न्याय के देवता गोल्ज्यू पर बनने जा रही है फिल्म
कुमाऊं के अराध्य न्यायकारी देवता गोलज्यू के जीवन पर आधारित फिल्म बाला गोरिया फिल्म की शूटिंग कुमाऊं के विभिन्न स्थानों पर संपन्न हुई। हिमाद्रि प्रोडक्शंस के बैनर पर बन रही इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का मुहूर्त बागेश्वर जनपद के सुदूर शामा—लीती क्षेत्र में 21 मार्च, 2025 को किया था। लगभग 75 लोगों की यूनिट ने लगभग दो सप्ताह इसी क्षेत्र में शूटिंग की। इसके बाद एक सप्ताह बागेश्वर के गौरी उड्यार, दो दिन पिथौरागढ़ के तेजम और चकौड़ी में फिल्म की शूटिंग की गई। जनपद अलमोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ में भी फिल्मांकन किया गया। फिल्म के निर्माता मनोज चंदोला और निर्देशक&लेखक नितिन तिवारी ने बताया कि इस फिल्म की शूटिंग का विधिवत शुभारंभ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बागेश्वर जनपद के लीती गांव में की। बागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और नैनीताल में फिल्म की शूटिंग लगभग एक महीने तक चली।
उल्लेखनीय है कि हिमाद्री प्रोडक्शंस पिछले डेढ़ दशक से उत्तराखंड में फिल्म निर्माण में सक्रिय है। उत्तराखंड के लोक आख्यानों और लोक विधाओं को पहचान दिलाने के लिए हिमाद्रि प्रोडक्शंस ने 2014 में पहाड़ की चर्चित प्रेम कहानी राजुला&मालूशाही पर आधारित हिंदी फिल्म राजुला बनाई थी। यह उत्तराखंड की पहली फीचर फिल्म थी, जिसे देश के पीवीआर से रिलीज किया गया था।
फिल्म के निर्माता मनोज चंदोला ने बताया कि बाला गोरिया फिल्म को बनाने का उद्देश्य अपने लोक आख्यानों के महत्व और उनसे जुड़ी लोक थाती को दुनिया के सामने लाना है। देश—दुनिया में बन रही फिल्मों में भी मौजूदा समय में अपनी लोक विरासतों पर आधारित फिल्में बन रही हैं। दक्षिण में कंतारा और बाहुबली जैसी फिल्मों ने लोक विधाओं और लोक प्रचलित नायकों को दुनिया के सामने लाने का काम किया है। उत्तराखंड में पौराणिक से लेकर लोक आख्यानों तक में सैकड़ों कहानियां और उनके नायक हैं, जिन्होंने समाज में युगान्तकारी परिवर्तन किया है। कुमाऊं में सबसे मान्य लोक देवता बाला गोरिया का जीवन एक तरह से उत्तराखंड के लोगों कई संदर्भों से जुड़ा हुआ है। इसका एक ऐतिहासिक कालखंड है तो इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी है। बाद में लोक कल्याणकारी कामों से लोगों ने गोलज्यू को अपना न्यायकारी देवता बना दिया। गोलज्यू न केवल कुमाऊं के अराध्य हैं, बल्कि गढ़वाल में भी अलग&अलग नामों से उनकी पूजा होती है। अब तो उत्तराखंड से बाहर के लोग भी उनकी पूजा करते हैं। इसी लोक देवता के जीवन पर आधारित है बाला गोरिया।
श्री चंदोला ने बताया कि इस फिल्म यह उत्तराखंड की पहली ऐसी फीचर फिल्म है, जिसमें आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि इस फिल्म के माध्यम से उत्तराखंड के सिनेमा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह से स्थापित किया जा सके। इसे समझते हुए हिमाद्रि प्रोडक्शंस ने मुंबई, दिल्ली, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कलाकारों के चयन के लिए आडीशन कराये। इसमें मुंबई में स्थापित पहाड़ के कलाकारों के अलावा उत्तराखंड में विभिन्न रंगमंच संस्थाओं और उत्तराखंडी फिल्मों के जाने-पहचाने चेहरों को शामिल किया गया है। पहाड़ के प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए अल्मोड़ा, बागेश्वर और नैनीताल के नये-पुराने कलाकारों को मौका दिया गया है। यह फिल्म गोलज्यू पर कौस्तुब आनंद चंदोला के उपन्यास संन्यासी योद्धा पर आधारित है। श्री चंदोला ने बताया कि यह फिल्म का पहला भाग है, जिसमें गोलज्यू के बाल रूप को दिखाया गया है। इसके दूसरे भाग में उनके राजा बनने और न्यायाकारी देवता के रूपांतरण की कहानी होगी। उन्होंने कहा कि लोक देवताओं पर आधारित फिल्मों की सिरीज चलाने पर भी हिमाद्रि प्रोडक्शंस काम कर रही है। इन्हें सिरीज के रूप में ओटीटी प्लेटफार्म के लिए भी बनाया जा रहा है।
श्री चंदोला ने बताया कि हालांकि यह फिल्म दसवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच के कथानक की है] लेकिन इसमें पहाड़ी जनजीवन की उन चीजों को भी शामिल किया गया है जो बाद के पर्वतीय जन-जीवन को प्रतिबिंबित कर सके। चूंकि इसे बड़े परिप्रेक्ष्य में दिखाने की मंशा है] इसलिए कथानक, भाषा, परिवेश, परिधान आदि को उसी तरह समायोजित किया गया है। फिल्म की शूटिंग राज्य के दूरस्थ गांवों में कराने के पीछे इन गांवों को पर्यटन के नक्शे में लाना और पर्यटन से जोड़ना भी है। इस फिल्म की शूटिंग में लगभग 75 लोगों का दल शामिल रहा। श्री चंदोला ने बताया कि बाला गोरिया फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन में बहुत समय लगने वाला है। इस फिल्म को रिलीज होने में अभी सात-आठ महीने का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि गोलज्यू के जीवन पर आधारित इस फिल्म की घोषणा के समय से ही लोगों ने इसमें रुचि दिखाई। इसकी शूटिंग के समय भी लोगों में बड़ा उत्साह था। स्थानीय लोगों ने बहुत सहयोग किया। प्रशासन ने भी हर स्तर पर प्रोत्साहित किया। लोगों ने फिल्म के बारे में अपनी-अपनी तरह से सलाह दी। हमारे लिए एक तरह से यह फिल्म अपने ऐतिहासिक संदर्भो को जानने और भावी पीढ़ी में सांस्कृतिक थातियों को हस्तांतरित करने की पहल जैसा भी था। श्री चंदोला ने उम्मीद जताई है कि यह फिल्म सभी लोगों को पसंद आयेगी।







