Sunday, June 28, 2026
Home lifestyle स्मृति शेष : वरिष्ठ कथाकार विद्यासागर नौटियाल के जन्मदिन पर विशेष

स्मृति शेष : वरिष्ठ कथाकार विद्यासागर नौटियाल के जन्मदिन पर विशेष

विद्या सागर नौटियाल
29.09.1933 -18.02.2012

 

By – Dr. Arun Kuksal

विद्या सागर नौटियाल की कहानियों में लोक कथात्मकता और राजनीतिक सचेतता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। इसका कारण यह है कि ‘ लोक’ और ‘ राजनीति’ से उनका जुड़ाव जीवन भर रहा है। विद्यार्थी जीवन से ही वह सक्रिय राजनीति में रहे। सन साठ के दशक में जब वह बीएचयू के छात्र रहे थे तो वहाँ पर छात्र संघ का चुनाव बराबर लड़ा करते थे। बहुत पहले मैंने कथाकार काशीनाथ सिंह जी का लेख ‘ कहनी की वर्णमाला और मैं’ पढ़ा था जिसमें उन्होने विद्या सागर नौटियाल द्वारा बी एच यू छात्र संघ चुनाव लड़े जाने का उल्लेख किया था और यह भी लिखा था कि वह उनके लिए ( नौटियाल जी के लिए) काम किया करते थे। पहली बार मैंने उनके नाम को उस लेख के माध्यम से जाना था।

उसके बाद नौटियाल जी ने विधान सभा का भी चुनाव लड़ा और उसमें विजयी रहे । सन 1996 में मैं उनसे पहली बार मिला तो उक्त लेख का स्मरण आया और उनसे पूछा। यद्यपि कि उन्होने उस लेख को नहीं पढ़ा था पर यह बात उन्होने स्वीकार किया था कि उन्होने और काशीनाथ ने उस दौर के कई महत्वपूर्ण छात्र आन्दोलनों में साथ साथ भाग लिया था।

नौटियाल जी का साहित्य लेखन दो चरणों में हुआ। पहला चरण सन 1949 से 1960 के दौर का है। आरंभिक कहानियों से ही वह चर्चा में आ गए थे। उनकी कहानियां उस दौर की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘ कल्पना’ में अक्सर प्रकाशित हआ करती थीं। उस दौर की कहानियां ‘ टिहरी की कहानियां’ में संकलित हैं। उनका दूसरे चरण का लेखन सन 1990 के बाद का है जिसमें कहानियों की तुलना में उपन्यास लेखन अधिक हुआ। दूसरे दौर में कहानियों की महत्वपूर्ण किताब ‘ सुच्ची डोर’ जबकि ‘ सूरज सबका है’, ‘ झुंड से बिछुड़ा’, ‘ यमुना के बागी बेटे’ उनके महत्वपूर्ण उपन्यास हैं। ‘ सूरज सबका है’ पर सन 2000 में उन्हें ‘ पहल’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें सन 2010 में ‘ श्रीलाल शुक्ल इफ्को सम्मान’ भी मिला था।
‘संवेदना’ की गोष्ठियों में वे नियमित आने वाले लोगों में से थे। इस गोष्ठी में उन्होंने अपनी बहुत सारी अप्रकाशित रचनायें पढ़ी थीं। इन गोष्ठियों में मुझे भी उनका सान्निध्य प्राप्त हुआ था। वे श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं को गंभीरता पूर्वक सुनते थे और सुझावों के लिये लोगों का आभार व्यक्त करते थे। अपनी रचनाओं को लेकर उन्हें वैसी आत्मुग्धता नहीं रहती थी जैसी कि अमूमन स्थापित रचनाकारों में हुआ करती थी/है। शायद अपने इसी स्वाभाव के कारण वे अपने पहाड़ को सही ढंग से व्याख्यायित कर पायें हों। ‘ टिहरी की नथ’, ‘भैंस का कट्या’, ‘फट जा पंचधार’, ‘सन्निपात’, आदि उनकी चर्चित कहानियां हैं। उनकी एक मज़ेदार कहानी है ‘सुच्ची डोर’ । इसमें पहाड़ के गांव का एक आदमी एक उठाईगीर को धागे से बांध कर चलता है और वह चुपचाप बंधा हुआ पीछे पीछे चलता चला जाता है। यह पहाड़ी लोगों की अबोधता और एक दूसरे पर परस्पर विश्वास की कहानी है। नौटियाल जी की कई रचनाओं जैसे यमुना के बागी बेटे, भीम अकेला है, में मूल कथा के समान्तर पौराणिक आख्यान चलते हैं । रचना के आखिर में मूल कथाओं को इन पौराणिक आखयानों के समक्ष चुनौती के रूप में प्रस्तुत करते हैं। विद्या सागर नौटियाल के पांच कहानी संग्रह छः उपन्यास के अतिरिक्त संस्मरणों, साक्षात्कारों आदि के विविध संकलन भी हैं।

******************

उनकी स्मृति में उनकी जन्मतिथि पर कथाकारों को सम्मानित करने की परंपरा है और अब तक सुभाष पंत, शेखर जोशी, डा शोभाराम शर्मा और पंकज बिष्ट को सम्मानित किया गया है। चूँकि विद्या सागर नौटियाल जी कथाकार के अलावा राजनीतिज्ञ और समाजिक कार्यकर्ता भी थे, इसलिए इस बार वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता और आन्दोलनकारी प्रभात ध्यानी जी को सम्मानित किया जा रहा है।

@लेखक प्रसिद्ध विचारक है।

RELATED ARTICLES

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...