यमुना घाटी में कोई नया प्रचलन आरंभ हो तो कोई गांव कैसे अछूता रहा जाए। इस क्रम में कफनौल (उत्तरकाशी) गांव में ध्याणी मिलन कार्यक्रम का बेहद खूबसूरत आयोजन 18 एवं 19 जुलाई को हुआ है।
गांव की ध्याणी यानी गांव से ब्याही गई बहनों ने एक बार अपने गांव (मायके) में मिलने का यह कार्यक्रम आयोजित किया है।
कफनौल गांव में यह कार्यक्रम अपने आप में खास रहा। जहां 80 वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक की ध्याणीयो का यह अदभुत संगम देखने को मिला। इस दौरान आयोजन में क्षेत्र के आराध्य देवता क्रमशः बौखनाग देवता, रुद्रेश्वर देवता और ध्येश्वर देवता गांव में एक साथ दो दिन तक विराजमान रहे। यह क्षण भी शायद इस सदी का पहला और अंतिम कहा जा सकता है। ध्याणीयो ने छोटी छोटी पूंजी एकत्र करके क्रमशः तीनों देवताओं को सोने का छत्र भी भेंट किया है। जबकि गांव के अपने अन्य कुल देवताओं पांडव, दुल्ला देवता सहित सभी को सोने, चांदी की छत्र, कलश, ताबीज आदि भेंट दी गई है। इधर बौखनाग देवता के ढोल के लिए चांदी का कलश भी भेंट किया गया है। देवताओं के आगमन के दिन और अगली सुबह तक रातभर जागरण का आयोजन किया गया। भोर होते ही गांव के पंचायती आंगन में ध्याणीयां एवं बाहर से आए मेहमान एकत्र होने लग गए। यह दृश्य भी किसी द्विवा स्वप्न से कम नहीं था। अगले दिन दोपहर तक गांव के युवक मंगल दल द्वारा सभी ध्याणीयों को स्मृति चिन्ह आदि सम्मान से सम्मानित किया गया। दोपहर के बाद तीनों देवताओं की पूजा में जब सभी लोग सम्मिलित हुए तो यह दृश्य सच में मनोरम ही था।
प्रकृति के बीच बसे गांव कफनौल की ध्याणीयों की ड्रेस भी इस मनोरम दृश्य में चार चांद लगा रही थी।
गांव के पंचायत आंगन में श्रीमती भारती पंवार अग्रवाल और श्रीमती अंबिका चौहान के नेतृत्व में एकत्र हुई लगभग एक हजार ध्याणीयों का यह मिलन समारोह अद्भुत ही कहा जाएगा।
इस अवसर पर गांव के विशिष्ट नागरिक और निदेशक समाज कल्याण जगमोहन सिंह कफोला ने मौजूद जनता को संबोधित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हर किसी को अपने जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो आप गांव समाज से सीखते है वह आपके जीवन के हर क्षण काम आता है।
गांव की ध्याण और जिला प्रोवेशन अधिकारी देहरादून श्रीमती मीना बिष्ट पंवार ने कहा कि उनके लिए भी यह कार्यक्रम प्रेरणा देने वाला है। कहा कि वे अब हर साल इस कार्यक्रम में अवश्य सम्मिलित होगी। उन्होंने अपेक्षा की है कि वे सभी गांव की ध्याणीयां हर साल ऐसे कुछ न कुछ कार्यक्रम गांव में करेगी, ताकि कम से कम एक साल में सभी ध्याणीया आपसे में मिल सके।
गांव की ध्याण व खंड विकास अधिकारी सुधा तोमर कफोला ने भी ध्याणीयों को संबोधित किया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उन सभी को एक सूत्र में बांधने वाला है। सालभर तक सभी बहने अपने ससुराल, अपने काम से हर समय व्यस्त रहती ही है। इसलिए सालभर में ऐसा एक दिन होना ही चाहिए जिस दिन गांव की सभी ध्याण आपस में मिल सके।
कुलमिलाकर कफनौल गांव के ध्याणी मिलन कार्यक्रम में जहां एक हजार (1000) से भी अधिक ध्याणीया एकत्र हुई है, वही लगभग 10 हजार लोग इस कार्यक्रम के भंडारे में सामूहिक रूप से हुए भोजन में सम्मिलित हुए है।
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