Sunday, September 13, 2026
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देश में चिकित्सा विज्ञान के पहले पी एच डी. प्रो देश बंधु बिष्ट।

देश में चिकित्सा विज्ञान के पहले पी एच डी. प्रो देश बंधु बिष्ट।

By – Dr Yogesh dhasmana

भारत ही नहीं समूचे विश्व को नमक में आयोडीन की विधि की खोज करने वाले और मेडिकल साइंस में पहले कार्डियोलॉजी के साथ मैडिसन में डबल पी एच. डी करने वाले प्रो० देशबंधु बिष्ट का संबंध गढ़वाल जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के बंगार गांव से है। डॉ० गिरीश बहुगुणा के अनुसार इनका जन्म कराची आज के पाकिस्तान शहर में हुआ था। जहां इनके पिता किसी निजी संस्थान में कार्यरत थे।

कुशाग्र बुद्धि और विलक्षण प्रतिभा के धनी देशबंधु बिष्ट का जन्म 1927 में हुआ था। गांव की प्राइमरी स्कूल, फिर पौड़ी मिशन स्कूल ओर इलाहाबाद से शिक्षा ग्रहण करने के बाद देश के प्रतिष्ठित कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस परीक्षा पास करने के बाद इसी कॉलेज से कार्डियोलोजी में पीएचडी करने वाले पहले छात्र बनने का गौरव भी उन्हें प्राप्त हुआ था। इस तरह 1959 से उन्होंने पांडिचेरी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में लगातार 25 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया।

विश्व में अपने शोध पत्रों ओर कार्यों से पहचान बनाने वाले प्रो. बिष्ट को भारत सरकार ने देश के पहले राष्ट्रीय अध्यापन प्रशिक्षण संस्थान का निदेशक बनाया।

चिकित्सा विज्ञान में नित नई खोज तथा प्रशासनिक क्षमताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें दिल्ली में एम्स का भी निदेशक बनाया।

इससे पूर्व उनकी शोध दृष्टि को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं सी वी रमन संस्थान द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। भारत में उनके स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धि को देखते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उन्हें सरकारी सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद भारत देश का कंट्री हेड बना कर जो सम्मान दिया, उस स्तर तक पहाड़ की कोई प्रतिभा नहीं पहुंच सकी है।

प्रो० देशबंधु ने अपने प्रारंभिक जीवन में 10 से अधिक मेडल स्कॉलरशिप प्राप्त किए थे। पांडिचेरी में प्रोफसर बनने से पूर्व इन्होंने कलकत्ता, लखनऊ, लुधियाना मेडिकल कॉलेजों में भी अध्यापन का कार्य किया।

प्रो० देशबंधु बिष्ट की आयुष विज्ञान विषय में खास रुचि थी।उन्होंने विज्ञान की विशेषकर टेक्सोलॉजी पर कुछ पुस्तकों का भी प्रकाशन किया। विलेगटन अस्पताल दिल्ली में आधुनिक उपकरणों से लैस पहली कोनोनेरी केयर यूनिट की स्थापना भी उनके प्रयासों से ही संभव हुई थी। नमक को आयोडाइज्ड बनाने की खोज आपके मौलिक चिंतन की खोज माना जाता हैं। बनारस, अलीगढ़ विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सालयों और यूजीसी द्वारा नियुक्त स्पेशल कमीशन के आप अध्यक्ष रहे।

आपकी प्रसिद्ध कृति बेसिक प्रिंसिपल ऑफ मेडिकल रिसर्च पुस्तक मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा पुरस्कृत है। अपने अध्ययन काल में आप नेताजी सुभाष चंद्र बोस वालीएंटियर ब्रिगेड में सार्जेंट मेजर रह चुके थे। इसी क्रम में 1952 में गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर आपको सम्मानित किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रो० बिष्ट प्रारंभ से ही कुष्ठ रोग निवारण हेतु अनेक संगठनों के साथ निस्वार्थ सेवा प्रदान करते रहे। इसके चलते विश्व के अनेक देशों ने उन्हें टीबी ओर कुष्ठ रोग नियंत्रण कार्यक्रम का ज्वाइंट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर भी बनाया था।

जीवन के अंतिम वर्षों में उनकी रुचि दर्शन और अध्यात्म की ओर हो गई थी। पांडिचेरी में रहते हुए डॉ० देशबंधु महर्षि अरविंदो सोसायटी से जुड़कर अपनी सेवाएं देते रहे। अरविंदो और माताश्री के कार्यों से उनका जुड़ाव जीवन के अंतिम वर्षों तक बना रहा। जीवन के अंतिम वर्ष तक देशबंधु अध्यात्मवाद की प्रख्यात संस्था श्रीअरविंद इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फार इंटीग्रल हेल्थ एंड रिसर्च के अध्यक्ष रहे।

एक यादगार शख्सियत की कहानी 16 अप्रैल 2009 को पांडिचेरी के इसी आश्रम में समाप्त हुई। उनकी पत्नी श्रीमती प्रभा आज 90 वर्ष की आयु में नोएडा में अपनी पुत्रियों के साथ रह रही हैं।

दुर्भाग्य और हैरत की बात देखिए कि वर्तमान शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्री डॉ० धन सिंह रावत इन्हीं के इलाके से संबंध रखते है। पर सरकार में मुख्य भूमिका में रहते डा० धन सिंह प्रो० देश बंधु को जानते तक नहीं है। दिलचस्प यह है कि 1994 में कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रो० देशबंधु बिष्ट को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया मगर गढ़वाल विश्वविद्यालय उन्हें जानता तक नहीं है।

प्रश्न है कि हमारी कृतघ्नहीन सरकार राज्य में प्रो० देशबंधु के कद के अनुरूप कोई स्वास्थ्य पारी योजना का निर्माण करने के साथ ही, राज्य के मेडिकल कॉलेज में उनके नाम की चियर स्थापित कर व्याख्यानमाला श्रृंखला का आयोजन कर सकती है? यदि सरकार ऐसा करती है तो यह प्रो० बिष्ट के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस आलेख के लेखक तीन बार प्रो० बिष्ट से मिले। पहली बार जब वह पौड़ी एजेंसी स्थित नरेंद्र भवन में डॉ आलम सिंह के पैतृक भवन में अपनी ससुराल आए थे। दूसरी बार पत्रकार योगेंद्र सिंह भंडारी के घर पर पत्रकार उमेश डोभाल के संग उनसे बातचीत करने का अवसर मिला था। तीसरी बार उनके साले प्रसिद्ध फोटोग्राफर धीरेन्द्र रावत के पुत्र के विवाह के अवसर पर, जब वे सपरिवार पौड़ी आए थे।

एक बातचीत में उनका स्पष्ट कहना था कि कि जब तक गांव में हम डॉक्टर्स के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं सुलभ करते, तब तक उन्हें पहाड़ पर नौकरी के लिए भेजना संभव नहीं होगा।पहाड़ के प्रति उनकी यह चिंता आज भी नीति नियंताओं के सामने यक्ष प्रश्न बन कर खड़ी है।

पाठकों के लिए बहुत मुश्किल से उनका एक फोटो प्रशांत नेगी के सहयोग से मिला। एक अन्य फोटो उनके गांव के पैतृक भवन का भी मिला है। पाठकों से अनुरोध है कि पहाड़ की इस दुर्लभ विभूति को उचित सम्मान दिलाने में सहयोग करे।

खास बात यह है कि डॉ० देशबंधु ने अपने ससुर डॉ आलम सिंह की स्मृति में पौड़ी स्थित गढ़वाल विश्वविद्यालय परिसर में मेधावी छात्रों के लिए प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति योजना की भी शुरुवात की है जो अभी तक निरंतर जारी है।

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