Friday, March 6, 2026
Home lifestyle भीड़, बेचैनी और भविष्य की तलाश: देहरादून से कांग्रेस का आत्ममंथन।

भीड़, बेचैनी और भविष्य की तलाश: देहरादून से कांग्रेस का आत्ममंथन।

भीड़, बेचैनी और भविष्य की तलाश: देहरादून से कांग्रेस का आत्ममंथन।

By – Sheeshpal Gusai

पर्वतों की गोद में बसी देहरादून घाटी ने 16 फरवरी को एक परिचित दृश्य देखा—लाल, हरे और सफ़ेद झंडों से भरा परेड ग्राउंड; नारों की गूंज; और लंबे अरसे बाद सड़क पर उतरी वह भीड़, जिसे भारतीय राजनीति में “विपक्ष की सांस” कहा जाता है। चकराता के वरिष्ठ विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह द्वारा एक माह पहले घोषित राजभवन घेराव का यह दिन केवल एक कार्यक्रम नहीं था—यह कांग्रेस के भीतर सुलग रही बेचैनी का सार्वजनिक प्रकटन था।

भीड़ आई—दूर-दराज़ के गांवों से, पहाड़ की पगडंडियों से, और कस्बों की तंग गलियों से। राजभवन से एक किलोमीटर पहले पुलिस की बैरिकेडिंग ने मार्च को रोक दिया। परेड ग्राउंड से लगभग एक तिहाई लोग आगे नहीं बढ़ पाए—कुछ बुजुर्ग थे, कुछ थकान के मारे लौट गए। फिर भी, 2022 के चुनावी उबाल को छोड़ दें तो लगभग एक दशक बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के चेहरे पर वैसा ही जोश और वैसा ही आक्रोश दिखा। यह आक्रोश सत्ता के विरुद्ध था, पर उससे अधिक अपने भीतर की असफलताओं के विरुद्ध भी।

उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस आज एक असहज यथार्थ से जूझ रही है—विधानसभा में सत्ता से बेदखली, लोकसभा में राज्य से शून्य उपस्थिति और पंचायतों में कमजोर पकड़। 2022 में भाजपा से लगभग छह प्रतिशत वोटों के अंतर से हार—यह पराजय मात्र संख्यात्मक नहीं थी; यह संगठनात्मक शिथिलता का परिणाम थी। हरीश रावत के नेतृत्व में लड़ा गया चुनाव भीतरखाने की गुटबाजी के बोझ तले दबा रहा। राजनीति में हार केवल विरोधी की ताकत से नहीं होती—अक्सर वह अपनी ही बिखरी हुई इच्छाशक्ति का दंड होती है।

यदि 2017 से 2022 के बीच कांग्रेस ने गांव-गांव, वार्ड-वार्ड संगठन के ताने-बाने बुने होते, तो शायद 2022 की सुबह कुछ और होती। पर संगठन का काम धैर्य मांगता है—वह चुनावी हवा के भरोसे नहीं चलता। यही वह बिंदु है जहाँ कांग्रेस बार-बार चूकती रही है। आज 2026 की ओर बढ़ते हुए भी भाजपा के मुक़ाबले कांग्रेस का बूथ-स्तरीय ढांचा कमजोर है। राजनीति का गणित बताता है कि भीड़ से तस्वीर बनती है, पर जीत संगठन से आती है।

रैली के बीच कार्यकर्ताओं से हुई बातचीत में एक साझा पीड़ा उभरकर आई—ऊपर के स्तर की गुटबाजी। गांव से आए साधारण कार्यकर्ता इस बात से थके हुए हैं कि नेतृत्व की आपसी खींचतान का खामियाज़ा अंततः उन्हें भुगतना पड़ता है। उनकी मांग बहुत बड़ी नहीं है—उन्हें दिशा चाहिए, निरंतरता चाहिए, और यह भरोसा चाहिए कि उनकी मेहनत व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की भेंट नहीं चढ़ेगी।

हरीश रावत का राजनीतिक जीवन उत्तराखंड के इतिहास का एक अध्याय है—करीब पाँच दशक पहले सांसद बनने वाले नेता ने कभी मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर चेहरे को प्रदेश से बाहर का रास्ता दिखाया था। समय ने भूमिका बदली है। आज आवश्यकता शायद उस अनुभव की है जो मार्गदर्शन बने—संरक्षण बने। राजनीति में परिपक्वता यही है कि नेता स्वयं को संस्था के हित में ढाल ले। इसी तरह गोदियाल, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य जैसे नेताओं के बीच “मैं मुख्यमंत्री” की अदृश्य होड़ यदि थमी नहीं, तो संगठन की जड़ें और कमजोर होंगी।

देहरादून की यह भीड़ एक संकेत है—कांग्रेस के भीतर जीवन शेष है। पर जीवन तभी गति बनता है जब वह अनुशासन और संगठन से जुड़ता है। रैली के बाद हजारों कार्यकर्ता अपने-अपने गांव लौट गए हैं। असली प्रश्न यह नहीं कि परेड ग्राउंड कितना भरा था; असली प्रश्न यह है कि क्या अब हर गांव में एक बैठक होगी, हर वार्ड में एक समिति बनेगी, हर बूथ पर “अपना आदमी” खड़ा होगा? यदि यह हुआ, तो यह रैली इतिहास में एक मोड़ के रूप में दर्ज होगी। यदि नहीं, तो यह भीड़ भी स्मृतियों की धुंध में खो जाएगी—और विपक्ष की बेचैनी अगले किसी परेड ग्राउंड का इंतज़ार करती रहेगी।

राजनीति अंततः प्रतीकों से नहीं, प्रक्रियाओं से बनती है। देहरादून का परेड ग्राउंड प्रतीक था—अब कांग्रेस के सामने प्रक्रिया गढ़ने की चुनौती है।

RELATED ARTICLES

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...