Sunday, September 13, 2026
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कैसा सीन होगा वो जब एक 14-15 साल का लड़का, कूकू कोहली के पास डेसपेरेट होकर पहुँचा होगा कि सर मुझे काम दो!

सोचिए कैसा सीन होगा वो जब एक 14-15 साल का लड़का, कूकू कोहली के पास डेसपेरेट होकर पहुँचा होगा कि सर मुझे काम दो!

@Chandramohan jadli 

हम आउटसाइडर्स ने सुना है कि जिन बच्चों के माँ-बाप बॉलीवुड में होते हैं उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री केक वॉक हो जाती है।

70s की फिल्मों के मशहूर गुंडे, अमिताभ बच्चन को टक्कर मारकर गिराने वाले खतरनाक गंजे फाइट मास्टर एमबी शेट्टी की ज़िंदगी में सब कुछ बढ़िया चल रहा था। न हाथ में पैसों की कमी थी और न ही घर में खुशियों की।

मगर ज़िंदगी भी कभी कभी फिल्मों की तरह ट्विस्ट ले आती है। ऐसा ही एक ट्विस्ट 81 में आया कि जब शेट्टी साहब की ग़लती से सेट पर एक ब्लास्ट में उनके स्टंटमैन की जान चली गई! जां भी ऐसे वैसे नहीं गई साहब, शत्रुघन सिन्हा के बॉडी डबल मंसूर की बॉडी 80 प्रतिशत जल गई।

ये हादसा शेट्टी साहब को अंदर से खाने लगा और इस हादसे के ठीक एक साल बाद, वो दुनिया छोड़कर चले गए। तब अपने स्कॉर्पियो उड़ाऊ जूनियर शेट्टी की उम्र महज 7-8 साल थी।

यहाँ से अगले 6 साल तक उनकी माँ ने बॉडी डबल स्टंट्स करके घर संभाला, लेकिन जिस एज में आज लड़के ये सोचते हैं कि फलानी मुझसे सच्चा प्यार करती है या नहीं, उस 14 साल की उम्र में रोहित शेट्टी कूकू कोहली के पास काम माँगने गए और ये न सोचिए कि काम माँगा और मिल गया, रोहित ने करीब डेढ़ साल तक उनके चक्कर लगाये, तब जाकर फूल और काँटे में असिस्टेंट के असिस्टेंट के भी असिस्टेंट की नौकरी मिली।

आपको अक्षय और अजय देवगन की ब्लॉकबस्टर फिल्म सुहाग याद होगी? हाँ ये वही फिल्म थी जिसके सामने अंदाज़ अपना-अपना जैसी कल्ट फ्लॉप हो गई थी। उस सुहाग में रोहित शेट्टी अक्षय कुमार के बॉडी डबल थे।

मायने सन 91 से शुरु हुई रोहित शेट्टी की फिल्मी कहानी आज 33 साल पुरानी हो चुकी है और आज वो भी वो ईमानदारी से कहते हैं कि मैं कोई बहुत अच्छा डायरेक्टर नहीं हूँ। मेरी फिल्में सिम्पल ऑडियंस के लिए हैं, मेरी फिल्में उन लोगों के लिए हैं जो दिल से सिनेमा देखने जाते हैं।

रोहित शेट्टी की यही ईमानदारी है कि मुझे भले ही उनकी 80% फिल्में बेसिर पैर की लगती हों पर एक इंसान के नाते उनके साथ काम करने का मन करता है।

Lallantop के इंटरव्यू में रोहित कहते भी हैं कि इस वक़्त इंडस्ट्री में अच्छे राइटर्स की भारी कमी है। अगली ही साँस में वो ये भी कह देते हैं कि मुझे कोई मेल न भेजे,, मैं किसी राइटर को तभी अपॉइन्ट करता हूँ कि जब वो किसी इन-हाउस राइटर की जान-पहचान से आए। खुले शो में ऐसी साफगोई कहाँ सुनने को मिलती है।

इसी शो में रोहित की कही दो बातें शायद ताउम्र याद रहेंगी, पहली

“अब लोग जिसे लॉंग हेक्टिक स्ट्रेसफुल वर्किंग आवर्स करने लगे हैं, हम उसे मेहनत कहते थे”

Rohit
Rohit

सुनकर हैरानी होती है कि रोहित उस टाइम दिन के 18 घंटे सेट पर असिस्ट किया करते थे और वो आज भी 12 से 14 घंटे काम करते हुए ही बिताते हैं।

हाल ही में आई इंडियन पुलिस फोर्स की शूटिंग के दौरान रोहित के साथ कुछ हादसे हुए, कुछ फ्रैक्शर आए। इस सिलसिले में जब सौरभ द्विवेदी ने पूछा कि कभी गिनते हो कि कितनी चोटे लगीं?

तब रोहित ने जवाब दिया, “नहीं दुआयें गिन लेता हूँ”

ये बात इसलिए कि रोहित के क्रू में जो लोग स्टंट आदि नहीं कर पाते, उन्हें भी पूरी वेजेस मिलती हैं।

बहरहाल एक व्यक्ति का बेहतर होना काश उसके बनाए सिनेमा को भी बेहतर कर पाता क्योंकि इंडियन पुलिस फोर्स इतनी अझेल सीरीज़ निकली कि 3सरा एपिसोड नहीं देखा गया।

इनfact, पहली गोलमाल और सिंघम के अलावा रोहित ने शायद ही कोई ऐसी फिल्म बनाई है जो मैं दोबारा देख सकूँ।

पर फिर भी दिल से यही निकलता है कि रोहित शेट्टी अभी और तरक्की करें, उनकी फिल्में हिट हों क्योंकि उनके क्रू में जो एक बार चला जाता है फिर उसे निकाला नहीं जाता, चाहें वो कितना ही बूढ़ा और बेकार क्यों न हो जाए।

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