Thursday, May 14, 2026
Home उत्तराखंड काला चश्मा पहनकर दूर शहर से गांव पहुंचने लग गए है वोटर।

काला चश्मा पहनकर दूर शहर से गांव पहुंचने लग गए है वोटर।

– भारी बारिश के बीच फर्जी वोटरों की बाढ़।

– लाखों करोड़ों फूकने वाले भी असमंजस में पैसा डूबेगा या होगा वसूल!

By – Gajendra Rawat

उत्तर प्रदेश दिल्ली राजस्थान पंजाब हरियाणा मध्य प्रदेश से लेकर तमाम राज्यों से फर्जी वोटरों का सज धज के काला चश्मा लगाकर उत्तराखंड पंचायत चुनाव मे वोट देने के लिये आना शुरू हो गया है.

ग्रामीणों द्वारा बताया जा रहा है इन लोगों को उत्तराखंड पंचायत चुनाव में वोट डालने के लिए बस, टेंपो ट्रैवलर से लेकर इनोवा जैसी गाड़ियां प्रत्याशियों द्वारा उपलब्ध कराई गई है आने जाने रुकने के खर्चे के साथ दारू मुर्गा चखना का एडवांस मे इंतजाम किया गया है. यह भी बताया जा रहा कि वोट देने गावं आते वक़्त रास्ते मे खाने पीने बीड़ी माचिस पान तंबाकू का खर्चा अलग से दिया गया है.

वोटिंग के दिन नाश्ते से लेकर लंच और वापसी के लिये अलग से दारू मुर्गा छोले पूरी पैक कर ले जाने का इंतजाम चुनाव लड़ने वाले लोगों ने वहीं जाकर उन्हें 100% एडवांस दे दिया है.इन फर्जी वोटरों की ऐसे आवभगत होती है जैसे कोई लड़की देखने लड़के वाले आ रखे हों.

इनमें से अधिकांश वह मतदाता हैं जिनके दूसरे राज्यों में भी मतदाता सूची में भी नाम है और उत्तराखंड के गांव में भी.गावं मे रहने वाले तो इनकी शक्ल तक से नहीं पहचानते इस कारण अधिकांश को कोई नमस्ते तक नहीं करता.

उत्तराखंड का कोई भी ऐसा नगर निगम नगर पालिका या नगर पंचायत नहीं है जहां से पिछले निकाय चुनाव में वोट देने वाले लोग गांव जाकर वोट देने ना जा रहे हो ऐसे मतदाताओं की संख्या थोड़ी बहुत नहीं हजारों में है।

इन फर्जी वोटरों का गांव के सुख-दुख से कोई योगदान नहीं है यह सिर्फ वोट के वक्त गांव आते हैं और गांव में लगातार रह रहे दूसरों के सुख-दुख में साथ देने वाले लोगों का बुरा करके चले जाते हैं.
फर्जी वोटरों की इस बाढ़ के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नैनीताल हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को स्पष्ट रूप से कहा था कि आयोग द्वारा 6 जून को जो चिट्ठी जारी की गई वह पूरी तरह से गलत थी. जिस व्यक्ति का नाम निकाय की मतदाता सूची में है वह गांव में वोट नहीं दे सकता ना ही चुनाव लड़ सकता है अर्थात दो स्थानों पर वोट के लिये भारत के संविधान मे कोई स्थान नहीं है.

हाईकोर्ट के आदेश को आज तक धरातल पर नहीं उतारा गया है.किसी भी जिलाधिकारी को हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए नहीं कहा गया न कहीं कुछ नहीं लिखा गया है.

24 जुलाई को पहले चरण के चुनाव में वोट पड़ने हैं अभी तक निर्वाचन आयोग ने कहीं नहीं लिखा कि जिन मतदाताओं के दो स्थानों पर वोट है वह वोट नहीं देंगे.हो सकता है कि अगले कुछ घंटे में निर्वाचन आयोग के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मामला हाई कोर्ट में पहुंच जाए.देखने वाली बात यह होगी की निर्वाचन आयोग हाई कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर इस बार क्या कहानी सुनाता है.

बहरहाल लोकतंत्र के इस पर्व में हर गांव में जिस प्रकार से दो स्थानों पर वोट वाले गावं पहुँच रहे हैँ उससे गावं का भला कभी नहीं हो सकता. फर्जी वोट देश के लिए कलंक है. ऐसे लोगों को दण्डित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य मे कोई ऐसी हिमाकत न कर सके.भारत निर्वाचन आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए.

प्रयोग की धरती बन चुकी उत्तराखंड से इलेक्शन रिफॉर्म होगा कुछ ऐसा अब महसूस होने लगा है. एक देश एक चुनाव से पहले “एक व्यक्ति एक मतदाता” होना बेहद अनिवार्य है.

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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