Sunday, September 13, 2026
Home उत्तराखंड इतिहास के पन्नो से : कर्मभूमि के शिल्पी भैरव दत्त जी की...

इतिहास के पन्नो से : कर्मभूमि के शिल्पी भैरव दत्त जी की 125 वी जयंती

कर्मभूमि के शिल्पी भैरव दत्त जी की 125 वी जयंती

By – Dr. Yogesh Dhasmana

उत्तराखंड में वन और बेगार आंदोलन को राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बनाने वाले संग्रामी व्यक्तिव भैरव दत्त की आज 125 वीं जन्म जयंती है। कृतज्ञ जनता उन्हें भावपूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित करती है।

इनका जन्म गढ़वाल जनपद के ग्राम मदनपुर विकासखंड दुगड़डा में पिता हरिदत्त और माता सावित्री देवी के घर पर हुआ था। श्री धूलिया ने बनारस से बीएससी शिक्षा ग्रहण कर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया। राममनोहर लोहिया एवं कमलापति त्रिपाठी के भाई काशीपति जो तब वहां शिक्षक भी थे, के साथ राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया। इन्होंने दिल्ली में तिब्बति कॉलेज में छात्र और शिक्षक के रूप में भी काम किया।

राष्ट्रीय राजनीति में महात्मा गांधी के आगमन से पूर्व 1905 में मुकुंदीलाल बैरिस्टर, 1910 में गोविंद बल्लभ पंत और 1915 में सकल्लानंद डोभाल द्वारा कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने के बाद गढ़वाल में 1901, में गढ़वाल यूनियन 1908, में गढ़वाल सभा, 1902, में पहले समाचार पत्र दुगड़डा से गढ़वाल समाचार का उदय, पौड़ी से 1913 में विशाल कीर्ति, 1917 में डॉ पीताम्बर दत्त के द्वार पुरुषार्थ अखबारों के प्रकाशन से सामाजिक, सांस्कृतिक ओर धार्मिक स्थिरता टूटने लगी थी।

इस तरह महात्मा गांधी द्वारा बनारस इलाहाबाद के छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्हें स्कूल कॉलेजों का बहिष्कार कर अपने अपने घरों को लौट जाने के असहयोग आंदोलन के लिया जनता को संगठित करने के लिए कहा गया। दरअसल तत्काल मदन मोहन मालवीय सहित भैरवदत्त असहयोग आंदोलन के मुद्दों पर गांधी जी से सहमत नहीं थे। इसी बीच इंग्लैंड से मुकुंदीलाल लौटे।

इधर श्री धूलिया पंडित नेहरू की सलाह पर लैंसडौन में 1918 से वकालत प्रारंभ कर चुके थे। गोविंद बल्लभपंत सहित भैरवदत्त धूलिया मुकुंदीलाल उत्तराखंड में असहयोग आंदोलन को बेगार तथा वन समस्याओं के निराकरण पर केंद्रित करना चाहते थे। आखिरकार गांधी जी इनकी बात पर सहमत हो गए। इस तरह देश में उत्तराखंड एकमात्र ऐसा अंचल था जहां आंदोलन क्षेत्रीय मुद्दों पर लड़ा गया। इस तरह राष्ट्रवादी विचार के तहत इस आंदोलन में अनसूया प्रसाद बहुगुणा, मंगत राम खंतवाल, केशर सिंह रावत, जीवानंद बडोला, ईश्वरीदत्त ध्यानी जैसे संगठन कर्ताओं के प्रयास से आंदोलन बहुत सफल रहा। 1923 में संयुक्त प्रांत की सरकार ने कानून पास कर बेगार कुप्रथा का अंत किया। वही वनों पर जनता के हक हकूक बहाल कर गोविंद बल्लभ पंत ओर मुकुंदीलाल बैरिस्टर के नेतृत्व में फॉरेस्ट ग्रेवेंस कमेटी का गठन कर नए वन कानून बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिली।

इस घटना से कांग्रेस संगठन को नया जीवन मिला। इस तरह 800 कांग्रेसी चवन्नी सदस्यो से राजनयिक आंदोलनों का मार्ग भी प्रखरता से आगे बढ़ा।

गढ़वाल में गांधी का सविनय अवज्ञा आंदोलन की एक और विशिष्टता यह थी कि अब प्रताप सिंह नेगी, भक्त दर्शन, कप्तान रामप्रसाद नौटियाल, कृपाराम मिश्र, हरिराम चंचल, गोकुल सिंह नेगी, डबल सिंह, योगेश्वर प्रसाद धूलिया, जगमोहन सिंह नेगी, छ्वान सिंह नेगी, कोतवाल सिंह नेगी आदि के रूप में नया नेतृत्व विकसित हुआ।

राष्ट्रीय स्तर पर इन नेताओं ने पहली बार सामाजिक समरसता और राजनीतिक आंदोलन की मजबूती के लिए शिल्पकारों की समस्याओं को काग्रेस के मंच पर उठाकर जन आधार को विकसित कर संगठन में सदस्यों की संख्या को 40 हजार तक विकसित कर दिया था।
भैरव दत्त इस आंदोलन में गढ़वाल से दूर तिब्बतियों के कॉलेज में रहकर लोहिया, पुरुषोत्तमदास टंडन और मदन मोहन मालवीय, अरुणा आशिफ अली नेताओं के संपर्क में थे। यहीं से वे देश में आंदोलन के लिए आधार पाठिका युवाओं के बीच में जा जाकर तैयार करते रहे।

इसके बाद भैरवदत्त की मुलाकात 1936 में पंडित जवाहर लाल नेहरू की प्रथम गढ़वाल यात्रा दुगड़ा में राजनीतिक सम्मेलन के रूप में हुई। 1938 में नेहरू दूसरी गढ़वाल यात्रा में 5 दिन गढ़वाल में रहे। 8 मई को श्रीनगर में भैरवदत्त ने गढ़वाल काग्रेस कमेटी की ओर से सम्मेलन में गढ़वाल में गाड़ी, सड़क और लगान पर 33 प्रतिशत बड़ी लगान धनराशि को प्रदेश की प्रथम काग्रेस सरकार से वापस लेने के साथ साथ सड़क निर्माण के लिए 2 लाख रुपए स्वीकृत करने के लिए नेहरु से पहल करने को कहा। किन्तु प्रदेश की पंत सरकार ने आर्थिक खस्ता हालत का जिक्र करते हुए गढ़वाल कांग्रेस की मांग को अस्वीकार कर दिया। इस तरह सड़क निर्माण के लिए मात्र 20 हजार रुपए स्वीकृत कर गढ़वाल में भूचाल ला खड़ा किया।

गढ़वाल में 1930 में मुकुंदीलाल द्वारा कांग्रेस छोड़ने की घटना के बाद यह दूसरी बड़ी घटना थी जब अधिकांश कॉग्रेसी नेताओं में कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया गया। इस पर पंडित नेहरू ने भैरव दत्त धूलिया से मध्यस्थता करने को कहा। भैरव दत्त ने नेहरू को अवगत कराया कि प्रदेश की गोविंद बल्लभ सरकार ने गढ़वाल में सड़क निर्माण के लिए 20 हजार रुपए और कुमाऊं के लिए 1लाख रुपए बजट में स्वीकृत करके अन्याय किया है। उससे गढ़वाल कांग्रेस में रोष है।

अंततः जहावर लाल नेहरू के हस्तक्षेप से पंत सरकार ने कुमाऊं के समान ही 1 लाख रुपए की धनराशि सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत की और कांग्रेस को टूटने से बचाया गया।

इस तरह कह सकते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध चढ़ने और 1939 में पंत सरकार के त्यागपत्र देने के कारण दुगड़ा पौड़ी कर्णप्रयाग मोटर मार्ग का निर्माण 1946 में भारत छोड़ो आंदोलन की समाप्ति के बाद ही हो सका।

भैरवदत्त एक बार फिर गढ़वाल की राजनीति में सक्रिय हो गए थे। विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद उन्होंने काग्रेस को एकजुट कर 13 फरवरी 1939 को लैंसडौन से कर्मभूमि साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन शुरू किया। सहकारिता के आधार पर हिमालयन ट्रेडिंग कंपनी के सहयोग से इस पत्र का उद्घाटन करने स्वयं गोविंद बल्लभ पंत कोटद्वार पहुंचे थे। भक्त दर्शन ललिता प्रसाद नैथानी श्रीदेव सुमन संपादक मंडल के सदस्य बनाए गए। इस तरह यह पत्र ब्रिटिश गढ़वाल और रियासत टिहरी गढ़वाल के जनसंघर्ष में जनता का मुख पत्र बन गया था।

भारत छोड़ो आंदोलन में भैरव दत्त पुनः दिल्ली में गढ़वाल के आंदोलन के लिए धन एवं प्रचार साहित्य जुटाने में लग गए। जबकि गढ़वाल कांग्रेस के भूमिगत नेताओं का ठिकाना भी भैरव दत्त का घर ही होता था।

दिल्ली में अपने तिब्बतियन कॉलेज में प्रवासी गढ़वाली छात्रों के राजनयिक कक्षाएं धूलिया लेते, पर अधिकांश नेताओं के प्रेस बंद होने से आंदोलन का साहित्य प्रकाशित नहीं हो पा रहा था। इस स्थिति से निबटने के लिए उन्होंने दिल्ली क्लॉथ मिल के अपने मित्र एम एम शाह, जो केमिस्ट पद पर थे, उनकी सहायता से साइक्लोस्टायल मशीन प्रात कर आंदोलन से संबंधित साहित्य का प्रकाशन किया।

सरकार की नजरों से बचाने के लिए उन्होंने इस गुटका कार पुस्तिका पर बाहर से हनुमान चालीसा लिख कर डाक से गढ़वाल कांग्रेस को भेजना शुरु किया ।इसके साथ ही गुजरात और बम्बई, लखनऊ से प्रात प्रतिबंधित साहित्य भी गुप चुप तरीके से गढ़वाल भेजा जाता था।

आंग्ल सरकारकार को जब इसकी भनक लगी तो दिल्ली आवास पर छापा मारकर छवन सिंह, थानसिंह, योगेश्वर धूलिया और नत्थी प्रसाद बडोला को गिरफ्तार कर लिया गया। 11 नवंबर 1942 को भैरव दत्त को कोटद्वार लाया गया, यहां उनके घर से पुलिस ने प्रतिबंधित और देश द्रोह भड़काने से संबंधित साहित्य को जफ्त कर उन्हें हवालात भेज दिया। उन्हें लैंसडाउन की अदालत में पेश किया गया। श्री धूलिया को जज द्वारा आंदोलनकारियों को संरक्षण देने और देश द्रोह की धाराओं में 7वर्ष की सजा सुनाई। अन्य को 3से 04 वर्ष की सजा देकर जेल भेज दिया गया।

देश की आजादी के बाद कर्मभूमि ने अपनी ताकत टिहरी के जन संघर्ष में झोंक दी थी। श्रीदेव सुमन भी अनेक वर्षों तक कर्मभूमि के संपादक मंडल के सदस्य रहे। स्वयं भैरव दत्त अपने साथियों सहित टिहरी रियासत के भारत में विलय तक सक्रिय रहे।

आजादी के बाद व गढ़वाल कमिश्नरी के निर्माण तथा गढ़वाल विश्वविद्यालय के निर्माण तक अपने को आंदोलन में सक्रिय रखा।

भैरव दत्त के पौत्रों हिमांशु , सुधांशु ओर तिग्मांशु एवं उनकी माताजी सुमित्रा द्वारा कर्मभूमि के माध्यम से भैरव दत्त को याद कर जो पत्रकारिता पुरस्कार देने की शुरुवात की है वह पितरों को किसी तर्पण देने से कम नहीं है। इस अवसर पर केशव धूलिया, जो गढ़वाल से उच्च न्यायालय में पहले न्यायाधीश थे, को श्रद्धा सुमन अर्पित करते है। इनके सुयोग्य पुत्रों द्वारा इस तरह के आयोजन करने की योजना से पहाड़ की युवा पीढ़ी को संस्कारित करने का एक युगांतरकारी प्रयास किया गया है।

कर्मभूमि ट्रस्ट द्वारा इस वर्ष का पत्रकारिता पुरस्कार के लिए संघर्षशील 77 वर्षीय पत्रकार रमेश पहाड़ी को दिया जाना बहुत सार्थक और सामयिक निर्णय है।

RELATED ARTICLES

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...