क्या संसद अभिनय का मंच है या विचार मंच है ?

आज जो दशा दिखाई दे रही है उसे देखकर एक प्रसिद्ध लेखक Robert Louis Stevenson की यह टिप्पणी याद आती है कि-” We all know what Parliament is, and we are all ashamed of it.”
याद आ रहा है एक संसदीय सत्र की जो १९६२ में नेहरू जी के प्रधानमंत्री काल का है – उस समय भारत की चीन से करारी हार हुई थी -ऐसे समय में जनसंघ के एकमात्र सांसद अटल बिहारी वाजपेयी जी ने नेहरू जी को चिट्ठी लिखकर संसद का विशेष सत्र आहूत करने के की मांग रखी, नेहरू जी ने तुरंत सत्र आहूत करने के लिए राष्ट्रपति जी से अनुरोध किया हालांकि नेहरू जी जानते थे कि इस सत्र में उनकी बहुत फजीहत होनी निश्चित है लेकिन नेहरू जी स्वयं एक
अपराध बोध से ग्रसित थे -फिर भी उन्होंने सदन को आहूत करने में स्वयं का पश्चाताप और प्रायश्चित करने का अवसर देखा -वे बिलकुल नहीं घबराये I सदन में विपक्ष के सभी सदस्य सभी उबले बैठे थे क्रोध में -आचार्य जे०बी० कृपलानी सबसे सीनियर मेंबर थे – वे बहस करते समय इतने क्रोधित हो गए थे कि उन्होंने सीधे तत्कालीन रक्षा मंत्री VK कृष्ण मेनन को मुखातिब होकर कहा -“YOU ARE A TRAITOR ” यह उन्होंने कई बार दोहराया और कहते -कहते धम्म से अपनी सीट पर लुढ़ककर बेहोश हो गए -नेहरू जी अपनी सीट छोड़कर उनके पास गए -उन्हें पानी पिलाया उन्हें आश्वस्त किया और फिर हाथ जोड़कर कहा कि आपको जो सजा देनी हो, मुझे दीजिये और शांत हो जाइये -मेनन का कोई कसूर नहीं उन्होंने जो कुछ किया होगा मेरे कहने पर किया क्योंकि मंत्रिमंडल का नेता मैं ही हूँ –जब कृपलानी जी थोड़ा नार्मल हुए तो उन्होंने सदन में उपस्थित स्पीकर से माफ़ी मांगी कि उन्हें अपने इस आवेशपूर्ण वक्तव्य के लिए खेद है –सदन के उठते समय जब मेनन उनके पास से गुजरे तो कृपलानी जी ने कहा लेकिन मैं तुमसे माफ़ी नहीं मांगूगा और न तुम्हें माफ़ करूंगा I
एक अन्य प्रसंग में कृपलानी जी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा और भी है -जब कृपलानी जी ९० साल के हो गए तो किसी पत्रकार ने उनसे पूछा -आप Walking stick क्यों नहीं USE करते ? कृपलानी जी ने कहा- “देखो मुझे गुस्सा बहुत आता है, सबको पता है, -किसी पर मैं उससे प्रहार न कर दूँ इसलिए अपने पास छड़ी नहीं रखता I
एक बहस बाजपेयी जी बोले थे कि “बंदूकें नहीं बल्कि भाईचारे से समस्या का समाधान निकल सकता है( No guns but only brotherhood can resolve the problems-vajpayee ) –सरकारें आएँगी जाएंगी पार्टियां बनेंगी और बिगड़ेंगी ,मगर ये देश रहना चाहिए (Governments will come and go; political parties will be made and broken but thi nation must remain- AB Bajpaye )”







