Sunday, June 28, 2026
Home lifestyle फिर आ गई, मंगसीर की बग्वाळ (दिवाली) अर्थात रिख बग्वाळ।

फिर आ गई, मंगसीर की बग्वाळ (दिवाली) अर्थात रिख बग्वाळ।

फिर आ गई, मंगसीर की बग्वाळ (दिवाली) अर्थात रिख बग्वाळ।

By – Mahipal Negi

इस बार 19 – 20 नवम्बर को मनाई जा रही है।
गढ़वाल में वह रिखोला लोदी के नाम से जाना गया। उसका पूरा नाम लोदी सिंह रिखोला नेगी था। गढ़वाल राजा से नेगीचारी मिलने से नेगी हुए। वह गढ़वाल रियासत के बदलपुर के बयेली / बयेला गांव में भौसिंह रिखोला नेगी के घर में जन्मा था। यहीं रिखणीखाल भी है। रिखोला योद्धाओं का रिखणीखाल। उसके पिता भी भड़ (योद्धा) हुए। भड़ थे और जागीरदार भी। माल जवाडी़ के जागीरदार।

गढ़वाल के राजा मान शाह ने 1605-1606 के दौरान भौ सिंह को सिरमौर के राजा को पराजित करने के लिए भेजा। क्योंकि सिरमौर की ओर से गढ़वाल रियासत के सीमा क्षेत्र जौनसार व रवांई की तरफ आक्रमण होते रहते थे।

एक बार तपोवन की जीरा बासमती पर सिरमौर के राजा की नजर लग गई तो युद्ध हो गया। भौ सिंह युद्ध जीत गया। लेकिन लौटते हुए धोखे से सिरमौर के राजा ने उन्हें मरवा दिया। बद्रीनाथ के जिस ध्वज और कैलापीर के नगाड़े को लेकर भौ सिंह लौट रहा था, वह सिरमौर का राजा छीन ले गया। रिखोला लोदी तब 16 साल का था।

भौ सिंह ने पहले ही अपनी पत्नी से वचन ले लिया था की युद्ध में उसके मारे जाने पर भी वह सती नहीं होगी और बालक रिखोला की देखभाल करेगी।
गढ़वाली में एक पंवाड़ा लोकगीत है –
” लाड करी प्यार तू रानी रिखोला माल को
तेरो रिखोला छ रानी अबि सोला साल को ………….”

सिरमौर से रिखोला लोदी के युद्ध की दो प्रमुख गाथाएं हैं, एक राजा मान शाह के शासन काल में शायद सन 1605- 1606 के दौरान, जब वह मात्र 16 साल का था और दूसरा राजा महीपत शाह के शासनकाल में 1624-1625 के दोरान, जब वह सेनापति बन गया था।

कहते हैं कि तब के गढ़वाल रियासत के वजीर शंकर डोभाल ने 16 साल के रिखोला को उलाहना दिया था – “हे रिखोला ! कैलावीर का नगाड़ा और बदरीनाथ का निशाण सिरमौर चला गया, तेरा पिता होता तो जीत कर लाता ……”
पंवाडा़ गीत –
“हे भड़, सिरमौर की गद्दी जीतीक आई
दिल्ली दरवाजो उठैक सिरनगर लाई …….”

पहले युद्ध में रिखोला के साथ भिल्लंग के योद्धा भी (टिहरी जिले की भिल्लंगना घाटी) साथ गए थे जिन्हें भिल्लंग्वाळ कहा गया है। दूसरा युद्ध दापा घाट तिब्बत का युद्ध जीतने के बाद हुआ। इस युद्ध में राजा भी साथ गया था। वे संभवत नेलंग – जादुंग होते हुए दापा गढ़ तक पहुंचे थे। इसी रास्ते दापा के सरदार टकनौर, उत्तरकाशी पर आक्रमण करते रहते थे। युद्ध गढ़वाल ने जीत लिया। भीम सिंह बर्त्वाल और उनके भाई दापा के सरदार नियुक्त हुए।

इसके बाद महीपत शाह ने रिखोला को सिरमौर युद्ध पर भेजा जिसमें शेरगढ़, काणीगढ़, कालसी और बैराटगढ़ से सिरमौर के राजा को खदेड़ दिया। लोक गाथाओं में फिर से यहां भी बद्रीनाथ के ध्वज और कैलापीर के नगाड़े का उल्लेख आता है।
वैराटगढ की राजकुमारी मंगलाज्योति ने घोषणा की थी कि जो सिरमौर को जीतेगा उसी योद्धा से विवाह करेगी। तब रिखोला, मंगलाज्योति को ब्याह कर ले आया।
पंवाड़ा गीत –
“जु भड़ जीतलू बांको सिरमौर
वी भीड़ मेरो डोला ली जालो ….”

वे 6 महीने तक वैराटगढ़ जौनसार में रहे। बाद में उनके दो पुत्र हुए। भानू रिखोला और मोती रिखोला। इनके वंशज अब भी बदलपुर क्षेत्र के कुछ गांवों में रहते हैं।
लोक में यह मान्यता भी है कि सिरमौर या तिब्बत युद्ध जीतने के बाद रिखोला के लौटने पर मंगसीर की दिवाली मनाई गई और उसे रिख बग्वाळ कहा गया। अर्थात रिखोला की बग्वाळ। हालांकि इसका संबंध सिरमौर के युद्ध से अधिक जान पड़ता है। क्योंकि तिब्बत के युद्ध में राजा स्वयं साथ था और वहां बर्त्वाल भाई जैसे योद्धा भी थे। जबकि सिरमौर का युद्ध मुख्य रूप से रिखोला के शौर्य से जुड़ा हुआ है।

और आज भी मंगसीर की बग्वाल जौनसार, रवाईं, उत्तरकाशी और कैलापीर के क्षेत्र – बुढ़केदार में ही सबसे ज्यादा उत्साह से मनाई जाती है। अर्थात जिनका मान सम्मान सिरमौर या दापा युद्ध से सीधा जुड़ा हुआ था। कैलापीर का नगाड़ा आज भी थाती, बूढ़ा केदार में मौजूद है। रिखोला के साथ भिल्लंग के भिल्लंग्वाळों का उल्लेख है जहां कि कैलापीर भी है। कैलापीर रिखोला लोदी का कुल देवता भी लोक गाथाओं में बताया गया है।

रिखोला ने गढ़वाल रियासत की पश्चिम और दक्षिण की सीमाओं का भी निर्धारण भी किया। दिल्ली की मुगल सल्तनत के मल्लों को पराजित कर उसने “दिल्ली दर्जा” प्राप्त किया था। वह कोई भी युद्ध नहीं हारा। अपराजेय रहा।
बाद के वर्षों में रिखोला लोदी भी रियासत के एक अंदरूनी षड्यंत्र का शिकार हुआ और धोखे से मारा गया। इतिहास के संदर्भ लिए रिखोला की कहानी लंबी है। पंवाडा़ शैली में लंबी लोक गाथा भी है। बहुत सी किंवदंतियां भी हैं ……..
मंगसीर की इस बग्वाळ का इतिहास कम-से-कम 400 साल का हो गया है।

फोटो – बूढाकेदार में कैलापीर के निशाण और नगाड़ा।
सौजन्य से – साथी हिम्मत रौतेला।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार है।

RELATED ARTICLES

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...