Sunday, September 13, 2026
Home lifestyle परंपरागत जनजातीय शराब : क़ीमावाणा या कीमौणा (Method for yeast preparation)

परंपरागत जनजातीय शराब : क़ीमावाणा या कीमौणा (Method for yeast preparation)

क़ीमावाणा या कीमौणा (Method for yeast preparation)..

By – Dr. Leela chauhan

“दस्तूर उल अमल एवं वाजिब उल अर्ज 1883 ई0” दो ऐसे पुराने शासकीय दस्तावेज थे जिनका जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर में भूमि सुधार और रीति-रिवाज़ के लिए प्रयोग किया जाता था। यहां के लोग अपने सेवन के लिए सुर (शराब) भी बना सकते थे और जिसमें (लगभग दो लीटर कच्ची शराब) अपने साथ लेकर भी चल सकते थे। यह इन्हीं दस्तावेजों का आधार है।

इसी रीति रिवाजों को मध्यनजर रखते हुए आज भी एक्साइज़ मैनुअल जौनसार बावर के 39 खतों में से सिर्फ एक खत व्यास नहरी (कालसी का आस पास का क्षेत्र) में लागू है। व्यास नहरी में इसलिए लागू था क्योंकि यह हमेशा से बाहरी लोगों का गढ़ रहा है यहां से चीन, तिब्बत के लिए व्यापार होता रहा।

जौनसार- बावर के अधिकतर क्षेत्र में 20 गत्ते भादों (सितंबर) में कीमवाणा त्योहार के रूप मनाया जाता है। कीम मतलब यीस्ट जिसको की शराब बनाने के प्रक्रिया में शुरुआती में डाल दिया जाता है। मानसून के बाद भादों महीने में जब सारी वनस्पतियाँ हरी भरी होती है उस समय समस्त गांववासी जंगल से लगभग बीस पच्चीस प्रकार की हरी पत्तियां,टहनियां, कई प्रकार जड़ें आदि लाते है। फिर इनको छोटे छोटे टुकड़ो में काटकर ओखली में कूटते, उस से निकलने वाले रस को जौ, मड़ुवा आदि के आटे के साथ गूंथा जाता है, इसकी मोटी-मोटी रोटी बनाकर अंधेरे कमरे में पराल, चीड़ की पतियाँ या भांग पत्तियों के अंदर सुखाने के लिए बंद और अंधेरे कमरे में रख दी जाती है। आठ से दस दिन के दौरान यीस्ट डेवलप हो जाता। उसको धूप में सुखाया जाता है, ताकि ख़राब न हो और इसका इस्तेमाल पूरे साल भर सकें ।

सुर बनाने की दो विधियाँ है। एक वाष्पीकरण (distillation), बिना वाष्पीकरण जिसको गिंगठी और पाकोई कहते है।

शराब बनाने के लिए मँड़ुवा, चौलाई, जौ आदि के आटे से रोटी बनाई जाती है। इसको बड़े घड़े में पानी में डाल देते है। साथ में बनाई गई कीम (यीस्ट) मिला देते है। उपलब्धता के अनुसार शहद का छत्ता, गुड़, कद्दू, सेब, चुल्लू आदि को भी मिला दिया जाता है। कीम (Yeast work as a catalyst) जिसका मुख्य कार्य कार्बोहाइड्रट को तेज केमिकल रिएक्शन के साथ ब्रेक करके एल्कोहल एवं कार्बन डाइआक्साइड में कन्वर्ट कर देना होता, चार पाँच दिन की प्रक्रिया के बाद अगर उसका वाष्पीकरण (distillation) कर के ऐल्कहॉल को अलग करते है उसको लोकल भाषा में सुर (शराब) कहते है जिसमें एल्कोहल की मात्रा लगभग 35 से 40 प्रतिशत होती है। अगर इसी को 10-15 दिन तक बंद घड़े में रख देते है और बीच-बीच में हिलाते है तो इसको गिंगटी कहते यह मुख्यत Semi liquid होता है। अगर इसी को आगे तीन चार महीने के लिए घड़े में बंद कर देते उसके बाद (Sedimentation process) के तहत अधिकतर ठोस पदार्थ नीचे बैठ जाता है और क्लीन द्रव ऊपर रहता उसको अलग कर देते है जिसे की पाकोई कहते है।

गिंगटी और पाकोई अक्सर शरीर के लिए लाभदयक मानी जाती थी। हालांकि इसका कोई प्रमाणिक स्रोत नहीं है। इसमें एल्कोहल की मात्रा लगभग 12- 15 प्रतिशत होती है। जो विभिन्न प्रकार की शुद्ध जड़ी बूटी से तैयार होती है। मान्यताओं के अनुसार इसके कई फ़ायदे भी बताए जाते है। क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान जब ना के बराबर थी तब यह निश्चित मात्रा में दवाई के रूप में भी प्रयोग की जाती थी। यह वीडियो इसी कीमवाणा का है जिसमें समस्त गांववासी मिलकर बड़े हर्ष उल्लास से इस कार्य को एक त्योहार के रूप में मना रहे है। इसका सेवन महिलाएं भी करती है खासकर शादियों में महिलाओं को बड़ी आन बान शान से परोसी जाती है।।।

नोट:- शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तथा समाज के लिए एक अभिशाप है लेकिन पोस्ट लिखने का एक कारण यह है कि इसकी प्राचीन,प्राकृतिक तथा केमिकल मुक्त विधि को जान सकें। साथ ही मेडिकल साइंस में भी कई दवाइयां, इंजेक्शन एल्कोहल युक्त रहते हैं इसलिए इस विधि से निकले द्रव्य को यदि बीमारियों के उपचारों हेतु उपयोग किया जाता था तब उन जड़ी, बूटियों पर भी शोध की आवश्यकता है।

(डॉ लीला चौहान सरकारी अधिकारी और अध्येता है)

RELATED ARTICLES

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...