इक्चालिस घंटे मंथन के बाद हासिल पाई शून्य
By – Prem Pancholi
यह कह सकते है कि धामी सरकार का यह अंतिम बजट सत्र होगा। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण की विधानसभा में 41 घंटे 10 मिनट तक चला यह बजट सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है, किंतु सरकार की चुप्पी का कारण जनता में संशय पैदा कर गई। इसलिए कि बड़ा बजट पेश हुआ, पर बड़े भ्रष्टाचार पर सरकार की चुप्पी संदेह पैदा कर गई।
जी हां, इस सत्र से एक और सवाल जनता में खूब चर्चाओं में है कि सदन के अंदर चर्चा के दौरान अधिकांश अमर्यादित भाषा का खूब बोल बाला रहा है जो इस पवित्र संस्था की पीठ को तार तार कर गई। पीठ ने भी ऐसे अमर्यादित भाषा को बोलने वाले माननीयों पर कोई कार्रवाई तक नहीं की, यह भी इस सदन में पहली बार देखने को मिला। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व मंत्री और वर्तमान में नेता सदन यशपाल आर्य जब विधायक मुन्ना सिंह चौहान को यह कहते हैं कि उनकी राजनीति में आने की क्या हैसियत है? वन मंत्री सुबोध उनियाल सदन में अपनी बात रखते वक्त ही “तू तू रे रे” पर आ गए, वरिष्ठ नेता और कई वर्षों से विधायक प्रीतम सिंह सदन में ही पूछने लग गए कि तू शराब पीता है? आदि आदि कई ऐसे अनगर्ल शब्दों का इस्तेमाल सदन की कार्रवाई के वक्त माननीयों ने प्रयोग किए है। यदि नए विधायक कुछ कह भी गए होंगे तो ऐसे में क्या गलत है।
दरअसल उत्तराखंड सरकार ने बजट सत्र 2026-27 में ₹1.11 लाख करोड़ से अधिक का बजट पेश किया है। जिसे महत्वपूर्ण कहा जाना चाहिए। किंतु
बंद हो रहे स्कूलों पर कोई खास निर्णय सामने न आना यह बजट इशारा करता है कि क्या ये बजट ठेकेदारों, कंपनियों की जेबों को भरने के लिए पेश किया गया है। इसे जब जनता अपनी चश्मे से देखती है तो यही कहती है कि सरकार के साथ प्रतिपक्ष ने “मित्र विपक्ष” की भूमिका निभाई है। एक बात जरूर सामने आई कि जब विधायक काजिनिजामुद्दीन ने विधान सभा की कार्य मंत्रणा समिति से अपने को बाहर होने की बात कही कि उन्हें विधानसभा से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने बाकायदा विधानसभा नियमावली को वापस करते हुए कहा कि यहां तो सत्ता जो चाह रही है वही हो रहा है।
मालूम हुआ कि विधानसभा में जितनी समितियां बनाई गई या होती है वे सभी पिछले चार सालों से मृत पड़ी है। जबकि “पब्लिक अकाउंटेबिलिटी कमेटी” अब तक गठित नहीं हुई। दिलचस्प है कि यह पहली सरकार है जिसने पीएसी गठित नहीं की।
यह भी सच है कि विपक्ष ने कुछ विषयों पर सरकार को सदन में घेरने की तैयारी की, मगर वह नक्कारखाने में तूती की आवाज जैसी साबित हुई। इधर सदन में पेश हुई कैग रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के कई और बड़े खुलासे सामने आए, अलबत्ता इस पर सरकार की चुप्पी का कारण साफ दिखाई दिया, की इस भ्रष्टाचार में सत्ता के ही कुछ मगरमच्छ फंसे हुए हैं।
धामी सरकार के अंतिम बजट सत्र के प्रमुख निर्णयों में AI मिशन के लिए ₹25 करोड़, पुलिस आवास हेतु ₹100 करोड़, मेगा इंडस्ट्रियल/टेक्सटाइल नीतियां, स्वरोजगार 2.0, और 51 सीमांत गांवों का विकास शामिल है। इस पर भी पारदर्शी और जीरो टॉलरेंस की सरकार की तस्वीर धुंधली ही दिखाई दी है। इधर यूकेडी जैसे क्षेत्रीय दल ने सदन के बाहर विकास के कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की भरसक कोशिश की थी, पर यह इस बात से नाकाम रही कि सदन के अंदर यूकेडी का एक भी सदस्य नहीं है और बाहर सत्ता ने अपनी सुरक्षा के जो पुलिसिया इंतजाम कर रखा था सो अलग।







