Thursday, May 14, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और अन्य राष्ट्रपतियों के बारे राय रखते वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुशवाह।

अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के तौर पर अपना दूसरा और आखिरी कार्यकाल खत्म करने जा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बारे में साल 2017 में किसी हिंदी अखबार के आखिरी पन्ने पर एक छोटी सी खबर पढ़ी कि उन्होंने राष्ट्रपति पद से हटने के बाद निजी कार्यक्रमों में भाषण के लिए कीमत तय की है।

बहुत छोटी खबर थी कुछ भी ज्यादा विवरण नहीं था क्योंकि हिन्दी अखबार हमेशा मानते रहे हैं कि हिंदी पाठकों के लिए विदेश मतलब सिर्फ पाकिस्तान के बारे में ज्यादा पढ़ना जानना है बाकी दुनिया के बारे में हिंदी पाठक कुछ जानने के हकदार नहीं। खैर, यह छोटी खबर दिमाग में अब तक बनी रही। बीते दिनों यूं ही कोशिश की कि राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भाषण का पैसा क्योंकर लेगा। ऐसे ही बीते दिनों गूगल पर टटोलना शुरू किया तो पता चला कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा किसी कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए 3 करोड़ रूपए से भी ज्यादा की फीस लेते हैं।

इतिहास में देखे तो अमेरिका में यह सामान्य है। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद उन्हें कोई विशेष सुविधाएं नहीं मिलती है लेकिन वह सार्वजनिक जीवन में बने रहते हैं, वह बड़े बड़े कॉरपोरेट कार्यक्रमों में मोटी फीस लेकर हिस्सा लेते हैं, इवेंट को संबोधित करते हैं।

सिर्फ बराक ओबामा ही नहीं पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, जॉर्ज बुश समेत सभी पूर्व राष्ट्रपति पद से हटने के बाद निजी सम्मेलनों को संबोधित कर मोटी कमाई करते रहे। हालांकि, इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर के बारे में बताया जाता है कि वह व्यावसायिक भाषणों से दूर रहे बजाए उन्होंने मानवाधिकार और सामाजिक कार्यों में ध्यान दिया और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। आखिर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपतियों को एक अदद भाषण देने के लिए इतनी बड़ी कीमत क्यों दी जाती है। अमेरिका दुनिया का शक्तिशाली देश होने के साथ ही दुनिया की राजनीति, भूगोल, अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालता है तो लाजमी है जो इस देश का नेतृत्व करेगा वह इन सभी अनुभवों को अर्जित कर चुका होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति की पहचान और उसका वैश्विक प्रभाव बहुत गहरा होता है। ऐसे में उनकी राय, उनके विचार, उनके सुझाव को बेहद मूल्यवान तो माना ही जाता है, साथ ही यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि आर्थिक रूप से महाशक्ति अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में फंड को अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा परदर्शिता बरती जाती है और पूरे चुनाव में फंड जुटाना भी एक अति महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधि मानी जाती है।

ऐसा नहीं है कि भारत में भी पूर्व प्रधानमंत्री या राष्ट्रपतियों को इस तरह का सम्मान नहीं मिलता लेकिन भारतीय राजनीति की जो तासीर है उसमें नेता एक तो रिटायर होना पसंद नहीं करता दूसरा वह धन का सार्वजनिक प्रदर्शन करने से झिझकता है, वह नहीं बताएगा कि फंला निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए उसे कितनी रकम का भुगतान हुआ। यहां सब कुछ ब्लैक एंड व्हाइट है।

अनुभवी यहां के (भारत) राष्ट्रप्रमुख भी होते हैं लेकिन कुछ विषय विशेषज्ञ नेताओं को छोड़ बाकी किसी मामले में कोई गहरी समझ का प्रदर्शन नहीं करते जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वह वाकई किसी विषय पर इतनी विद्वता रखते हैं कि उन पर इतनी बड़ी रकम खर्च कर उन्हें ब्रांड के तौर पर बुलाया जाए।

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