Sunday, June 28, 2026
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अजब का एप्पल मिशन, गजब की स्वरोजगार नीति।

अजब का एप्पल मिशन, गजब की स्वरोजगार नीति।

– सब्सिडी के नाम पर 545 सेब किसानों से वसूल लिए 6.50 करोड़।

– किसानों की नहीं, सरकार की आय हो गयी दोगुनी।

By – Gunanand Jakhmola

जय जवान-जय किसान का नारा देने वाले पूर्व पीएम शास्त्री जी यदि आज जीवित होते तो अपना सिर पीट लेते। उत्तराखंड में एप्पल मिशन के तहत जवान और किसान दोनों के साथ ही अजीब सा धोखा हो गया। मिशन ने सेब उत्पादकों को सेब का बगीचा लगाने के लिए कुल खर्च का 80 प्रतिशत सब्सिड़ी देने की नीति बनाई थी। इसके तहत बाग लगाने के लिए सेब उत्पादक को 20 प्रतिशत का अंशदान देना था। सरकार ने किसानों से यह 20 प्रतिशत अंशदान तो ले लिया, लेकिन चार-पांच साल बाद भी किसानो को सब्सिडी नहीं दी। यानी सरकार ने अपना हिस्सा तो दिया नहीं, किसानों की रकम और डकार ली। लगभग 42 करोड़ का मामला है। कहां तो सरकार का 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य था, लेकिन सेब किसानों से लिए अंशदान से खुद सरकार की आय दोगुनी हो गयी।

 

आसान भाषा में समझिए कि किसानों के साथ क्या खेल हुआ? पोस्ट में दो सेब उत्पादक हैं, नैनबाग इलाके के मुकेश कैंतुरा और संदीप सिंह। मुकेश 7 गढ़वाल से रिटायर्ड हुए और मिशन एप्पल के झांसे में फंस गये। मुकेश ने एप्पल मिशन के तहत 2020 में अपनी आधा एकड़ जमीन पर सेब के 500 पौधे लगाए। उसने अपनी जमीन पर कश्मीर से सेब के पौधे खरीदे और बगीचा बनाकर उसमें घेरबाढ़ कर दी। देख-रेख, खाद आदि पर भी खुद खर्च किया। तब स्कीम के तहत उसने एप्पल मिशन को 50 हजार का अंशदान दिया। इसके बाद उसने 500 पौधे और आधा एकड़ जमीन पर लगा दिये। इस बार उसे 20 प्रतिशत अंशदान के तौर पर मिशन ने उससे 1 लाख 20 हजार वसूल लिये। सब्सिड़ी के तौर पर उसे आधे एकड़ के 4 लाख 80 हजार मिलने थे। पिछले चार साल से वह चक्कर काट रहा है लेकिन सब्सिड़ी की चवन्नी नहीं मिली, उल्टे 1 लाख 70 हजार रुपये सरकार को अंशदान दे दिया। यह रकम उसने पेंशन की मद में से खर्च की थी।

इसी तरह से संदीप सिंह ने भी आधे एकड़ में बाग लगाया और 1 लाख 20 हजार गंवा दिये। इसी तरह से अन्य 543 किसान भी मिशन की उपेक्षा के शिकार हो गये। उन्हें आज तक पैसा नहीं मिला। इस मुद्दे पर ये सेब उत्पादक 27 अक्टूबर को कृषि मंत्री गणेश जोशी का घिराव करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि मेहनत के पैसे दो और सब्सिडी की रकम भी। सेब उत्पादकों के मुताबिक पिछले दो साल से सरकार उनको आश्वासन पर आश्वासन दे रही है लेकिन न ही अंशदान वापस मिला और न ही सब्सिडी। किसानों की यह कुल रकम 42 करोड़ है।

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