Tuesday, July 28, 2026
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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से आहत पिथौरागढ़ की जनता। उत्तरी सड़कों पर। पढ़े, मामला क्या है

By – Charu tiwari

उत्तराखंड में महिलाओं के प्रति अपराध और उच्च न्यायालय से फांसी की सजा पाए अपराधी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किए जाने से लोगों में भारी आक्रोश है।

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने पिथौरागढ़ में लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। लोग इस फैसले से कितने आहत हुए उसे पिथौरागढ़ की सड़कों पर स्वत: स्फूर्त उमड़े जन सैलाब से समझा जा सकता है। इस तरह के फैसले ने एक मासूम के साथ अन्याय की ऐसी काली कहानी लिखी जो किसी भी तरह भी सहन करने योग्य नहीं हो सकती।

यह फैसला ऐसे समय पर आया जब 18 सितंबर, 2025 को अंकिता हत्याकांड की बरसी होने जा रही है।

पिथौरागढ़ की जिस मासूम बच्ची के हत्यारे के बरी होने का फैसला आया वह घटना नवंबर 2014 की है। पिथौरागढ़ से एक परिवार काठगोदाम में एक शादी मे शामिल होने आया था। उनके साथ यह मासूम भी थी, जो अचानक गायब हो गई। 25 नवंबर को उसकी खून से लतपथ लाश जंगल में मिली। इस जघन्य हत्याकांड के आरोपियों पर अपहरण, बलात्कार और हत्या की धाराओं पर अपराध पंजीकृत हुआ। इनमें से एक अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई गई। एक को पांच साल की सजा सुनाई गई और एक आरोपी को बरी कर दिया गया। उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई तो उसने पाक्सो कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के फैसले को बदलकर फांसी की सजा पाए अभियुक्त को बरी कर दिया। इस फैसले से लोग सन्न रह गए। पीड़ित के परिजनों का कहना है कि उन्हें इस बात का पता भी नहीं चला कि सुप्रीम कोर्ट में अपील कब हुई। अब यह बात साफ हो गई है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार की कमजोर पैरवी के चलते मासूम के साथ अन्याय हुआ है।

दिल्ली में पहाड़ की बेटी किरन नेगी के साथ भी यही हुआ था, उसके अपराधियों को कमजोर पैरवी के चलते सुप्रीम कोर्ट से बरी कर दिया गया था। तब यह सवाल उठाया गया कि किरन की हत्या हुई है, यह तो सत्य है, अगर यह हत्या इन अभियुक्तों ने नहीं की तो उस अपराधी को खोजने की जिम्मेदारी भी पुलिस-प्रशासन की थी। यही सवाल आज लोग चीख-चीख कर पूछ रहे हैं कि पिथौरागढ़ की इस मासूम का हत्यारा अगर सजा पाया दरिंदा नहीं है, तो कौन है?

बच्ची की हत्या तो हुई है, इसमें तो कोई शक नहीं है! अभियुक्त पकड़े गए, उन्हें सजाएं भी हुई। पाक्सो और उच्च न्यायालय ने उन्हें सजा भी दी है। तो फिर सुप्रीम कोर्ट में ऐसा क्या हो गया कि अभियुक्त बरी हो गया? न्यायालय, प्रशासन, पुलिस या सरकार के पास इस बात का कोई जबाव होगा कि फिर बच्ची का हत्यारा कौन है?

लेखक का व्यक्तिगत विचार

इन सवालों का जबाव चाहने के लिए हम सब पिथौरागढ़ की सड़कों पर उतरी जनता के साथ हैं। हम सब उन लोगों के साथ हैं जो हल्द्वानी में रैली कर इसे उठा रहे हैं। उन लोगों के साथ भी जो पिथौरागढ़ से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर बच्ची को न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

@फोटो साभार सोशल मीडिया

@लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

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