Tuesday, July 28, 2026
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एक IAS अधिकारी का यूं तबादला होना? पढ़े वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र नेगी का यह संस्मरण

काश आपका जैसा जिद्दी डीएम कुछ दिन और रहता!
आज उत्तराखंड सरकार ने 44 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए। अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव एक रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी प्रक्रिया में 2013 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी वंदना सिंह जी। जो 17 मई 2023 से नैनीताल जिले की डीएम थीं। उनका भी ट्रांसफर हुआ है। वंदना तकरीबन ढाई साल तक नैनीताल की जिलाधिकारी रहीं। जैसे हर जिलाधिकारी के काम की समीक्षा होती है ठीक वैसे ही इतिहास उनके नैनीताल जिले में किए कामों की भी समीक्षा करेगा। और ये काम कोई और नहीं बल्कि पत्रकार करते हैं। क्योंकि इतिहासकारों की कलमें बाद में चलती हैं।


नैनीताल जिले में तकरीबन ढाई साल के कार्यकाल में वंदना जी ने जो काम किए उसके लिए नैनीताल जिला उन्हें हमेशा याद रखेगा। क्योंकि उन्होंने ना सिर्फ भू माफियाओं पर कड़ा शिकंजा कसा बल्कि उनसे कानूनी लड़ाई को भी तेज किय़ा। वो फिर बनभूलपुरा में मलिक के बगीचे में हुई कार्रवाई हो या अन्य तरह के बगीचों में हुई कार्रवाई। या फिर मामला इंतजार हुसैन और नजाकत हुसैन की बरेली रोड में जबरन कब्जाई गई 64 बीघा जमीन हो। ये ऐसे मसले थे जिन पर पिछले जिलाधिकारियों ने कोई रुचि नहीं ली। या कहना चाहिए कोई हिम्मत नहीं दिखाई। लेकिन वंदना ने ऐसा नहीं किया। वंदना में एक अधिकारी की हनक और काम करने की ललक दोनों हैं। और इसी का नतीजा है कि कई अवैध कब्जे मुक्त हुए। सरकारी जमीनों पर खरीद-फरोख्त पर सख्ती से रोक लगी। इंतजार हुसैन और नजाकत हुसैन के कब्जे वाली जमीन पर कानूनी पैरवी बहुत तेजी से चल रही है। अगर नए जिलाधिकारी किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आए तो हल्द्वानी की बेशकमीती 64 बीघा सरकारी जमीन कोई नहीं ले सकता।
जिलाधिकारी वंदना जी को विशेषकर हल्द्वानी शहर की तस्वीर बदलने के लिए याद रखा जाएगा। काठगोदाम से लेकर मंगलपड़ाव और कालाढूंगी चौराहे से लेकर कमलुवागांजा, लामाचौड़, कठघरिया तक जो जाम नासूर बना रहता था उसके समाधान के लिए उन्होंने सख्त कदम उठाए।
सत्तारूढ़ दल के कुछ ताकतकवर नेता मुख्यमंत्री जी से वंदना जी की शिकायत करते रहे। इसीलिए उन्होंने बड़े-बड़े राजनीतिक दबाव झेले। लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों को कोई राहत नहीं दी। इसी का नतीजा है कि आज हल्द्वानी शहर की पूरी तस्वीर बदली हुई दिख रही है। हमें काठगोदाम, कालाढूंगी, लामाचौ़ड़, कठघरिया, कुसुमखेड़ा, सारे चौराहे चौड़े नजर आ रहे हैं। बरसाती नालों से शहर को बचाने लिए भी आपने अच्छे काम किए। इसी के साथ हल्दूचौड़ में 60 बीघा जमीन कब्जामुक्त कराकर उसमें निराश्रित गौवंश के लिए भव्य गौशाला का निर्माण, नैनीताल के सौंदर्यीकरण जिसमें तल्लीताल में सुंदर गांधी चौक, शत्रु संपत्तियों पर कब्जे हटाने, नई पार्किंग विकसित करने संबंधी ऐतिहासिक काम भी आपने किए। कैंची बाइपास के काम में आपने जो तेजी दिखाई, काठगोदाम से भीमताल तिराके चौड़ीकरण की जो कार्ययोजना आपने तैयार की है उसके परिणाम भविष्य में लोगों को दिखेंगे।
हालांकि अतिक्रमण पर कुछ काम अभी बाकी था। क्या कहना चाहिए कि ताबूत में अंतिम कील ठोकना बाकी था। कुछ महीने आप और रहतीं तो अतिक्रमण और जाम की ये बाधाएं भी दूर हो जाती। जैसे बाजार क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे ओके होटल समेत कुछ अन्य दुकानदारों से कानूनी लड़ाई। इसी तरह बाजार क्षेत्र में ही सिंधी चौराहे से सुशीला तिवारी अस्पताल को जाने वाली रोड पर बना बॉटल नेक, मुखानी, सेंट्रल हॉस्पिटल चौराहों का पर चौड़ीकरण, शनिबाजार क्षेत्र में रोड का चौड़ीकरण ये ऐसे काम थे जो आपकी जैसी जिद्दी डीएम के रहते हो जाता तो अच्छा था।
खैर ये नौकरी है सबको जाना है। लेकिन मैं लिख दूं कि आप जैसा ना भूत में आया था और ना भविष्य में आएगा तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। भले ही कुछ पत्रकार और नेता आपसे इसलिए नाराज रहे हों कि आप पिछले जिलाधिकारियों की तरह चाय, पानी, बिस्कुट, लड्डू नहीं पूछती हैं। उनके बताए गन लाइसेंस नहीं बनाती हैं। उनके बताए गलत काम नहीं करती हैं। लेकिन आपने जनता और नैनीताल जिले के भविष्य के लिए जो किया उसके आगे सब माफ है। मुझे आपके सबसे अच्छी बात ही ये लगती थी कि आप इंसान के चरित्र को भांपकर कार्य करती थीं। साथ ही आपके विकास से जुड़े फैसले बिना स्थानीय राजनीतिक दबाव के लिए गए। आप एक जिद्दी डीएम रहीं। वंदना जी मैं आपको इसी रूप में याद रखूंगा।


खैर आपको भविष्य की ढेरों शुभकामनाएं। मुझे उम्मीद ही नहीं पूर्ण भरोसा है कि जिले के नए जिलाधिकारी आपके अधूरे छोड़े कामों को अधूरा नहीं छोड़ेंगे। इन कामों को यहीं से आगे ले जाएंगे। और एक नई इबारत लिखेंगे।
नोट: जिलाधिकारी वंदना जी से उनके ढाई साल के कार्यकाल में ना मैंने कोई निजी काम करने का आग्रह किया और ना उन्होंने किया। हां मैंने जब-जब भी जनसमस्याएं उनके सामने रखी उन्होंने उनका 24 घंटे में समाधान किया। शायद इसीलिए वो मुझे प्रिय थीं और रहेंगी।

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