Friday, September 11, 2026
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जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

  • जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

  • देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी हाइब्रिड मोड में कर रहे प्रतिभागिता

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून में जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला ‘Integrated Water Resources Modeling and Basin Management Using MIKE Hydro Basin’ का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। 7 एवं 8 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन ICAR-IISWC, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), देहरादून तथा DHI India के संयुक्त तत्वावधान में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के INCCC प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया जा रहा है।
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 400 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन एवं ऑन-साइट हाइब्रिड मोड के माध्यम से भाग ले रहे हैं। इनमें SARRA से जुड़े हाइड्रोलॉजिस्ट, GIS विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विभिन्न शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के संकाय सदस्य, पर्यावरण वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हैं। यह व्यापक सहभागिता देश में जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक मॉडलिंग तकनीकों के प्रति बढ़ती रुचि और आवश्यकता को दर्शाती है।

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य प्रतिभागियों को MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन एवं बेसिन प्लानिंग की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। प्रशिक्षण के दौरान GIS डेटा प्रोसेसिंग, हाइड्रोलॉजिकल सिमुलेशन, मॉडल सेट-अप, इनपुट डेटा तैयार करने, मॉडल कैलिब्रेशन एवं वैलिडेशन, परिदृश्य विश्लेषण तथा निर्णय समर्थन प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन तथा भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप जल संसाधन प्रबंधन की रणनीति विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

आयोजन अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक (SWCE) डॉ. अमरीश कुमार ने स्वागत संबोधन में कार्यशाला के उद्देश्यों और इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक मॉडलिंग एवं वैज्ञानिक डेटा आधारित तकनीकों का प्रभावी उपयोग जल संसाधनों के बेहतर नियोजन और दीर्घकालिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक जलागम डॉ. ए.के. डिमरी, उप निदेशक SARRA डॉ. डी.एस. रावत, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश (LWME), डॉ. उदय मंडल (SWCE), डॉ. रमा पाल सहित अनेक वैज्ञानिक, विशेषज्ञ एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हिमालयी नदियों से लेकर भूजल पुनर्भरण तक विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला के प्रथम दिवस राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के पूर्व वैज्ञानिक ‘जी’ एवं अध्यक्ष डॉ. आर.पी. पांडे ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में नदियों के पुनरुद्धार की रणनीतियों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नदी पुनरुद्धार के लिए वैज्ञानिक एवं समेकित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके पश्चात DHI India की विशेषज्ञ टीम ने MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर के परिचय, प्रोजेक्ट इनिशियलाइजेशन तथा सॉफ्टवेयर के विभिन्न टूल्स एवं कार्यप्रणाली से प्रतिभागियों को परिचित कराया।
NIH रुड़की के वैज्ञानिक ‘सी’ डॉ. अजय अहिरवार ने MIKE Hydro Basin में मॉडल सेट-अप एवं आवश्यक इनपुट डेटा तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रतिभागियों को मॉडल सिमुलेशन, कैलिब्रेशन एवं वैलिडेशन के साथ-साथ वास्तविक डेटा पर Hands-on Exercises के माध्यम से तकनीकी दक्षता विकसित करने का अवसर दिया जा रहा है।
कार्यशाला में बेसिन प्रबंधन के लिए विभिन्न संभावित परिस्थितियों का Scenario Analysis तथा प्रभावी नीति एवं योजना निर्माण हेतु Decision Support System के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इसी क्रम में CSSRI करनाल के पूर्व निदेशक डॉ. एस.के. कामरा द्वारा ‘Water Positive Landscape’ विकसित करने के लिए भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के डिजाइन, उपयुक्त स्थल चयन एवं प्रभावी कार्यान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ विचार साझा किए जाएंगे।

जल संकट की चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती जल मांग, जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के दौर में केवल पारंपरिक जल प्रबंधन उपाय पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में डेटा आधारित मॉडलिंग, वैज्ञानिक विश्लेषण और आधुनिक निर्णय समर्थन प्रणालियां भविष्य की जल नीति एवं बेसिन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला वैज्ञानिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं, जल विशेषज्ञों एवं युवा शोधकर्ताओं के बीच ज्ञान एवं तकनीकी अनुभव के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच उपलब्ध करा रही है। साथ ही, इससे हिमालयी एवं अन्य नदी बेसिनों के समेकित प्रबंधन, जल सुरक्षा, भूजल पुनर्भरण, नदी पुनरुद्धार और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल जल संसाधन रणनीतियां विकसित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।
कार्यशाला को जल संकट की चुनौतियों से निपटने, जल संसाधनों के बेहतर नियोजन तथा टिकाऊ एवं जल-सुरक्षित बेसिन विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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