राज्य को पहली बार अपनी मुख्य सचिव मिली है।

मुख्य सचिव श्री संधू की सेवानिवृति के बाद वरिष्ठ आईएएस अफसर श्रीमती राधा रतूड़ी को उत्तराखंड का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। कह सकते हैं कि राज्य को पहली बार अपने राज्य की ही महिला अधिकारी मिली है।
लंबे समय से राज्य को ऐसे सीएस की आवश्यकता थी, जो इस पहाड़ी राज्य की भावनाओ के साथ जुड़ा हो। बता दें कि श्रीमती रतूड़ी उत्तराखंड की बहू है। उनके पति श्री रतूड़ी उत्तराखंड टिहरी के मूल निवासी है और उत्तराखंड पुलिस विभाग के महानिदेशक रह चुके है।
यह दीगर है कि पिछले 23 सालो में एक आध को छोड़कर जितने भी मुख्य सचिव बनाए गए उन्हे राज्य के विकास की चिंता बिल्कुल नहीं रही है। अब राज्यवासियो को उम्मीद जगी है कि श्रीमती रतूड़ी के मुख्य सचिव बनने पर राज्य के विकास की रफ्तार कुछ आगे बढ़ेगी।
उल्लेखनीय यह है कि श्रीमती रतूड़ी सिर्फ राज्य सरकार की मुख्य सचिव ही नही है, उनका इस राज्य के प्रति दोहरी जिम्मेदारियां है। इसलिए आम लोगो को लगता है कि जब वह हर किसी समारोह या रिश्ते नातो में सम्मिलित होती है तो उनके चेहरे पर और तो और उनसे मिलकर कभी भी ऐसा महसूस नहीं होता कि वह इतनी बड़ी अधिकारी है। वे सभी प्रोटोकॉल को अपने कार्यालय में छोड़ देती है और उत्तराखंडी महिला की तरह कभी गढ़वाली गीत गाती है तो कभी घर गांव के कामों में हाथ बढ़ाती है। उनकी सहजता, सरलता उनके कार्यों को भी निखारते है। यही वजह रही कि इससे पूर्व वे शासन में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रही है।
1988 बैच की आईएएस राधा रतूड़ी को उत्तराखंड की पहली महिला मुख्य सचिव बनने का गौरव भी मिला है।
राधा रतूड़ी इससे पूर्व अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह, सचिवालय प्रशासन का दायित्व देख रहीं थीं।
इधर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी देख रहे सुखबीर सिंह संधू का सेवा विस्तार 31 जनवरी को खत्म हो गया है। दिलचस्प यह है कि श्री संधू ने कभी भी राज्य के विकास की चिंता नहीं की है। इसलिए की वे जब तक मुख्य सचिव रहे तब तक वह अपनी कुर्सी को पकड़ कर रखे है। उन्होंने उत्तराखंड को समझने की कभी भी कोशिश नहीं की है।
उत्तराखंड को अब राज्य की अपनी और पहली महिला मुख्य सचिव मिल गई है। सरकार ने आईएएस राधा रतूड़ी को प्रदेश का नया मुख्य सचिव बनाया गया है।







