पहाड़ से भी ऊंचे हौसले: विजय पब्लिक स्कूल बच्चों के
By Rakesh vijlwan
विशेष बच्चों के लिए उम्मीद की एक नई किरण
उत्तराखंड की शांत और सुरम्य वादियों में बसा उत्तरकाशी जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। लेकिन इन्हीं पहाड़ों के बीच, नौगांव नामक स्थान पर एक ऐसी इमारत है जो सिर्फ़ ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि अदम्य साहस, ममता और कभी न टूटने वाले हौसलों से बनी है। यह इमारत है— विजय पब्लिक स्कूल, जो ‘दिव्यांग’ या विशेष (Special) बच्चों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है।
अक्सर देखा जाता है कि मेट्रो शहरों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, लेकिन पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण की व्यवस्था करना लोहे के चने चबाने जैसा है। समाज की उपेक्षा और संसाधनों की कमी के बीच, नौगांव में इस स्कूल का संचालन करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
विजय जोशी: साहस और समर्पण की प्रतिमूर्ति
इस स्कूल की धड़कन और इसे अपने खून-पसीने से सींचने वाली शख्सियत हैं— विजय जोशी। उन्होंने जिस हिम्मत और जज़्बे के साथ इस स्कूल को खड़ा किया और चला रही हैं, वह हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जहाँ सामान्य जीवन भी संघर्षपूर्ण होता है, वहाँ मानसिक या शारीरिक रूप से चुनौती-ग्रस्त बच्चों की जिम्मेदारी उठाना आसान नहीं था।
विजय जोशी जी ने न केवल इन बच्चों को अपनाया बल्कि समाज की उस सोच को भी बदलने का बीड़ा उठाया, जो अक्सर विशेष बच्चों को “बोझ” या “बेचारा” मानती है। उन्होंने इन बच्चों की आंखों में छिपे सपनों को पहचाना और ठान लिया कि वे इन्हें स्वावलंबी बनाकर ही दम लेंगी। उनकी दिन-रात की मेहनत और ममतामयी स्पर्श ने इन बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर निकालने का काम किया है।
विजय पब्लिक स्कूल में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें ‘जीवन जीने की कला’ सिखाई जाती है। यहाँ का वातावरण किसी स्कूल जैसा कम और एक परिवार जैसा ज्यादा है। शिक्षकों और विजय जोशी जी के मार्गदर्शन में बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार तैयार किया जाता है।
यहाँ थेरेपी, खेल-कूद और वोकेशनल ट्रेनिंग (व्यावसायिक प्रशिक्षण) पर विशेष जोर दिया जाता है। बच्चों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे किसी से कम नहीं हैं। उन्हें रोजमर्रा के कार्यों से लेकर विशेष कौशल तक में निपुण बनाया जाता है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
इस संघर्ष और तपस्या का सबसे बड़ा फल तब मिला, जब इस स्कूल से निकले बच्चे आज अपने पैरों पर खड़े हो गए। विजय जोशी जी के लिए इससे बड़ा कोई सम्मान नहीं हो सकता कि आज उनके पढ़ाए कई बच्चे अच्छी नौकरियों में कार्यरत हैं।
ये बच्चे, जिन्हें कभी समाज ने नकार दिया था, आज अपनी मेहनत और स्कूल से मिले संस्कारों के बल पर न केवल पैसा कमा रहे हैं, बल्कि सम्मान का जीवन जी रहे हैं। कोई हस्तशिल्प में, कोई कंप्यूटर में, तो कोई अन्य कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहा है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और थोड़ा सा प्यार मिले, तो कोई भी बाधा इंसान को रोक नहीं सकती।
विजय पब्लिक स्कूल, नौगांव सिर्फ़ एक शिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं का एक तीर्थ है। विजय जोशी जी ने साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो पहाड़ जैसी चुनौतियां भी राई के समान हो जाती हैं।
आज आवश्यकता है कि समाज और सरकार ऐसे प्रयासों की सराहना करें और उन्हें हर संभव मदद दें। विजय पब्लिक स्कूल की यह कहानी हमें सिखाती है कि सेवा का असली अर्थ क्या है। उन तमाम बच्चों की मुस्कान, जो आज आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं, विजय जोशी जी के संघर्षों की सबसे बड़ी जीत है।#everyone







