कालनेमि पार्ट : 15 से साभार लिया गया है यह आलेख। मामला एक -”ब्रांड एंबेसडर” का है।
By – Sunil Navprabhat
गाड़ी पर बोर्ड लगाने का अपना एक अलग ही ग्लैमर है, भाई साहब ! जैसे ही बोर्ड चिपका, वैसे ही आदमी साधारण से असाधारण हो गया । अब भले ही नौकरी न हो, पद न हो, पर बोर्ड हो… तो आदर-सत्कार में कोई कसर नहीं।
अब हाल ही में सुर-साधक, सुरीले मंगलेश डंगवाल जी को ही देख लीजिए। कार पर बोर्ड क्या ठोंका — ‘ब्रांड एंबेसडर, वन विभाग’, कि पूरा ट्रैफिक उन्हें रामगंगा समझ कर रास्ता देने लगा । उनकी गाड़ी देखी तो मुझे वही लोग याद आ गए, जो ‘फर्जी राज्य मंत्री’, ‘पूर्व जिलाध्यक्ष ’ पूर्व राज्यमंत्री (दायित्व वाला असली का नहीं ) जैसे बोर्ड लगाकर ऐसे ऐंठते हैं जैसे संसद भवन से सीधे उनकी गाड़ी देवभूमि में उतरी हो।
और इन बोर्ड वालों की एक और अदा होती है — ‘पूर्व’ को इतना छोटा लिखते हैं कि माइक्रोस्कोप लगे पढ़ने को, और ‘जिलाध्यक्ष’ ऐसा बड़ा-बोल्ड में छपवाते हैं कि देखने वाला आंख मले कि अब तक क्यों नहीं पहचाना! और अगर हूटर जोड़ लिया, फिर तो आम जनता जब रास्ता देती है और अंदर से कोई फर्जी निकले, तो यकीन मानिए — जूता तो छूट जाता है, पर मन नहीं छूटता कि एक ‘स्मृति-चिन्ह’ पीछे से और फेंका जाए।
मंगलेश जी ने वन विभाग के लिए क्या किया होगा, ये तो वही जानें । पर उनसे प्रेरणा लेकर मैने सोचा -अपनी कार के आगे पीछे भी PRESS के साथ-साथ दो-तीन बड़े-बड़े बोर्ड लगा दूँ । पत्रकार हूं, जंगलों पर कितनी स्टोरी की हैं, सरकारी नीतियों का मुफ्त प्रचार किया है। सोचा दो-तीन बोर्ड बनवाता हूं — “ब्रांड एंबेसडर, वन विभाग -अनुभवी पत्रकार संस्करण ”
सोचा एक बार वन विभाग से भी पूछ ही लूं। बाद में कहीं मंगलेश जी की तरह मेरा भी बोर्ड ना उतरवा दें !
फॉरेस्ट चीफ समीर सिन्हा जी को फोन लगाया —
मैं बोला: “सर, बोर्ड आप छपवा देंगे या मैं खुद छपवा लूं?”
वो बोले: “काहे का बोर्ड?”
मैं बोला: “ब्रांड एंबेसडर वाला… जैसा मंगलेश जी ने लगाया है।”
समीर सिन्हा साहब ने कहा-अरे नहीं भाई!
बोले: “नहीं-नहीं, हमने कोई ब्रांड एंबेसडर नहीं बनाया। नोटिस भेजा जा रहा है उन्हें।”
फिर उन्होंने पूरी “बोर्ड पुराण कथा” सुनाई।
कथानुसार साल -2023 में टिहरी में भागीरथी स्पोर्ट्स मीट आयोजित की गई थी वन विभाग की ओर से । समारोह में मंगलेश जी ने ऐसी स्वर लहरियां बिखेरी-कि मंतमुग्ध एक श्रोता या वक्ता ने जोश में आकर बोल दिया कि-आप तो वन विभाग के ब्रांड एंबेसडर हो । अब मंच से निकली बात, सीधा बोर्ड पर चढ़ गई — और बोर्ड, सीधा कार पर चिपक गया।
पिछले दिनों ऋषिकेश में एक कार्यक्रम में पहुंचे ब्रांड एंबेसडर साहब की किसी ने ऐसी फोटो खींची कि कालनेमि की 15 वी सीरिज तैयार हो गई । वायरल ऐसे हुई जैसे ये घोषणा खुद सरकार ने की हो।
बीजेपी के – ”सबका साथ-सबका विकास” नारे की तरह “सर्वव्यापी-सर्वस्पर्शी “ हो गया कालनेमि ।
अब हाल ये है कि “ब्रांड एंबेसडर” का तमगा किसी पद नहीं, बल्कि जुबानी जुमले से मिल रहा है। जैसे पहले लोग शादी में “तू तो राजा लग रहा है” कह देते थे — अब वही राजा लोग गाड़ी पर तख्ती ठोक कर निकल लेते हैं।
तो आप भी तैयार रहिए, अगली बार कोई आपको कह दे कि आप तो देश के लिए प्रेरणा हैं — तुरंत बोर्ड बनवाइए!
(“प्रेरणा स्रोत, राष्ट्र निर्माण अभियान – गाड़ी नंबर DL-01-XYZ-9999”)
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