एक हजार दो सौ चौरानब्बे करोड़ की टिहरी झील पर्यटन विकास योजना देगी युवाओं को रोजगार।

यदि सब कुछ ठीक ठाक रहेगा तो एशिया की सबसे बड़ी झील “टिहरी झील” स्थानीय लोगो सहित राज्य के युवाओं के हाथो स्वरोजगार देने वाली है।
बता दें कि सरकारी सूचनाओं के आधार पर एशियन डेवलपमेंट बैंक की 1294 करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता से टिहरी झील का विकास होने वाला है। इसके लिए बकायदा योजना भी तैयार की गई है। एडीबी सहायता प्राप्त टिहरी लेक प्रोजेक्ट के तहत 52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लगभग 103 गांवों की लगभग 96875 आबादी को लाभ पहुंचाया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत डोबरा चांटी, तिवार गांव, कोटी कॉलोनी, न्यू टिहरी, मदन नेगी तथा झील कलस्टर में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं को विकास किया जाना तय है। इससे स्थानीय लोगो के हाथो स्वरोजगार होगा। यदि पर्यटन विकास की यह योजना सफल हो गई तो उत्तराखंड से पलायन पर 50 फीसदी स्वस्फूर्त रोक लग जायेगी।

इधर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने सचिवालय स्थित टिहरी झील पर्यटन विकास की योजना से जुड़े सभी अधिकारियों के साथ बैठक की है। टिहरी झील विकास परियोजना पर सतत्, समावेशी तथा जलवायु अनुकूल पर्यटन विकास से सम्बन्धित द्वितीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) बैठक के दौरान श्रीमती रतूड़ी ने निर्देश दिए कि इस प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय लोगों को विकास का भागीदार बनाते हुए टिहरी को एक ब्राण्ड पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
इस बैठक में सीएस ने यह भी निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट के तहत टिहरी शहर के ऐतिहासिक महत्व को पुनः स्थापित करने, पर्यटन की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, क्षेत्र में सतत एवं रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को प्रोत्साहित करने, पलायन रोकने, स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाने तथा क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को कम से कम 3 तीन दिन तक यहां रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

मुख्य सचिव ने टिहरी झील तथा इसके कैचमेंट एरिया के सम्पूर्ण विकास हेतु एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक ) की गाइडलाइन्स के अनुसार तैयार डीपीआर पर कार्य करने के साथ ही इस तरह के प्रोजेक्ट में सभी स्टेकहोल्डर्स विशेषकर स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने की हिदायत दी है। साथ स्थानीय लोगो के सुझाव लेने के निर्देश भी दिए है। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के सभी प्रोजेक्ट में पर्यावरणीय हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। विशेषरूप से पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की गतिविधियों में सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट को शीर्ष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने चारधाम यात्रा मार्ग पर भी ठोस अवशिष्ट प्रबन्धन हेतु पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने टूरिज्म एवं इकोलॉजी में संतुलन रखने की नीति का पालन करते हुए सभी टूरिज्म प्रोजेक्ट पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन के विकास से सम्बन्धित सभी प्रोजेक्ट का इस आधार पर मूल्यांकन किया जाए कि इससे कितने स्थानीय लोगों को रोजगार, विकास एवं कल्याण से सम्बन्धित लाभ पहुंचा है।
इसी बैठक में अधिकारियों ने जानकारी साझा की, कि 1294 करोड़ रूपये लागत के एडीबी सहायता प्राप्त टिहरी लेक प्रोजेक्ट के तहत 52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लगभग 103 गांवों की लगभग 96875 आबादी को लाभ पहुंचेगा।
इस दौरान बैठक में सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।







