Sunday, September 13, 2026
Home lifestyle जैविक एवं प्राकृतिक खेती में अंतर।

जैविक एवं प्राकृतिक खेती में अंतर।

जैविक एवं प्राकृतिक खेती में अंतर।

Dr. Rajendra Prasad Kuksal

जैविक खेती और प्राकृतिक खेती दोनों ही रसायन मुक्त खेती के तरीके हैं, लेकिन खेती की इन दोनों पद्धतियों में महत्वपूर्ण भिन्नताएं हैं।

1- जैविक खेती में बाहरी चीजों जैसे प्रमाणित बीज, कम्पोस्ट खाद,गोबर की खाद, केंचुए खाद जैविक उर्वरक, जैविक पेस्टीसाइड व अन्य स्वीकृत जैविक आदानों का उपयोग किया जाता है, जबकि प्राकृतिक खेती में बाहरी निवेशों के बिना प्राकृतिक/आध्यात्मिक तरीके से खेती की जाती है प्राकृतिक खेती को शून्य-बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) के रूप में भी जाना जाता है जिसे पद्दमश्री सुभाष पालेकर द्वारा सुझाया गया है।

प्राकृतिक खेती (ZBNF) ज्ञान विज्ञान व आध्यात्म पर आधारित है। ज्ञानेन्द्रिया से प्राप्त जानकारी/ अनुभव ज्ञान हुआ जो घटित हुआ उसे प्रयोग एवं तार्किक तरीके से समझने को विज्ञान कहते हैं ज्ञान एवं विज्ञान की अपनी सीमाएं हैं उससे आगे आध्यात्म। प्रकृति के माध्यम से ईश्वर को/उसकी शक्तियों को पहिचानना या अनुभव करना आध्यात्म है।

प्राकृतिक खेती के मुख्य आधार प्रकृति याने पृथ्वी, वायु मंडल ,जल और सूर्य है । प्रकृति ने जीव जन्तु पेड़ पौधे सभी के जीवन यापन की सुदृढ़ व्यवस्था की है। जंगल में खड़े बड़े बड़े वृक्ष बिना मानवीय सहायता के हरे भरे व स्वस्थ रहते हैं यदि इन वृक्षों की पत्तियों का किसी भी प्रयोग शाला में परीक्षण करवाते हैं तो इन में किसी भी प्रकार से पोषक तत्वों की कोई कमी नहीं मिलती इन वृक्षों ने सारे पोषण तत्व प्रकृति से ही लिये है।पेड़ पौधे 98% अपना भोजन / पोषण हवा पानी व सूर्य के प्रकाश से प्राप्त कर लेते हैं शेष 2 % पोषण अच्छी स्वस्थ भुरभुरी मिट्टी में उपलब्ध जीवाणुओं की सहायता से प्राप्त कर लेते हैं। भारतीय दर्शन / अध्यात्म के अनुसार प्रत्येक जीव का शरीर पंच भूत या पांच तत्वौ से बना है पृथ्वी, आकाश,जल, वायु और अग्नि (सूर्य)।आयु पूर्ण करने पर या नष्ट होने पर फिर इन्हीं पांच तत्वौ में विलीन हो जाते हैं जहां से आया वहीं चला गया इस प्रकार यह खाद्य चक्र चलता रहता है।

प्राकृतिक खेती पद्धति में देशी बीज, देशी गाय का गोबर, गौमूत्र , वनस्पति अर्क का उपयोग होता है तथा मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं, जैसे आच्छादन ( पेड़ पौधों के अवशेष ) जीवामृत के प्रयोग से मिट्टी के सूक्ष्मजीवों और केंचुओं के माध्यम से पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रोत्साहित किया जाता है। जिससे बाहरी आदानों पर निर्भरता शून्य या कम होती है।

2- जैविक खेती में उत्पादों के प्रमाणीकरण हेतु तीसरे पक्ष की आवश्यकता होती है जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी उत्पाद को जैविक रूप से उगाया गया है, संसाधित किया गया है, और प्रमाणित किया गया है। यह एक तृतीय-पक्ष सत्यापन प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि उत्पाद जैविक मानकों का पालन करता है। यदि कोई कृषक / कृषक समूह/उत्पादक अपने जैविक उत्पाद का निर्यात करना चाहता है तो उसे ,कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण ( एपीडा )
Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA) के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

जबकि प्राकृतिक खेती में प्रमाणीकरण इसके लिए किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है इस पद्धति में उत्पादक/ किसान व उपभोक्ता का आपसी विश्वास होता है ।

3- जैविक खेती में पोषण हेतु अधिक मात्रा में जैविक/ जीवांश/ कम्पोस्ट खादों व अन्य निवेशों की आवश्यकता होती है जिससे लागत बहुत अधिक आती है जबकि ज़ीरो बजट प्राकृतिक खेती में जीवामृत, आच्छादन से मिट्टी में उपस्थित जीवाणुओं एवं केंचुओं को सक्रिय कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है जिसमें लागत बहुत कम आती है साथ ही अन्तरवर्तीय फसलें उगा कर याने मुख्य फसल की लागत का मूल्य सह फसल उत्पादन कर निकालने के प्रयास किए जाते हैं।

जैविक खेती एक विशिष्ट प्रणाली है जो रासायनिक आदानों को हटाती है, जबकि प्राकृतिक खेती एक व्यापक दृष्टिकोण है जो ज्ञान विज्ञान प्रकृति व आध्यात्म पर आधारित है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों और प्रक्रियाओं का उपयोग करके खेती की जाती है।

 

लेखक वरिष्ठ उद्यान विशेषज्ञ है।

RELATED ARTICLES

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...