प्राथमिक शिक्षक भर्ती में आरक्षण प्रावधानों की अनदेखी का आरोप, मेरिटोरियस SC/ST अभ्यर्थियों के साथ अन्याय।
By – Prem Pancholi
जनपद उत्तरकाशी में हाल ही में सम्पन्न प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इधर सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आकाशदीप ने मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया में संवैधानिक आरक्षण प्रावधानों एवं न्यायालय द्वारा स्थापित सिद्धांतों का पालन न किए जाने का आरोप लगाया गया है। अधिवक्ता आकाशदीप का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी, उत्तरकाशी अमित कोटियाल द्वारा तैयार की गई मेरिट सूची में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST) के मेधावी अभ्यर्थियों को सामान्य मेरिट सूची से बाहर रखकर उन्हें बैकलॉग रिक्तियों में समायोजित किया गया है जो संविधान सम्मत नहीं है। जबकि अन्य शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4), 16(1) एवं 16(4) का उल्लंघन है, बल्कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए स्पष्ट निर्देशों के भी विपरीत भी है।
उल्लेखनीय हो कि संविधान समानता के अधिकार की गारंटी देता है और यह स्पष्ट करता है कि यदि कोई SC/ST अभ्यार्थी खुले वर्ग (General Category) की मेरिट के आधार पर चयनित होता है, तो उसे आरक्षित कोटे में नहीं बल्कि सामान्य श्रेणी में चयनित माना जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट सिद्धांत, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992), R.K. Sabharwal बनाम पंजाब राज्य (1995), Union of India बनाम Virpal Singh Chauhan (1995) तथा Jarnail Singh बनाम Lachhmi Narain Gupta (2018) जैसे मामलों में स्पष्ट रूप से यह सिद्धांत स्थापित किया है।
संवैधानिक चयन प्रक्रिया इस तरह :
– मेरिट के आधार पर चयनित SC/ST अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी की सीटों पर समायोजित किया जाएगा
– ऐसे अभ्यर्थियों को आरक्षण या बैकलॉग कोटे में गिनना असंवैधानिक है.
– मेरिट सूची तैयार करते समय जाति नहीं, अंक ही चयन का आधार होंगे
गौरतलब हो कि न्यायालय ने यह भी कहा है कि मेरिटोरियस SC/ST अभ्यर्थियों को बैकलॉग में डालना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है और इससे सामाजिक न्याय की मूल भावना को ठेस पहुँचती है।
पत्र में शिकायत में कि मेरिट सूची तैयार करते समय जानबूझकर सामान्य चयन सूची में SC/ST अभ्यर्थियों के नाम शामिल नहीं किए गए, जिससे उन्हें उनके वैधानिक अधिकार से वंचित होना पड़ा। इससे न केवल संबंधित अभ्यर्थियों का नुकसान हुआ, बल्कि सामान्य श्रेणी की सीटों पर कम अंक प्राप्त अभ्यर्थियों को लाभ मिला है।
मुख्य सचिव उत्तराखंड को प्रेषित पत्र में इस नियुक्ति पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की गई है। मांग की गई कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच हो। मेरिट सूची को पुनः संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार संशोधित किया जाए। यही पत्र में यह स्पष्ट लिखा है कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध उत्तरदायित्व तय किया जाए।
बता दें कि यह मामला केवल एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक समानता, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर खबर लिखने तक जिला शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी ने फोन प्राप्त नहीं किया है।








