे पुस्तक मेले में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,गार्गी ,भावना प्रकाशन,सेतु,काव्यांश प्रकाशन,समय साक्ष्य,विनसर आदि प्रकाशनों के स्टाल लगे थे। संगोष्ठी के दौरान अनेक रचनाधर्मियों, परिचितों और कुलपति प्रो नवीन चन्द्र लोहनी जी से इत्मीनान से मिलने व रवांल्टी भाषा पर बोलने का अच्छा अवसर मिला और अच्छी बात यह भी रही कि रवांल्टी को लेकर अनुज दिनेश रावत की उपस्थिति भी मेरे साथ बनी रही।
@लेखक वरिष्ठ साहित्यकार है







