राष्ट्रपति निकेतन में गूँजी देवभूमि की स्वर-लहरियाँ, उत्तराखंड की लोकसंस्कृति ने बाँधा शमा।
By Avdhesh Nautiyal
उत्तराखंड की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है जहाँ लोकगीतों में प्रकृति की धड़कन है और लोकनृत्यों में श्रम, आनंद और श्रद्धा का संगम। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला राष्ट्रपति निकेतन परिसर में संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में….
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को राष्ट्रपति निकेतन परिसर में उत्तराखंड की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में देवभूमि की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक देखकर गहरा आनंद व्यक्त किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकगीतों व नृत्यों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुति दी कि पूरा प्रांगण पहाड़ी लोकसंगीत की स्वर-लहरियों से गूंज उठा।
उत्तराखंड संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस आयोजन में उत्तराखंड की लोकधुनों, पारंपरिक वेशभूषा और जीवन-रस से भरे गीतों ने राष्ट्रपति सहित सभी अतिथियों का मन मोह लिया।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्य के कलाकारों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी प्रतिभा की सराहना की।
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