Thursday, May 14, 2026
Home lifestyle साहित्य संस्मरण : हमारी पीढ़ी का सबसे बड़ा कथाकार

साहित्य संस्मरण : हमारी पीढ़ी का सबसे बड़ा कथाकार

हमारी पीढ़ी का सबसे बड़ा कथाकार

Dr. Batrohi

साठ के दशक में ‘रगड़ खाती आत्महत्याएँ’ और ‘नए-पुराने माँ-बाप’ जैसी कतई अछूती संवेदना को लेकर उभरे कथाकार गोविन्द मिश्र शायद हमारी पीढ़ी के सबसे बड़े कथाकार हैं। नई कहानी की तिगड़ी राकेश, यादव, कमलेश्वर हों या छठे दशक की तिगड़ी ज्ञानरंजन, दूधनाथ और कालिया, सब लोग अपनी जबरदस्त प्रतिभा के बावजूद अपने अहंकार और अति महत्वाकांक्षा के कारण किस तरह बुझते चले गए, इसे हम जीतेजी अपनी आँखों से देखते रहे हैं।

अरम्भिक उपन्यास ‘लाल पीली जमीन’ के माध्यम से बुंदेलखंड का जो नया और मौलिक फलक सामने आया वह हिंदी के आत्ममुग्ध लेखकों के सामने अनेक रचनात्मक चुनौतियों को लेकर पहली बार सामने आया। हिंदी उपन्यास का यह नया चेहरा था जिसने भविष्य की हिंदी कथा-यात्रा का रास्ता प्रशस्त करना था। पहली बार टिकड़मी निर्णायकों को ओवरटेक करके साहित्य अकादमी ने इसे सम्मान दिया और सालों बाद अपनी संस्था के प्रति भरोसा पैदा किया हालांकि लोलुप हिंदी लेखकों की जीभ की राल कभी थमी नहीं। बीच में एकाध वीरेन डंगवाल जैसे अपवाद जरूर उभरे लेकिन उस बदनसीब को भी अनंत दंश झेलने पड़े। संयोग से डंगू को जसम का सहारा मिल गया मगर वो भी कितने दिन तक जिन्दा रह सका। अपनी मौत ही मानो मर गया।

छियासी वर्षीय गोविन्द मिश्र हिंदी के समकालीन समाज के सामने अजूबे से कम नहीं हैं। निहायत माध्ययवर्गीय परिवार में जन्म लेने के बाद देश की शीर्षस्थ प्रशासनिक सेवा को सफलता से निभाने के बाद वो अपने समकालीन समय में भी एकदम तरोताज़ा और टटके बने हुए हैं। मानो उम्र बार-बार उन्हें छूकर भाग खड़ी होती है। शायद इसका राज यह है कि उनकी निगाह उम्र पर नहीं, हिंदी रचनाधार्मिता के शाश्वत प्रवाह पर है।

उनका एक क्लासिक उपन्यास है ‘हुजूर दरबार’, जो आजादी के बाद पनपते चले गए सामंती मूल्यों को एकदम चुपचाप बिना बड़बोले दावों के ऐसे ऊकेरता है कि हिंदी समाज अपनी दयनीय हालत को अपनी ही नजर से निहारकर एक बार फिर सन्न रह जाता है। यह उपन्यास नए भारत की उभरती चेतना का नए सिरे से किया गया आत्मविश्लेषण है।

‘धुंध में सुरखी’ उनके व्यापक यात्रा-अनुभवों का बेहद संवेदनशील विवरण है जो यद्यपि हिंदी साहित्य के पूर्व में लिखे गए यात्रा-वृतांतों का ही विस्तार है मगर अपनी निजी और आत्मीय छटा से पूरी तरह लैस और प्रासंगिक।

‘स्थितियाँ रेखांकित’ उनके द्वारा आजादी के बाद उभरी हिंदी कहानियों का आदर्श संकलन है जो इससे पहले सामने आए आग्रही संकलनों की पूर्वग्रही नजर को ध्वस्त करके एकदम स्वस्थ मूल्यांकन दृष्टि को सामने लाता है।

RELATED ARTICLES

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक सूक्ष्म परजीवी ततैया है जो हानिकारक कीड़ों के अंडों पर हमला करता है। यह लगभग 200 प्रकार के नुकसानदायक कीटों के अंडों...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

वरिष्ठ साहित्यकार राम प्रकाश अग्रवाल कण की पुस्तक का लोकार्पण।

पुस्तक लोकार्पण "मॉं जिसके गोद में सभ्यताएं पलीं" लेखक - राम प्रकाश अग्रवाल कण, प्रकाशन - समय साक्ष्य (देहरादून)   By - Neeraj Naithani ।।   लैंसडाउन चौक स्थित...

तुलसी माला को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं बद्रीनाथवासी? पढ़े पूरी रिपोर्ट

By - Sanjana bhagwat   बद्रीनाथ धाम में तुलसी माला को लेकर बामणी गांव के लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध केवल एक व्यापारिक विषय नहीं,...

12 मई विशेषांक : शिल्पकारों के उत्थान के लिए लड़ते रहे बलदेव सिंह आर्य।

‘जातीय जड़ता जाने का जश्न मनायें’। उत्तराखण्ड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992)...

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह : उफ्तारा

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह। फिल्म परिषद का कार्यालय शीघ्र। सी.ई.ओ. बंशीधर तिवारी का उफतारा ने जताया आभार। दूरदर्शन और संस्कृति विभाग को...