Saturday, July 25, 2026
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विश्लेषण : आखिर ज़ेन-जी (Gen-Z) पैसा क्यों नहीं बचा रही?

फाइनेंशियल निहिलिज्म (Financial Nihilism): आखिर ज़ेन-जी (Gen-Z) पैसा क्यों नहीं बचा रही?

Dr. Nitin Upadhyay ।।

आजकल अक्सर सुनने को मिलता है—”आजकल के बच्चे सेविंग्स नहीं करते, बस उड़ाते हैं!” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की साइकोलॉजी क्या है? इसे आज की भाषा में कहते हैं ‘फाइनेंशियल निहिलिज्म’ यानी आर्थिक शून्यवाद जहाँ युवाओं को लगता है कि पैसा बचाकर भी कुछ बड़ा हासिल नहीं होने वाला।

इसके पीछे 3 सबसे बड़े कारण हैं, जो आज की हकीकत हैं:

1. ‘रोटी, कपड़ा, मकान’ का सॉर्टेड होना (The Generation Gap)

आज का युवा या तो सेकंड जनरेशन का है या थर्ड जनरेशन का। उनके माता-पिता ने मेहनत करके लाइफ को एक बेस दे दिया है। बुनियादी ज़रूरतें रहने को घर, खाने को रोटी और पहनने को कपड़े के लिए इन्हें संघर्ष नहीं करना पड़ रहा। जब बुनियादी ज़रूरतें पहले से पूरी हों, तो पैसे बचाने की वो छटपटाहट या ‘सर्विस मोड’ अपने आप कम हो जाता है।

2. मकान तो वैसे भी नहीं बनने वाला…(The Affordability Crisis)

दूसरा ग्रुप वो है जिसके पास बैकअप नहीं है, लेकिन वो फिर भी पैसा नहीं बचा रहा। क्यों? क्योंकि आज के समय में प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट के दाम आसमान छू रहे हैं। एक आम सैलरी वाला युवा सोचता है “महीने के 5-10 हज़ार बचाकर भी मैं करोड़ों का फ्लैट कभी नहीं खरीद पाऊंगा। जब सबसे बड़ा गोल (मकान) ही पहुंच से बाहर है, तो इस पैसे को बचाकर क्या होगा? इससे अच्छा आज ही जी लो!”

3. न्यू-एज वित्तीय व्यवस्था और ‘Instant Gratification’
हमारा पूरा सिस्टम ही अब पैसे खर्च कराने के लिए डिज़ाइन है। पहले जेब से 500 का नोट निकलता था तो दर्द होता था। अब UPI से 15-20 रुपये की चाय-समोसा करते-करते दिन भर में कब बड़ा अमाउंट साफ हो जाता है, पता ही नहीं चलता। Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto… सिर्फ 10 मिनट में क्रेविंग पूरी! आपकी उंगलियों के एक क्लिक पर पैसा अकाउंट से बाहर चला जाता है ।इंस्टाग्राम रील्स पर दूसरों को घूमते, कैफे में खाते और ब्रांडेड चीज़ें खरीदते देख एक अजीब सा प्रेशर क्रिएट होता है। ऊपर से पुरानी स्कीम्स (FD, RD) में अब पहले जैसे रिटर्न भी नहीं रहे, जिसने सेविंग्स के मोटिवेशन को और कम कर दिया है।

ज़ेन-जी लापरवाह नहीं है, वो बस एक ऐसी दुनिया में जी रही है जहाँ कल की सुरक्षा से ज़्यादा आज का ‘एक्सपीरियंस’ मायने रखता है। क्योंकि उन्हें लगता है कि ‘कल’ वैसे भी बहुत अनप्रेडिक्टेबल है!

– आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या वाक़ई सेविंग्स का तरीका और सोच बदल चुकी है? कमेंट्स में बताएं!

– फोटो तब की है जब हम अपने टाइम के जेन जी थे ।
कंटेंट जेमिनी द्वारा लिखा है हमारी प्रॉम्प्टिंग पर और फिर व्यापक एडिटिंग के बाद पोस्ट किया जा रहा है।

(लेखक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग उत्तराखंड में उप निदेशक है।)

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