Thursday, May 14, 2026
Home lifestyle स्मृति शेष : वरिष्ठ कथाकार विद्यासागर नौटियाल के जन्मदिन पर विशेष

स्मृति शेष : वरिष्ठ कथाकार विद्यासागर नौटियाल के जन्मदिन पर विशेष

विद्या सागर नौटियाल
29.09.1933 -18.02.2012

 

By – Dr. Arun Kuksal

विद्या सागर नौटियाल की कहानियों में लोक कथात्मकता और राजनीतिक सचेतता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। इसका कारण यह है कि ‘ लोक’ और ‘ राजनीति’ से उनका जुड़ाव जीवन भर रहा है। विद्यार्थी जीवन से ही वह सक्रिय राजनीति में रहे। सन साठ के दशक में जब वह बीएचयू के छात्र रहे थे तो वहाँ पर छात्र संघ का चुनाव बराबर लड़ा करते थे। बहुत पहले मैंने कथाकार काशीनाथ सिंह जी का लेख ‘ कहनी की वर्णमाला और मैं’ पढ़ा था जिसमें उन्होने विद्या सागर नौटियाल द्वारा बी एच यू छात्र संघ चुनाव लड़े जाने का उल्लेख किया था और यह भी लिखा था कि वह उनके लिए ( नौटियाल जी के लिए) काम किया करते थे। पहली बार मैंने उनके नाम को उस लेख के माध्यम से जाना था।

उसके बाद नौटियाल जी ने विधान सभा का भी चुनाव लड़ा और उसमें विजयी रहे । सन 1996 में मैं उनसे पहली बार मिला तो उक्त लेख का स्मरण आया और उनसे पूछा। यद्यपि कि उन्होने उस लेख को नहीं पढ़ा था पर यह बात उन्होने स्वीकार किया था कि उन्होने और काशीनाथ ने उस दौर के कई महत्वपूर्ण छात्र आन्दोलनों में साथ साथ भाग लिया था।

नौटियाल जी का साहित्य लेखन दो चरणों में हुआ। पहला चरण सन 1949 से 1960 के दौर का है। आरंभिक कहानियों से ही वह चर्चा में आ गए थे। उनकी कहानियां उस दौर की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘ कल्पना’ में अक्सर प्रकाशित हआ करती थीं। उस दौर की कहानियां ‘ टिहरी की कहानियां’ में संकलित हैं। उनका दूसरे चरण का लेखन सन 1990 के बाद का है जिसमें कहानियों की तुलना में उपन्यास लेखन अधिक हुआ। दूसरे दौर में कहानियों की महत्वपूर्ण किताब ‘ सुच्ची डोर’ जबकि ‘ सूरज सबका है’, ‘ झुंड से बिछुड़ा’, ‘ यमुना के बागी बेटे’ उनके महत्वपूर्ण उपन्यास हैं। ‘ सूरज सबका है’ पर सन 2000 में उन्हें ‘ पहल’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें सन 2010 में ‘ श्रीलाल शुक्ल इफ्को सम्मान’ भी मिला था।
‘संवेदना’ की गोष्ठियों में वे नियमित आने वाले लोगों में से थे। इस गोष्ठी में उन्होंने अपनी बहुत सारी अप्रकाशित रचनायें पढ़ी थीं। इन गोष्ठियों में मुझे भी उनका सान्निध्य प्राप्त हुआ था। वे श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं को गंभीरता पूर्वक सुनते थे और सुझावों के लिये लोगों का आभार व्यक्त करते थे। अपनी रचनाओं को लेकर उन्हें वैसी आत्मुग्धता नहीं रहती थी जैसी कि अमूमन स्थापित रचनाकारों में हुआ करती थी/है। शायद अपने इसी स्वाभाव के कारण वे अपने पहाड़ को सही ढंग से व्याख्यायित कर पायें हों। ‘ टिहरी की नथ’, ‘भैंस का कट्या’, ‘फट जा पंचधार’, ‘सन्निपात’, आदि उनकी चर्चित कहानियां हैं। उनकी एक मज़ेदार कहानी है ‘सुच्ची डोर’ । इसमें पहाड़ के गांव का एक आदमी एक उठाईगीर को धागे से बांध कर चलता है और वह चुपचाप बंधा हुआ पीछे पीछे चलता चला जाता है। यह पहाड़ी लोगों की अबोधता और एक दूसरे पर परस्पर विश्वास की कहानी है। नौटियाल जी की कई रचनाओं जैसे यमुना के बागी बेटे, भीम अकेला है, में मूल कथा के समान्तर पौराणिक आख्यान चलते हैं । रचना के आखिर में मूल कथाओं को इन पौराणिक आखयानों के समक्ष चुनौती के रूप में प्रस्तुत करते हैं। विद्या सागर नौटियाल के पांच कहानी संग्रह छः उपन्यास के अतिरिक्त संस्मरणों, साक्षात्कारों आदि के विविध संकलन भी हैं।

******************

उनकी स्मृति में उनकी जन्मतिथि पर कथाकारों को सम्मानित करने की परंपरा है और अब तक सुभाष पंत, शेखर जोशी, डा शोभाराम शर्मा और पंकज बिष्ट को सम्मानित किया गया है। चूँकि विद्या सागर नौटियाल जी कथाकार के अलावा राजनीतिज्ञ और समाजिक कार्यकर्ता भी थे, इसलिए इस बार वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता और आन्दोलनकारी प्रभात ध्यानी जी को सम्मानित किया जा रहा है।

@लेखक प्रसिद्ध विचारक है।

RELATED ARTICLES

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक सूक्ष्म परजीवी ततैया है जो हानिकारक कीड़ों के अंडों पर हमला करता है। यह लगभग 200 प्रकार के नुकसानदायक कीटों के अंडों...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

वरिष्ठ साहित्यकार राम प्रकाश अग्रवाल कण की पुस्तक का लोकार्पण।

पुस्तक लोकार्पण "मॉं जिसके गोद में सभ्यताएं पलीं" लेखक - राम प्रकाश अग्रवाल कण, प्रकाशन - समय साक्ष्य (देहरादून)   By - Neeraj Naithani ।।   लैंसडाउन चौक स्थित...

तुलसी माला को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं बद्रीनाथवासी? पढ़े पूरी रिपोर्ट

By - Sanjana bhagwat   बद्रीनाथ धाम में तुलसी माला को लेकर बामणी गांव के लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध केवल एक व्यापारिक विषय नहीं,...

12 मई विशेषांक : शिल्पकारों के उत्थान के लिए लड़ते रहे बलदेव सिंह आर्य।

‘जातीय जड़ता जाने का जश्न मनायें’। उत्तराखण्ड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992)...

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह : उफ्तारा

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह। फिल्म परिषद का कार्यालय शीघ्र। सी.ई.ओ. बंशीधर तिवारी का उफतारा ने जताया आभार। दूरदर्शन और संस्कृति विभाग को...