Saturday, March 7, 2026
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जब लेडी विलिंगटन भी अनुसूया प्रसाद बहुगुणा की मुरीद हुई।

जब लेडी विलिंगटन भी अनुसूया प्रसाद बहुगुणा की मुरीद हुई।

Dr. Yogesh Dhasmana

भारत के वायसराय की पत्नी 1935 में गढ़वाल हिमालय के भ्रमण पर ओर बद्री केदार के दर्शन के साथ बर्फीली चोटियों को निहारने के बाद गौचर के मैदान पर जहाज से उतरी तो भारी जन समूह उन्हें ओर जहाज को निहारने के लिए उमड़ पड़ा था।
07सीटर का यह जहाज जन विलिंगटन को हिमालय की सैर कराने के बाद कुछ देर के लिए गौचर में रुका तो,ब्रिटिश प्रशासन के अधिकारियों के साथ डी सी एबटसन अनसूया प्रसाद बहुगुणा और विटोरिया क्रास पुरस्कार विजेता दरबानसिंह नेगी भी उनका स्वागत किया।इस यात्रा में लेडी विलिंगटन के साथ जाने माने पत्रकार निहालसिंह भी थे।

इस ऐतिहासिक यात्रा में तब के जिला बोर्ड के अध्यक्ष ओर प्रथम नागरिक एडवोकेट अनुसूया प्रसाद बहुगुणा के नेतृत्व में स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। ढोल दमाऊ ओर स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ,ओर बहुगुणा के भाषण से लेडी विलिंगटन अभिभूत हो उठी थी।

इस यात्रा में अनसूया प्रसाद बहुगुणा ने लेडी विलिंगटन से मिलकर बदरी केदार की यात्रा को देखते हुए हवाई सेवा शुरू करने की मांग के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के नीति घाटी मार्ग पर चमोली के व्यापारियों को जन सुविधाएं दिलाने का आग्रह किया गया था। इसी अनुरोध पर 1936 में बहुगुणा के पौड़ी से विधायक बनने के बाद एक निजी विमान कंपनी हिमालयन एयरवेज को प्रारंभ करवाया था,जो संभवतः प्रयाप्त संख्या में यात्री न मिलने के कारण हरिद्वार से गौचर कुछ ही महीनों तक चल सकी।

लेडी विलिंगटन आगमन ओर उनके द्वारा दिए गए आतिथ्य के साथ बहुगुणा के भाषण की लेडी विलिंगटन ने बहुत प्रशंसा की।साथ ही दरबान सिंह के साथ फोटो खिंचवाकर उनके प्रति भी आभार व्यक्त किया।1989 में अनसूया बहुगुणा की शताब्दी पर प्रकाशित स्मारिका में प्रकाशित लेख के अनुसार तब बद्रीनाथ के रावल भी उनसे मिलना चाहते थे पर धार्मिक मान्यताओं का हवाल देकर ओर कपाट बंद होने से पहले वह ना ही स्थान छोड़ सकते हे,ओर ना ही,नदी पार कर अन्यत्र जा सकते हे।

दून घाटी के शोध पत्रकार राजू गुसाईं के सौजन्य से फोटो ओर कुछ जानकारियां देने के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूँ।विवरण में गौचर में लेडी विलिंगटन ओर दरबान सिंह नेगी का फोटो तब समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था। उसे पाठकों के लिए साझा कर रहा हूँ।

 

– लेखक इतिहास के जानकार है।

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