बौखनाग देवता के सानिध्य में हुआ बड़कोट शादोत्सव का शुभारंभ। श्री कोशियारी लौटे वापस।
By – Prem Pancholi
यह पहली बार हुआ जब बड़कोट नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित सात दिवसीय शरदोत्सव (रवांई शरदोत्सव, संस्कृति, पर्यटन एवं विकास मेला) का उद्घाटन बौख नाग देवता के मुख्य पुजारी ने किया हो। साथ में क्षेत्र की अन्य देव डोलियां भी इस मेले के उद्घाटन में मौजूद रही। क्षेत्रीय देवताओं ने अध्यक्ष नगर पालिका परिषद विनोद डोभाल को मेला संपन्न करने का आशीर्वाद दिया और देवताओं ने यह भी कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास कार्यों में साथ आना होगा।
उल्लेखनीय हो कि आम तौर पर किसी भी सरकारी आयोजन का उद्घाटन कोई न कोई प्रमुख जनप्रतिनिधि करते है। मगर इस बार बड़कोट शरदोत्सव का उद्घाटन आराध्य देव बौखनाग देवता ने किया है। हालांकि इस आयोजन में क्षेत्रीय देवताओं का आशीर्वाद लेना अनिवार्य था ही मगर यह तब हुआ जब स्थानीय राजनीतिक दलों के कुछ खास कार्यकर्ताओं को यह बात हजम नहीं हुई कि निर्दलीय जनप्रतिनिधि के नेतृत्व में आयोजित शरदोत्सव का उद्घाटन सत्ता के कोई प्रतिनिधि कैसे कर सकते है। बताया गया कि सत्ता के नजदीकी कुछ कार्यकर्ताओं ने अपने आकाओं को यह धमकी दे डाली कि यदि बड़कोट शरदोत्सव का उद्घाटन सत्ता का कोई प्रमुख व्यक्ति कर देगा तो वे आगामी चुनाव में भीतरघात कर सकते है। इस संभावनाओं को देखते हुए सत्ता के नजदीकी जनप्रतिनिधि इस शरदोत्सव के उद्घाटन करने नहीं पहुंचे। जबकि शरदोत्सव की पूर्व संध्या में महाराष्ट्र, गोवा के राज्यपाल रहे और पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा के शीर्ष नेता भगत सिंह कोशियारी “हमारे नायक” सम्मान समारोह में बड़कोट पहुंच चुके थे। यही नहीं श्री कोशियारी का प्रोटोकॉल भी इसी तरह से था कि वे 27 नवंबर को बड़कोट शरदोत्सव का उद्घाटन करेंगे। पर सत्ताधारी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के कारण श्री कोशियारी को वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय लोगों में यह रोष व्याप्त है कि जब सत्ता के शीर्ष नेतृत्व सामने पहुंच चुके थे तो यह व्यवहार सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं का क्षेत्र के प्रति अच्छा नहीं है। लोगो का यह भी कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंदिता अवश्य हो, पर बदले की भावना से कोई राजनीति करे यह क्षेत्र विकास के लिए अशुभ कहा जाएगा। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता का कोई भी प्रमुख व्यक्ति यदि किसी सामाजिक समारोह में मौजूद रहते है तो उसका फायदा क्षेत्र विकास के काम आता है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि इन कार्यकर्ताओं ने श्री कोशियारी को वापस लौटाया है तो कार्यक्रम का शुभारंभ आराध्य देव बौखनाग ने कर दिया।
बता दें कि इस तरह की संकीर्ण राजनीति से किसका फायदा और किसका नुकसान हो रहा है जिसे जनता देख रही है। निजी स्वार्थ के कारण इस तरह की राजनीति क्षेत्र विकास में रोड़ा जैसे दिखाई दे रही है। प्रश्न यह है कि क्षेत्र विकास के लिए जब तक स्थानीय राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता एक साथ नहीं आएंगे तब तक विकास के कार्यों में बाधाएं आती रहेगी।

बड़कोट नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष विनोद डोभाल ने बताया कि उन्होंने स्थानीयता को इस आयोजन (रवांई शरदोत्सव, संस्कृति, पर्यटन एवं विकास मेला) में प्रमुखता दी है। यहां लगभग सभी सुविधाएं स्थानीय स्तर से जुटाई गई है। उन्होंने कहा कि सात दिन तक जो भी सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे उन्हें अंतर सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत प्रस्तुत किया जा रहा है। जहां स्थानीय लोक कलाकार मंच पर होंगे वहां अन्य बाहर के लोक कलाकार भी शरदोत्सव के मंच पर होंगे। इसका फायदा यह होगा कि लोग सभी संस्कृतियों से रूबरू होंगे तो कलाकार भी एक दूसरे की प्रस्तुति से वाकिफ होंगे। उन्होंने क्षेत्र की जनता से अपील की है कि वे इस आयोजन को देखने अवश्य आएं। जिनका वे तहदिल से स्वागत करेंगे।







