प्रख्यात पर्यावरणविद पद्मविभूषित सुंदरलाल बहुगुणा की चौथी पुण्य स्मृति और हिमालय प्रहरी सम्मान समारोह में देहरादून के नगर निगम प्रेक्षागृह पहुंचे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने कहा कि आज भारत में अनियोजित विकासीय योजनाओं की बाढ़ सी आ गई है। इन्हें जनअभिक्रम के सहयोग से समय रहते रोकना होगा। ऐसा लगता है कि देश में सरकार किसी भी दल की हो कार्य करने का उनका चरित्र एक जैसा होता है। स्थानीय संस्कृति समाज को संकट में डालकर कुछ विशेष प्रकार के लोगो को सुविधा देने के लिए सरकारें प्राकृतिक संसाधनों की लूट करवा रही है। यही गलत है। इसी गलती का वे बार बार सरकार को अहसास करवा रहे है। उन्होंने लद्दाख का उदाहरण देकर कहा कि जहां भारी मात्रा में पश्मीना होती है, उस क्षेत्र को उजाड़ा जा रहा है। उस क्षेत्र में दुनियां की सबसे बड़ी सौरऊर्जा पैदा की जाएगी। यह स्थानीय संस्कृति पर एक तरह का प्रहार है। जो पश्मीना दुनियां में बहुत लोकप्रिय और महत्व की वस्तु है, स्थानीय लोगों को स्वरोजगार दे रही है उसे चंद लोगों की सुविधा के लिए नष्ट किया जाना प्रस्तावित है। दरअसल इसके लिए ऐसे बड़े बड़े चरवाह नष्ट करने की पूरी योजना बनाई गई है। वे आगे बताते हैं कि धारा 370 हटने के बाद ऐसा लगा रहा था कि अब लद्दाख में लोकतंत्र आ जाएगा। मगर लद्दाख के लोग अब भी लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे है।
श्री वांगचुक ने कहा कि जैसे सीमाओं पर अपने देश के सैनिक दुश्मन देश से अपने देश की सुरक्षा करता है ठीक उसी तरह आंदोलनकारी सैनिक इन अनियोजित परियोजनाओं से देश के लोगों को बचाने का कार्य करते है। अर्थात आंदोलन भी एक प्रकार से राष्ट्रीय धर्म है। इस दौरान वांगचुक ने जन विकास के कई उदाहरण प्रस्तुत किए है। उन्होंने अर्थशास्त्र और नियोजित विकास के पैमाने भी बताए है।
अपने भाषण के अंत में वांगचुक ने सुंदरलाल बहुगुणा को याद करते हुए उनके विचारों पर सभी से आगे बढ़ने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके गांव में बने बांध से पैदा होने वाली बिजली से शहर में किसी व्यक्ति की जिंदगी बचे तो वह निश्चित तौर पर विस्थापन पर संतोष व्यक्त करेंगे। अन्यथा उस बिजली से शहरों के एक – एक घर में बेवजह ए.सी. चलें तो इसके लिए गांव उजाड़ना कहां तक सही है। वांगचुक ने law of diminishing marginal utility के जरिए भी सीमित उपभोग की पुरजोर वकालत की है। कहा कि स्वर्गीय बहुगुणा भी यही सीख देकर गए हैं।
कौन है सोनम वांगचुक –
युवा उत्साही सोनम वांगचुक भारत के एक अभियन्ता, नवाचारी और शिक्षा सुधारक हैं। वह छात्रों के एक समूह द्वारा 1988 में स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक-निदेशक भी हैं।
मूलत: लद्दाख के निवासी वाँगचुक सोशल मीडिया में देश भर में एक बड़े नाम के साथ जाने जाते हैं। वे एक अनूठी पहल “आइस स्टूपा” (कृत्रिम ग्लेशियर) के लिए भी जाने जाते हैं, जो सर्दियों में पानी को बर्फ के शंकु के रूप में संग्रहित करता है और गर्मियों में किसानों के लिए पानी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, उन्होंने लद्दाख में सौर ऊर्जा पर आधारित SECMOL कैंपस डिज़ाइन किया, जो पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल है।
सोनम वांगचुक ने 1994 में ऑपरेशन न्यू होप शुरू किया, जो सरकार, गांव समुदायों, और सिविल सोसाइटी के सहयोग से सरकारी स्कूलों में सुधार लाने का प्रयास था। उनकी कहानी ने बॉलीवुड फिल्म “3 इडियट्स” में फुंसुक वांगडु के किरदार को प्रेरित किया। हाल के वर्षों में, वे लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्तता और पर्यावरण संरक्षण की मांग के लिए आंदोलन कर रहे हैं।









