Sunday, September 13, 2026
Home विविध नहीं रहे पहाड़ के दो धरती पुत्र। अपूरणीय क्षति

नहीं रहे पहाड़ के दो धरती पुत्र। अपूरणीय क्षति

4 दिसंबर 2023 को सकल चांद रावत और 8 दिसंबर 2023 को मोहन सिंह रावत गांववासी इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं। दोनो सख्शियतो के जाने से राज्य को कभी ने पूरी होने वाली क्षति हुई है। विनम्र श्रद्धांजलि!

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Mohan Singh rawat gaonwasi
Mohan Singh rawat gaonwasi

पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी अब हमारे बीच नहीं रहे। यह राज्य की अपूरणीय क्षति है। मैं पिछले 20 सालो से उनके संपर्क में रहा हूं। कई बार उनके साथ यात्राओं में भी रहा हूं। उनसे जो सीखा वह सदैव मुझे मार्गदर्शक करते है। वे हमेशा सादगी और लोक समाज के लिए जीते थे। उनकी हमेशा यही चिंता रहती थी कि सरकारी विकास की योजनाएं आज भी उस व्यक्ति तक नहीं पहुंच रही है जिसके लिए वह योजना बनी है। इसलिए वे गांव गांव घूमते थे और लोगो की समस्या को समेट कर सरकार तक पहुंचाते थे, उसके बाद भी वे चिंतित रहते थे। कई बार वे कहते थे की अमुक चुना हुआ जनप्रतिनिधि कब संवेदनशील बनेगा। कुलमिलाकर उनकी सादगी, उनकी कार्यकुशलता को आज के जनप्रतिनिधियों को अपनाना चाहिए। मगर ऐसा हो, यह समय की गर्त में है। अखबारों ने उनके कार्य, उनकी जीजीभिषा, उनके विचार और उनकी कार्यशैली को अब उनके जाने के बाद बखूबी प्रसारित किया है। अच्छा होता कि उनके जीवित रहते उनके वक्तव्य को यह नामचीन अखबार प्रमुखता देते। फिर भी उन पर जितना लिखा जा रहा है वह बहुत कम है। विनम्र श्रद्धांजलि। नमन।
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Saklchand rawat
Saklchand rawat

सकलचंद रावत ने 4 दिसंबर को इस मायावी दुनिया को अलविदा कह दिया। यह सदी की सबसे बड़ी घटना है जिसकी कभी भरपाई नही हो सकती। दरअसल प्रकृति की यह नियति है कि ऐसे मनीषियों को हमसे अकाल समय में छीन लेती है। सकलचन्द रावत जैसे विद्वान व्यक्तित्व का जाना रवाई क्षेत्र सहित राज्य की अपूरणीय क्षति है। श्री रावत 70 के दशक से अब तक के ऐसे जननायक रहे है जिन्होंने ताउम्र अपना समय समाजसेवा, राजनीति और कानूनी सेवाओ को लोकहित में दिया है। उन्होंने तत्काल प्रधानमंत्री इंदिरागांधी से लेकर अब तक के राजनेताओं को राज्य की समस्या और विकास योजनाओं के लिए संवेदनशील बनाया है। जब जब लोग और सरकार संकट में आएगी तब तब आपकी आवश्यकता महसूस की जाएगी। आपके जाने के बाद जो घाव मिले है वे कभी भी पूरे नही होगे। ईश्वर ऐसा क्यों करता है की श्री रावत से हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कहलाकर आज हमे और समाज को बेसहारा कर दिया है। हम विश्वास दिलाते हैं कि आपके बताए रास्ते को दुरस्त रखेंगे। अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि। नमन!

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