खीर गंगा में आई बाढ़ ने मात्र 40 सेकेंड में गंगोत्री से 18 किमी पहले धराली गांव को नेस्तनाबूद कर दिया। प्रकृति का इतना रौद्ररूप था कि लोग जब तक सुध पाते तब तक देखते ही देखते सब कुछ समाप्त हो गया।
बता दें कि 5 अगस्त की दोपहर लगभग 01 बजे जब खीर गंगा ने अपना रौद्ररूप दिखाया तो सामने के मुखवा गांव से देख रहे लोग बस आवाज दे पाए और सीटियां ही बजा सके, इतने में धराली गांव व बाजार देखते ही देखते मलवे में तब्दील हो गया।
उल्लेखनीय हो कि 1978 में भी 5 अगस्त को ही कनोडिया गाड़ में भयंकर बाढ़ आई थी। जिसने गंगा को डबरानी के पास 18 घंटे तक रोककर रखा। उन दिनों उत्तरकाशी में भारी तबाही हुई थी। ठीक इसी दिन 5 अगस्त 2025 को खीर गंगा में बादल फटा और 40 सेकेंड में धराली गांव को नेस्तनाबूद कर दिया। वैसे भी उत्तरकाशी को कई बार आपदाओं ने गहरे गहरे जख्म दिए है। 1978 की बाढ़, 1991 का भूकंप, 2010 और 2013 की बाढ़ तथा अब धराली की आपदा ने एक बार फिर उत्तरकाशी के आपदा के जख्म को प्रकृति ने कुरेदा है। दअरसल इस डरावने और खतरनाक स्थिति से उत्तरकाशी के लोग बार बार सामना करते है।
एक जानकारी के मुताबिक पिछले पांच अगस्त को धराली गांव में एक मेले का भी आयोजन था। ठीक एक बजे जैसे मेला अपने चरम पर सजने लगा, बस उसी वक्त खीर गंगा में इतना पानी आ गया कि 40 सेकेंड में सबकुछ समाप्त हो गया। यदि लोगों के हताहत की बात करें तो यह आंकड़ा अभी सही नहीं होगा। वैसे भी धराली गांव की जनसंख्या 1000 से ऊपर बताई जाती है। गांव में मेला था तो इस दिन स्वाभाविक है कि लोगो की संख्या अधिक होगी। जबकि इधर धराली बाजार में गंगोत्री धाम आने जाने वाले यात्री भी रुके होंगे। इस तरह धराली आपदा में हताहत हुए लोगों की संख्या को बताना कठिन है। जो हुआ वह वीडियो मुखवा गांव की तरफ से लोगो ने बनाई है। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी जन धन की हानी हुए होगी। फिलहाल सेना, NDRF, SDRF, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सरकार आपदा राहत मे युद्धस्तर पर जुटी है।







