Saturday, September 12, 2026
Home lifestyle ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक सूक्ष्म परजीवी ततैया है जो हानिकारक कीड़ों के अंडों पर हमला करता है। यह लगभग 200 प्रकार के नुकसानदायक कीटों के अंडों को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसकी मादा कीटों के अंडों के अंदर अपने अंडे देती है, जिसके बाद ट्राइकोग्रामा के बच्चे उन्हीं अंडों को खाकर विकसित होते हैं और हानिकारक कीट पैदा होने से पहले ही खत्म हो जाते हैं। यही कारण है कि इसे अंड परजीवी भी कहा जाता है।

ट्राइकोग्रामा किसानों को कार्ड के रूप में उपलब्ध कराया जाता है जिसे ट्राइकोकार्ड कहा जाता है। एक कार्ड में लगभग 20 हजार परजीवी अंडे होते हैं। इसका उपयोग बेहद आसान है लेकिन सही विधि अपनाना जरूरी है।

जब खेत में हानिकारक कीटों के अंडे दिखाई देने लगें तभी इसका प्रयोग शुरू करना चाहिए। ट्राइकोकार्ड को कैंची से छोटे-छोटे बराबर टुकड़ों में काटकर खेत के अलग-अलग हिस्सों में लगाना चाहिए। सामान्यतः 10 कार्ड प्रति हेक्टेयर की दर से इसका प्रयोग किया जाता है। इसे शाम के समय खेत में लगाना अधिक लाभकारी माना जाता है क्योंकि उस समय तापमान कम रहता है और परजीवी बेहतर तरीके से सक्रिय हो पाते हैं।

अच्छे परिणाम के लिए 10 से 15 दिन के अंतराल पर 3 से 4 बार इसका प्रयोग करना चाहिए। किसानों को एक महत्वपूर्ण बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि ट्राइकोग्रामा लगाने से पहले और बाद में रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि रासायनिक दवाएं इन लाभकारी जीवों को भी मार सकती हैं। यदि किसान लगातार जहरीले कीटनाशकों का उपयोग करेंगे तो जैविक नियंत्रण प्रणाली कमजोर हो जाएगी।

आज कई किसान कम लागत और सुरक्षित खेती की दिशा में बढ़ रहे हैं। ट्राइकोग्रामा जैसी तकनीकें न केवल खर्च कम करती हैं बल्कि मिट्टी की सेहत, पर्यावरण और फसल की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं। आने वाले समय में जैविक और प्राकृतिक खेती का महत्व और बढ़ने वाला है, इसलिए किसानों को ऐसी तकनीकों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

ट्राइकोकार्ड कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और कुछ अधिकृत जैविक उत्पाद केंद्रों पर उपलब्ध रहते हैं। किसान अपने नजदीकी कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग से संपर्क करके इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 साभार : खेती किसानी

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