बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान
By – Vinod Arya
सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई ) की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
बलदेव सिंह आर्य ने अपना संपूर्ण जीवन हिमालयी समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों के सम्मान, अधिकार और आत्मगौरव के लिए समर्पित किया। उस दौर में जब शिल्पकार समुदाय सामाजिक भेदभाव, अस्पृश्यता और अपमानजनक परंपराओं से जूझ रहा था, तब बलदेव सिंह आर्य जी ने साहसपूर्वक परिवर्तन की मशाल उठाई। आपकी नजर में हर वो व्यक्ति शोषित, दलित तथा कमजोर था जिसके अधिकारों पर एक खास वर्ग कब्जा करके बैठा था ।
“डोम” जैसी अपमानजनक पहचान के स्थान पर “शिल्पकार” जैसी सम्मानजनक सामाजिक पहचान स्थापित कराने में उनका योगदान ऐतिहासिक है।
‘डोला पालकी आंदोलन’ के माध्यम से उन्होंने सामाजिक भेदभाव को खुली चुनौती दी और समान नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया। वे केवल समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी जननेता भी थे। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा, पंचायती राज, ग्रामीण विकास और अनुसूचित जातियों के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
बलदेव सिंह आर्य का जीवन संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक गाथा है। उत्तराखंड का अनुसूचित जाति समाज और पूरा प्रदेश उनके योगदान को सदैव कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद करेगा।
लेखक : शहरी विकास विभाग उत्तराखंड में सहायक निदेशक है।







