Sunday, September 13, 2026
Home lifestyle नहीं चेते तो हिमालय का क्रोध भारी पड़ेगा।

नहीं चेते तो हिमालय का क्रोध भारी पड़ेगा।

नहीं चेते तो हिमालय का क्रोध भारी पड़ेगा।
—————–

By – Suresh bhai

हिमालय में मानसून के बाद ही बाढ़ और भूस्खलन का प्रभाव दिखाई देता था।लेकिन अब मई के महीने से ही ऐसी भयानक स्थिति पैदा हो रही है कि हिमालय में आ रहे पर्यटकों और यात्रियों को भी बार-बार रोकना पड़ रहा है।गांव में रहने वाले लोग भारी बारिश के चलते रातभर सो नहीं पाते हैं।ऐसी भी सैकड़ों बस्तियां हैं जिनके आसपास विकास के नाम पर चारागाह, जंगल, खेती, पुराने रास्ते, नहरें क्षतिग्रस्त हुये है और वहां से लोग भूस्खलन की डर से सुरक्षित स्थान की तरफ भाग जाते हैं। इस विषम परिस्थिति में गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक तकलीफ में हैं।उन्हें महसूस होता है कि अभिभावक रात के समय में उनकी सुरक्षा के प्रति चिंतित हैं।
नदी और गाड़-गदेरों के पास की आबादी के तो और भी बुरे हाल है।जून प्रारंभ होने से पहले ही नदियां आसमान छूने लगती है।
पुराने समय में हिमालय के पर्वतीय अंचल में जब बरसात प्रारंभ होती थी तो लोग अपने मवेशियों को लेकर जंगल में घास के बीच में छानियां बनाकर निवास करते थे।जहां से वे दूध, घी,मक्खन,बनाकर बेचते थे और उसके बदले उन्हें साल भर की राशन खरीदना होता था। तब उनके चारों ओर आज की जैसी आपदा की स्थिति नहीं थी और बरसात की रिमझिम बारिश में लोगों को अपनी खेती-बाड़ी में बारहनाजा (एक ही खेत में 12 प्रकार की फसल) की फसलें तैयार होती दिखाई देती थी।
हिमालय के नीचे मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी बरसाती मौसम में नदियों में बहकर जाने वाली उपजाऊ मिट्टी, पानी को अच्छी फसल के संकेत मानते थे।
अब वह पुराना समय चला गया है। बरसात शुरू होते ही मौत का तांडव चारों ओर दिखायी देता है।
गत वर्ष 2023- 24 में जिस तरह की बाढ़ मध्य हिमालय से लेकर हिमाचल, जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में 500 से अधिक लोग मारे गए थे।उसकी पुनरावृत्ति सन् 2025 की शुरुआती बरसात मे ही आ गयी है।
बरसात के मौसम का प्रभाव उत्तराखंड और हिमाचल पर सबसे अधिक है। केदारनाथ जाने वाले रुद्रप्रयाग- गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिछले वर्षों से सड़क चौड़ीकरण के बाद दर्जनों डेंजर जोन बने हुये है। जहां पर इस बार भी सोनप्रयाग के पास पहाड़ खिसकने से लगभग 1300 यात्रियों को रेस्क्यू करना पड़ा।
जून के अंत में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलाई बैंड के पास निर्माण कार्य में लगे 18 मज़दूरों में से 9 मजदूर बहकर लापता हो गये थे। जिनकी खोजबीन जारी है। यहां पर बहुत लंबे समय से औजरी, डाबरकोट, कुथनौर, पालीगाड़, सिलाई बैंड, किसाला आदि स्थान भू-धंसाव के लिए संवेदनशील बने हुए हैं। 2023- 24 की बरसात में भी यहां पर लगातार निर्माण का मलवा सड़क पर बहकर आया था। इसके बावजूद भी करोड़ों खर्च करने के बाद इस मार्ग को चौड़ीकरण करने से पहले भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को बचाने के लिए जो वैज्ञानिक उपाय होने चाहिए थे उस पर ध्यान नहीं गया है। जिसके कारण पिछले लंबे समय से हर बरसात में यह स्थान यमुना नदी की तरफ टूट कर बह जाता है। यमुनोत्री आने-जाने वाले तीर्थ यात्री बड़ी मुश्किल से इस भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं। जानकी चट्टी से यमुनोत्री तक 6 किमी के पैदल रास्ते पर भी एक दर्जन ऐसे संवेदनशील स्थान वैज्ञानिकों ने चिन्हित किये हैं जहां भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। इस बार भी यहां पर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।अतः जरूरत है कि बहुत चौड़ी सड़क के स्थान पर जहां से भूस्खलन लगातार हो रहा है उस एरिया तक पहुंच बना करके ट्रीटमेंट करने पर ध्यान देना चाहिए। सड़क मार्ग को इस डेंजर जोन पर अधिक चौड़ा करने की कोशिश करेंगे तो आने- जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर स्याना चट्टी के पास यमुना नदी पर झील बनने का खतरा है। जिस पर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य लगातार नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी यहां भूस्खलन क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया है।गंगा की सहायक नदी अलकनंदा, भागीरथी, भिलंगना, बालगंगा उफान पर हैं, लोग भारी बारिश और बाढ़ का सामना कर रहे हैं।
हिमाचल में पिछले 15 दिनों में लगभग 17 स्थानों पर बादल फटे हैं। जिसका सिलसिला अभी थम नहीं रहा है। अब तक लगभग 100 लोगों की जिंदगी चली गई है और 55 लोग लापता है। लगभग 80 हजार की आबादी पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। हिमालय नीति अभियान के कुल भूषण उपमन्यूं और गुमान सिंह ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि यह इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदी है, जहां व्यास नदी के रौद्र रूप के कारण मंडी में सबसे अधिक नुकसान हुआ है।चंबा, कुल्लू और किन्नौर समेत लगभग 10 जिलों में गंभीर हालात बने हुये है। कुकलाह के पास 16 मेगावाट की एक विद्युत परियोजना भी क्षतिग्रस्त हुई है। लोगों की गौशालाएं,आवासीय भवन, मवेशियां बड़ी संख्या में मलवे में दब गये हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों में दक्षिण- पश्चिम मानसून पहुंचते ही हाहाकार मच गया। ब्रह्मपुत्र समेत 10 नदियां उफान पर है। सिक्किम में भी भूस्खलन से सेना का एक शिविर दब गया जिसमें तीन जवान शहीद हो गए थे और 6 लोग लापता हैं। असम और अरुणाचल प्रदेश में भी 10-10 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। 10 हजार लोग राहत शिविरों में रखे गये।असम और मणिपुर में चार लाख लोग बाढ़ से प्रभावित है।
बाढ़ से प्रभावित लोग महसूस कर रहे हैं कि हिमालय की भौगोलिक संरचना को नजरअंदाज करके जिस तरह से फोर लाइन मार्गो का निर्माण, वनों का कटान, बहु मंजली इमारतें, हिमालय की संवेदनशील धरती के साथ विकास के नाम पर अन्य कहीं तरह की अनियोजित छेड़छाड़, बार-बार भूकंप आना,अनियंत्रित पर्यटन और पंचतारा संस्कृति ने अधिक उपभोग करने की चाह मे संकट पैदा कर दिया है।बाहर से आने वाले तीर्थ यात्री भी बरसात में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे है।
विभिन्न निर्माण कार्यों में प्रयोग होने वाले विस्फोट से मलवा नदियों में एकत्रित होकर भीषण बाढ़ की हालात पैदा कर रहा है। जंगल की आग मिट्टी के ऊपर खड़े पेड़ों व झाड़ियां के सूखने के बाद बरसात में बहने लगती है। निर्माण कार्य में लगी भीमकाय जेसीबी मशीनों ने भी पहाड़ को हिला कर रख दिया है।जो हिमालय की भूगर्भिक बनावट के लिए बहुत ख़तरनाक है। यहां के पर्यावरण और जीवन शैली के अनुरूप विकास की नई रेखा खींचनी होगी और हिमालय पर विकास के नाम पर हो रहे मैदानों के अनुरूप जैसी छेड़- छाड़ को रोका जाए।

RELATED ARTICLES

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...