By - dr. Arun Kuksal
दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960)
टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व-
‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...
‘जातीय जड़ता जाने का जश्न मनायें’।
उत्तराखण्ड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992)...
Dr. Pawan Kudwan
1967 ई. में संवैधानिक जनजातीय पहचान जौनसार-बावर को प्राप्त हुई, किंतु जनजातीय मूल स्वरूप भौगोलिक एवं सामाजिक आधार अतीत से रहा. रीति-रिवाज...
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “एडवांसिंग सस्टेनेबल इन्नोवेशंस एंड कम्युनिटी इंपैक्ट” कार्यशाला।
देहरादून के एक होटल सभागार में दिनाँक 30 व 31 मार्च 2026 को स्पेक्स,...
वन कानून, जन अधिकार और विधानसभा की जिम्मेदारी: एक संवैधानिक विश्लेषण
By - Prem Pancholi
ग्रीष्मकालीन विधानसभा गैरसैण में हुए बजट सत्र के दौरान विकासनगर के...
चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना
तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...