Friday, March 6, 2026
Home entertainment प्राकृतिक सम्पदा पर एक अनूठी किताब : उत्तराखंड के पक्षी

प्राकृतिक सम्पदा पर एक अनूठी किताब : उत्तराखंड के पक्षी

हिंदी और अंग्रेजी की विदुषी रचनाकारों की भारतीय प्राकृतिक सम्पदा पर एक अनूठी किताब

Dr. Batrohi

लीफवर्ड फाउंडेशन, मुंबई की ओर से अंग्रेजी और हिंदी में भारत के दुर्लभ पहाड़ी पक्षियों को लेकर लिखी गई किताब ‘उत्तराखंड के पक्षी’ अपनी तरह की पहली किताब है. सामान्यतः इस तरह की किताबें अंग्रेजी में ही लिखी जाती रही हैं. हिंदी में भी कुछ किताबें सामने तो आई हैं, मगर उनमें मौलिकता कम देखने को मिलती है. ज्यादातर ऐसी किताबें प्रसिद्ध पक्षी-प्रेमियों की किताबों की नकल लगती हैं. यह किताब एक मौलिक शोध की तरह लिखी गई है इसलिए अपना ध्यान सहज ही आकर्षित करती है.
*****
इन दोनों शोधकर्ता रचनाकारों का मुख्यधारा के हिंदी लेखन के साथ अभिन्न सम्बन्ध रहा है. 1988 में मैंने सम्पूर्ण हिंदी कहानियों का दो खण्डों में वृहत संकलन सम्पादित किया, जिसके पहले खंड में गुलेरी से लेकर हरिशंकर परसाई तक सोलह और दूसरे खंड में ज्ञानरंजन से लेकर सुनील सिंह तक सत्रह कहानीकारों (कुल 33) को शामिल किया था. हिंदी के अलग मिजाज के जटिल कथाकारों की कहानियों का हिंदी की बोलियों की प्रकृति को पकड़ते हुए अनुवाद करना एक चुनौती भरा काम था. खासकर जयशंकर प्रसाद, रेणु, राधाकृष्ण, परसाई, जैनेन्द्र कुमार आदि की कहानियों का अनुवाद.
उस वक़्त मैं कुमाऊँ विवि के हिंदी विभाग का अध्यक्ष था औए डॉ. अनिल बिष्ट अंग्रेजी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापक. अनुवाद की जिम्मेदारी अनिलजी ने संभाली और उन्होंने ही पूरे देश से कुशल अनुवादकों की टीम जुटाई. अनुवादकों में उनके अलावा हमारी बेहद आत्मीय सहयोगी अंग्रेजी विभाग की (स्व.) मधु जोशी मेरी मुख्य सलाहकार थीं जिन्होंने खुद भी अनेक कहानियों के यादगार अनुवाद किये. किताब अल्मोड़ा बुक डिपो से प्रकाशित हुई और देश-विदेश में खूब चर्चित हुई.
इसी संकलन में उस वक़्त एम. ए. की मेधावी छात्रा बेला नेगी ने भी खूब मेहनत की. सुनील सिंह की अंतिम कहानी ‘माँ मेरे साथ ही रहेगी’ का अनुवाद बेला ने ही किया था.
इन दोनों प्रबुद्ध रचनाकारों की पहाड़ के पक्षियों पर लिखी गई इस यादगार कृति को देखकर मुझे वो पुराने दिन आज अनायास याद आ रहे हैं; जब हम लोगों ने मिलकर एक-एक शब्द, भाव और भंगिमा को लेकर घंटों बातें की थी और हिंदी कहानी की अन्तरंग दुनिया के बीच कितने ही दिनों तक गोते लगाए थे . उसी मेहनत को आज स्मरण करते हुए साफ लगता है कि उनका यह शोध कितना मूल्यवान है.
कवर डिजाईन मृगांक नेगी ने तैयार किया है.

 

लेखक वरिष्ठ स्तंभकार है।

RELATED ARTICLES

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...