इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विवि की पूर्व कुलपति प्रो. सुधारानी पाण्डे उपस्थित रहीं। साहित्यकारत्रयी डाॅली डबराल, नीरज नैथानी और मुकेश नौटियाल तथा पुस्तक के रचयिता राम प्रकाश अग्रवाल द्वारा पुस्तक का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी डाॅ. वीके डोभाल द्वारा किया गया।
इससे पूर्व नौ साहित्यिक कृतियां तथा एक आत्मकथात्मक शोध ग्रन्थ ‘ए जियोलाॅजिस्ट डायरी’ राम प्रकाश अग्रवाल लिख चुके हैं। भारत विभाजन के भुक्तभोगी व गवाह रहे अग्रवाल का परिवार उस समय वर्तमान पाकिस्तान में व्यापार करता था। विभाजन के बाद विपरित परिस्थ्तियों में उनके परिवार को भारत लौटना पड़ा।
भारत विभाजन के उस समय की घटनाएं एवं स्मृतियां उनके उपन्यास ‘दरिया पार का शहर’ में दर्ज हैं। सद्य प्रकाशित संग्रह में अग्रवाल की मां और स्त्री विषयक कथाएं ही संकलित हैं।







