Saturday, September 12, 2026
Home lifestyle प्रसिद्ध विज्ञान लेखक देवेंद्र मेवाड़ी की यायावरी पर चर्चा

प्रसिद्ध विज्ञान लेखक देवेंद्र मेवाड़ी की यायावरी पर चर्चा

समय विशेष के रचनाकारों के साहित्यिक परिवेश व सम्बन्धों को उजागर करती है ‘यायावर की यादें ‘

By – Chandra shekhar

दून पुस्तकालय, देहरादून की ओर से में वरिष्ठ लेखक देवेन्द्र मेवाड़ी की संस्मरणों की पुस्तक ‘यायावर की यादें’ का लोकार्पण किया गया। केन्द्र के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान प्राप्त प्रसिद्ध कथाकार डॉ.जितेन ठाकुर, डॉ.नवीन नैथानी तथा श्री राजेश सकलानी ने पुस्तक पर अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं का मानना था कि सम्भवतः इस पुस्तक में पहली बार नामचीन साहित्यकारों, प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, फिल्मकार, विज्ञान कथाकार और विज्ञान लेखकों जैसे विविध व्यक्तित्वों को एक साथ प्रस्तुत किया है। इन व्यक्तित्वों की बहुरंगी विविधता ने ही पुस्तक को बहुत रोचक और पठनीय बना दिया है।

जाने-माने कवि व समालोचक राजेश सकलानी का कहना था कि देवेन्द्र मेवाड़ी जनता के लेखक हैं। वे लोगों से संवाद बनाए रखने में विश्वास रखते हैं । यह बात उनकी लिखावट को प्रयोजनशील और बोधगम्य बनाती है।”यायावर की यादें “मेरे विचार से एक ज़रूरी पुस्तक है। इस से हमें विज्ञान लेखन का महत्व समझ में आता है।जो आज तक समाज में लोकप्रिय नहीं हो पाया। मेवाड़ी जी साठ से अधिक वर्षों से विज्ञान लेखन करते आ रहें हैं। वे हिन्दी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित लेखकों में शामिल हैं। देश के नामी विज्ञान लेखकों और उनकी पुस्तकों के बारे में रोचक ढंग से इसमें बताया गया है।विद्यार्थियों और अन्य जिज्ञासुओं के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण लेखन है। कुछ प्रसिद्ध साहित्यकार व कलाकार इस पुस्तक में याद किए गए हैं।

ननवीन नैथानी ने देवेन्द्र मेवाड़ी की इस पुस्तक को बहुत दिलचस्प बताते हुए कहा कि इसमें उन्नीस सौ साठ के दशक से वर्तमान समय तक के कई नामचीन रचनाकारों की साहित्यिक यात्रा तथा उनके ऐतिहासिक परिदृश्य को संजीदगी से रेखांकित किया। गया है । वर्तमान समय में यह पुस्तक एक वर्तमान साहित्यिक दस्तावेज के तौर पर पाठकों के समक्ष आई है. इसका स्वागत किया जाना चाहिए.

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ.जितेन ठाकुर ने कहा यह पुस्तक बहुत रोचक है और एक समय विशेष के लेखकीय संबंधों को बहुत प्रामाणिकता के साथ उजागर करती है।समय और व्यक्ति मिल कर कैसे जीवन का निर्माण करते हैं और कैसे स्मृतियों में दर्ज होकर संस्मरण का स्वरूप ले लेते हैं ,यह इस पुस्तक से अच्छी तरह समझा जा सकता है।

पुस्तक के लेखक देवेन्द्र मेवाड़ी ने कहा कि उनकी इस पुस्तक के सभी संस्मरण अब तक की जीवन-यात्रा में उन्हें मिले अविस्मरणीय व्यक्तियों से जुड़ी यादें हैं। इसे उनके जीवन की यायावरी की यादावरी कह सकते हैं। इसमें भीष्म साहनी और शैलेश मटियानी जैसे दिग्गज कथाकारों के संग-साथ की स्मृतियां हैं तो वीरेन डंगवाल तथा गिर्दा जैसे कवि, प्रोफेसर यशपाल, डॉ.एपीजे कलाम और डॉ. खड्ग सिंह वल्दिया जैसे वैज्ञानिक, विज्ञान कथाकार कैलाश साह, फिल्मकार अरुण कौल, विज्ञान लेखक गुणाकर मुले, रमेश दत्त शर्मा और प्रेमानंद चंदोला के साथ ही कलाकार-कवि सईद शेख भी है।

कार्यक्रम का संचालन दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने किया।

कार्यक्रम के अन्तिम दौर में सभागार में उपस्थित लोगों ने लेखक देवेन्द्र मेवाडी से पहाड़ की तमाम यादों को समेटते हुए उनके लेखन से जुड़े सवाल – जबाब भी किये.

कार्यक्रम के दौरान इब्बार रबी, राजीव नयन बहुगुणा, कल्याण सिंह रावत मैती, कांता डंगवाल, सुनीता मलेथा, मोहन चौहान, अरविन्द शेखर, कल्याण बुटोला, राजेन्द्र गुप्ता, राकेश भट्ट, आलोक सरीन, कुंवर राज अस्थाना, विभूति भूषण भट्ट, मधन सिंह, जगदीश सिंह महर, निकोलस हॉफलैण्ड सहितशहर के अनेक साहित्यकार, लेखक पाठक, साहित्य प्रेमी और अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे. अन्त में कार्यक्रम के अतिथि वक्ताओं सहित सभी उपस्थित लोगों के प्रति निकोलस ने आभार व्यक्त किया ।

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