Friday, March 6, 2026
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ख्यात साहित्यकार डा० नंदकिशोर हटवाल विश्व पुस्तक मेला 2025 के अनुभव साझा करते हुए

विश्व पुस्तक मेला : किताबों के साथ लेखकों-प्रकाशकों से भी मिलन

By Dr. Nandkishor Hatwal

Vishwa pustak mela
Vishwa pustak mela

निपट गया मेला, पर बातें नहीं निपटी। कुछ और रह गईं

Vishwa pustak mela
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विश्व पुस्तक मेले ने किताबों के साथ लेखकों-प्रकाशकों से मिलने का मौका भी दिया। चारू तिवारी, अरूण असफल, राजेश सकलानी, पंकज बिष्ट, काव्यांश प्रकाशन के प्रबोध उनियाल, समय साक्ष्य के प्रवीण भट्ट, पुष्पलता ममगाईं, गणेश खुगशाल ‘गणि’ आदि कई लेखक-प्रकाशकों से मुलाकात हुई। गढ़वाली के पजलकार और लेखक जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ जी ने तो बार्बी क्यू में हमारे निमित्त भोज का आयोजन कर इस मौके को ‘त्यवार’ में बदल दिया। दूसरे दिन बल्लभ डोभाल जी से मिलना और शाम को साहित्य प्रेमी सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’ जी के आमंत्रण पर उनके घर जाना भी हमारी यात्रा को विशेष बना गया। बुड़ाकोटी जी ने कुछ अन्य मित्रों-परिजनो को भी बुलाया था। उनसे भी मुलाकात हुई। बुड़ाकोटी जी के समूचे परिवार की स्नेहिल मेजबानी में मित्रगणों के साथ शाम का भोजन एक खास अनुभव रहा।

Vishwa pustak mela
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यद्यपि मित्रों के लिए ‘धन्यवाद’ शब्द छोटा है पर दिया जाना चाहिए। जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ जी, सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’ जी, गुसाईं जी, नेगी जी, शर्मा जी सहित समस्त मित्रगणों और परिवारजनो का धन्यवाद। अपनी अतिव्यस्तता के बीच मेले में हमें समय देने और मेरी किताब के लोकार्पण में उपस्थित रहने हेतु गणि भाई का भी विशेष आभार।

मेरी पुस्तक ‘जमन दास ढोली’ के लोकार्पण हेतु मेरे अनुरोध पर अपना सानिध्य देने वाले शूरवीर रावत जी का धन्यवाद। लोकार्पण के बहाने की गई हमारी यात्रा उद्देश्यपूर्ण और सुखद रही। बहन बीना बेंजवाल और रमाकांत बेंजवाल जी का भी शुक्रिया। रमाकांत जी तो इस विश्वपुस्तक मेले की यात्रा के नियोजनकर्ता ही थे। गढ़वाली भाषा के व्याकरण, शब्द कोश और मानकीकरण पर महत्वपूर्ण कार्य करने वाले रमाकान्त बेंजवाल जी हिंदी-गढ़वाली के अच्छे प्रूफ रीडर, बुक पब्लिकेशन, डिजानिंग, प्रिंटिक और मार्केटिंग की भी अच्छी समझ रखते हैं। पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में किताबों की दुनिया से उनका गहरा नाता है। ये बातें तो सभी मित्रगणों को पता है पर वे घुमक्कड़ होने के साथ-साथ यात्राओं के अच्छे नियोनकर्ता, संयोजक, प्रबंधक और कुशल व्यवस्थापक भी हैं, यह बात कम लोगों को पता होगी। विगत में हमने बेंजवाल जी के साथ कतिपय नियोजित और व्यवस्थित यात्राएं की हैं। अस्तु इस यात्रा के बेहतरीन प्रबंधन हेतु बेंजवाल जी का विशेष धन्यवाद।

पुस्‍‍तक मेले और किताब कौथीग नए समय की नई जरूरत हैा यह मेलों और कौथिगों को नए अर्थ देना, उत्‍सव के नए रूपों का निर्धारण और नवीन संस्‍क़ति का निर्माण करना हैा इस प्रकार के मेले कौथीग वैश्विक, राष्ट्रीय, प्रादेशिक और छोटे-छोटे स्थानीय स्तरों पर भी आयोजित होने चाहिए। तेजी से बदलते आधुनिक समय के साथ चलने के लिए ऐसे कतिपय बदलाव बेहद जरूरी हैं।

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