Friday, March 6, 2026
Home पौड़ी गढ़वाल नींबू वर्गीय फलों का फटना- कारण एवं रोकथाम।

नींबू वर्गीय फलों का फटना- कारण एवं रोकथाम।

नींबू वर्गीय फलों का फटना- कारण एवं रोकथाम।

  • @डा० राजेंद्र कुकसाल

Neemboo
Neemboo

नीम्बू वर्गीय फलों (कागजी नींबू,माल्टा,संतरा आदि ) का फटना एक आम समस्या है जिससे फलों की गुणवत्ता और उपज कम होने के साथ ही उनमें रोग व कीट आक्रमण की संभावनाएं भी बढ़ जाती है।

फलों के फटने के कई कारण हो सकते हैं-

1 वातावरण में अधिक नमी का होना- अधिक तापमान में जब अचानक वर्षा बहुत दिनों के बाद होती हैं, मिट्टी में उपस्थिति नमी की अपेक्षा फल के ऊपर अधिक पानी रहना फलों को फटने के लिये बाध्य कर देता है जब फलों द्वारा वर्षा का पानी अधिक मात्रा में सोख लिया जाता है, वह फल के अन्दर प्रविष्ट होकर रस की मात्रा बढ़ा देता हैं जिससे फल फट जाते हैं।

2 अधिक गर्मी के कारण – लगातार सूखे के कारण यदि पौधों के पास की मिट्टी पानी की कमी से अधिक सूख जाती है और बाद में अचानक पानी अधिक मात्रा में दे दिया जाता है तो फल फट जाते हैं। सूखे मौसम में जब तापक्रम अधिक रहता है तो नींबू तथा लैमन के फलों की बाहरी छाल सख्त पड़ जाती है और बाद में अधिक पानी के कारण फलों के अन्दर के भाग भार व आयतन में बढ़ते हैं तो फल फट जाते हैं। फल फटने की क्रिया उस समय अधिक देखी जाती है जब वे पकने लगते हैं।

3 पोषक तत्वों का असंतुलन

कैल्शियम की कमी का फलों के फटने से गहरा संबंध है। कैल्शियम कोशिका भित्ति की अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो फलों की त्वचा को लचीला बनाए रखने और फटने की संभावना को कम करने में मदद करता है। अन्य पोषक तत्वों का असंतुलन, जैसे कि अतिरिक्त नाइट्रोजन, फलों की तेजी से वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है, जो बिना फटे फलों के फैलने की क्षमता को कम कर सकता है।

4 फलों का भार और परिपक्वता

Neemboo
Neemboo

अधिक फलों का होना एक पेड़ पर बहुत अधिक संख्या में फल लगते हैं, तो यह उन सभी को आवश्यक पोषक तत्व और पानी समान रूप से प्रदान करने में सक्षम नहीं हो सकता है, जिससे विकास संबंधी विसंगतियाँ जैसे कि दरार पड़ना आदि हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, छाया या फलों की अधिकता के कारण अधिक पके या असमान रूप से पके फलों के फटने की संभावना अधिक होती है।

5 किस्म की संवेदनशीलता

कुछ नींबू वर्गीय किस्मों में दूसरों की तुलना में फल फटने की अधिक संभावना होती है। छिलके की मोटाई, फलों का आकार और पानी के तेजी से अवशोषण की अनुवांशिक प्रवृत्ति जैसे कारक कुछ किस्मों को दरार पड़ने के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, पतले छिलके वाले खट्टे फल पर्यावरणीय तनावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जबकि मोटे छिलके वाली किस्में दरार पड़ने का बेहतर प्रतिरोध करती हैं।

6 कीड़े तथा बीमारियाँ- बहुत से कीड़े तथा बीमारियों फलों की छोटी अवस्था में ही आक्रमण कर देते हैं। जैसे-जैसे फल बढ़ता है उनका आक्रमण भी अधिक होता जाता है, जिससे फल फटने शुरू हो जाते हैं।

7 यांत्रिक कारण – यांत्रिक कारणों द्वारा भी बहुत से फल फट जाते हैं, जैसे कि नींबू प्रजाति के फल कम तापक्रम के साथ अधिक नम मौसम में फटने शुरू हो जाते हैं।

रोकथाम के उपाय

1 लगातार सिंचाई

नियमित रूप से पानी देना पानी के तनाव से बचने के लिए, मिट्टी की नमी के स्तर को स्थिर रखना आवश्यक है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली विशेष रूप से समान जल वितरण प्रदान करने और मिट्टी की नमी में अचानक उतार-चढ़ाव से बचने में प्रभावी होती है जो फल फटने का एक प्रमुख कारण है ।

2 अधिक सिंचाई से बचें

अत्यधिक पानी देने से समस्या बढ़ सकती है, खासकर लंबे समय तक सूखे के बाद। एक बार में बड़ी मात्रा में पानी देने के बजाय धीरे-धीरे पानी की आपूर्ति बढ़ाएँ।

3 मल्चिंग का उपयोग करें

नींबू पेड़ों के आधार के चारों ओर मल्चिंग मिट्टी की नमी को बनाए रखने, तापमान में उतार-चढ़ाव को कम करने और समग्र जड़ स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करती है। नमी के स्तर को स्थिर करने के लिए पुआल, पत्तियों या खाद जैसे जैविक मल्च का उपयोग किया जा सकता है।

4 पोषण प्रबंधन

कैल्शियम का प्रयोग

कैल्शियम फलों की त्वचा की मजबूती और लचीलेपन को बेहतर बनाता है। पत्तियों पर 0.2 – 0.5% कैल्शियम नाइट्रेट या कैल्शियम क्लोराइड का छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त, जिप्सम (कैल्शियम सल्फेट) का मिट्टी में इस्तेमाल मिट्टी में कैल्शियम की उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

संतुलित उर्वरकों का प्रयोग

अत्यधिक नाइट्रोजन से फलों की वृद्धि तेजी से हो सकती है और उनके फटने का जोखिम बढ़ सकता है। संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें जिसमें न केवल नाइट्रोजन बल्कि फास्फोरस, पोटेशियम और जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी शामिल हों। पोटेशियम विशेष रूप से कोशिका भित्ति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे दरार पड़ने की संभावना कम हो सकती है।

5 प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें

साइट्रस बाग लगाते समय या पुराने पेड़ों को बदलते समय, ऐसी प्रतिरोधी किस्मों को चुनना चाहिए जिनमें फल फटने की संभावना कम हों। मोटी त्वचा, बेहतर लोच और धीमी वृद्धि दर वाली प्रजातियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

6 फलों की छंटनी करना करना

मौसम की शुरुआत में फलों की छंटनी करने से पेड़ पर कुल भार कम करने में मदद मिलती है। अतिरिक्त फलों को हटाकर, पेड़ बचे हुए फलों को ज़्यादा पोषक तत्व और पानी दे सकता है, जिससे फलों के फटने की संभावना कम हो जाती है।

7 उचित कटाई छंटाई

घनी शाखाओं की छंटाई करने से पौधों में वायु संचार और प्रकाश प्रवेश में सुधार होता है, जिससे फल अधिक समान रूप से पकते हैं जिससे फलों के फटने में कमी आ जाती है।

8 मृदा परीक्षण अवश्य कराएं। पी. एच. मान पौधों की पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित करता है इसलिए यदि मिट्टी का पी.एच. मान कम (अम्लीय)है तो पीएच मान को 6.5 तक लाने हेतु मिट्टी में चूना या लकड़ी की राख मिलायें यदि मिट्टी का पी एच मान अधिक (क्षारीय)है तो मिट्टी में कैल्सियम सल्फेट,(जिप्सम) मिलायें। भूमि के क्षारीय व अम्लीय होने से मृदा में पाये जाने वाले लाभ दायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता कम हो जाती है जिस कारण मृदा में उपस्थित सूक्ष्म व मुख्य तत्त्वों की घुलनशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

9 शेड नेट और एंटी-ट्रांसपिरेंट

ऐसे क्षेत्रों में जहाँ उच्च तापमान और सीधी धूप की समस्या है, तापमान तनाव को कम करने और फलों की सुरक्षा के लिए शेड नेट का उपयोग किया जा सकता है। पानी की कमी को कम करने और फलों में नमी बनाए रखने के लिए एंटी-ट्रांसपिरेंट भी लगाए जा सकते हैं।

10 बीमारियों तथा कीड़ों को नियंत्रित रखना चाहिये।

11 विंडब्रेक का उपयोग करें

तेज़ हवाएँ वाष्पीकरण के ज़रिए पानी की कमी को बढ़ा सकती हैं और तापमान में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकती हैं। तेज़ हवाओं वाले क्षेत्रों में विंडब्रेक लगाने से पेड़ों की सुरक्षा हो सकती है और एक स्थिर माइक्रोक्लाइमेट बना रह सकता है।

@लेखक उद्यान विशेषज्ञ है।

RELATED ARTICLES

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...