उत्तराखंड की प्राकृतिक झीलें
By Chandrashekhar Tewari
उत्तराखण्ड के लघु हिमालय व महान हिमालयी भाग में कई जगहों पर जल झीलों अथवा सरोवरों में भी पाया जाता है। भूगोलवेत्ता इन झीलों का निर्माण हिमानियों द्वारा बहाये गये मोरेन व अन्य पदार्थों अथवा नदी मार्ग में शिलाओं के खिसक जाने के उपरान्त हुआ मानते है। कुछ झीलों का जन्म धरातल के नीचे की तरफ खिसक जाने से हुआ माना जाता है। चूना पत्थर वाली जगहों पर उसके घुलनशील पदार्थ जब घुलने लगते हैं तो उस वजह से वहाँ पर भूमि धंस जाती है और गढ्ढेनुमा आकृति जाती है। बाद में इसमें जल जमा हो जाता है जो झील का आकार ले लेती है। कई बार विवर्तनिक हलचलों के कारण भी आन्तरिक गर्तों के बन जाने से झीलों का निर्माण हो जाता है। उत्तराखण्ड के हिमाच्छादित भागों में अनेक झीलें पायी जाती हैं।
लघु हिमालयी भाग में नैनीताल के आसपास स्थित नैनीताल, भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, मलवाताल व खुरपाताल, हरीशताल व लोखामताल झीलें तथा रुद्रप्रयाग जनपद की देवरियाताल झील, उत्तरकाशी की नचिकेता व डोडीताल झील तथा चमोली की रुपकुण्ड झील पर्यटन की दृष्टि से प्रसिद्ध झीलें हैं। जिन्हें देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक आतेहैं। भीमताल व नौकुचियाताल झील के जल का उपयोग गर्मियों में भावर की खेती की सिंचाई में किया जाता है।
उत्तराखण्ड की कुछ प्रमुख प्राकृतिक झीलों का जनपद वार विवरण इस प्रकार हैं-नैनीताल जनपद में नैनीताल झील, भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल, खुरपाताल, सूखाताल, मलवाताल, हरीशताल, लोखामताल तथा उधमसिंह नगर जनपद में गिरिताल व द्रोणताल, चंपावत जनपद में श्यामलाताल, अल्मोड़ा में तड़ागताल, टिहरी में सहस्त्रताल, यमताल, महासरताल, मंसूरताल व गढ़वाल में दुग्ध ताल व तारा कुंड, चमोली जनपद में रूपकुंड, हेमकुंड संतोपंथ ताल, लिंगताल, विरही ताल, बेनीताल व गोहना ताल, उत्तरकाशी जनपद में नचिकेता ताल, डोडीताल, काणाताल व देवसारीताल तथा जनपद रुद्रप्रयाग में नन्दीकुण्ड, भेकल ताल, बदाणीताल, गाँधी सरोवर व देवरियाताल आदि ।

(लेखक की पुस्तक “उत्तराखण्ड का भूगोल” से उद्धरित अंश) है और लेखक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में रिसर्च एसोसिएट है







