Sunday, June 28, 2026
Home World लक्ष्मी देवी टम्टा: उत्तराखंड की पहली शिल्पकार महिला स्नातक और पत्रकार

लक्ष्मी देवी टम्टा: उत्तराखंड की पहली शिल्पकार महिला स्नातक और पत्रकार

लक्ष्मी देवी टम्टा: उत्तराखंड की पहली शिल्पकार महिला स्नातक और पत्रकारिता में अग्रणी लक्ष्मी देवी टम्टा न केवल उत्तराखंड की पहली शिल्पकार समाज से महिला स्नातक थीं, बल्कि वह प्रदेश की पहली टम्टा समाज की महिला संपादक भी बनीं।

हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक और प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने ‘समता’ पत्रिका के माध्यम से न केवल समाज के वंचित वर्गों की आवाज को स्वर दिया, बल्कि बंचित वर्ग के शिक्षा, अधिकार और सामाजिक समानता के लिए भी आजीवन संघर्ष किया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

लक्ष्मी देवी टम्टा का जन्म 16 फरवरी 1912 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में हुआ। उनके पिता गुलाब राम टम्टा और माता कमला देवी थीं। उस दौर में जब बालिकाओं को शिक्षा का अवसर मिलना लगभग असंभव था, लक्ष्मी देवी ने इस सामाजिक बंधन को तोड़ते हुए शिक्षा की लौ जलाए रखी। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नंदन मिशन स्कूल, अल्मोड़ा (जो अब एडम्स गर्ल्स इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है) से प्राप्त की। यहाँ तक की पढ़ाई करना भी उस समय किसी शिल्पकार समाज की महिला के लिए असाधारण उपलब्धि मानी जाती थी।

इसके बाद 1934 में उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। यह उपलब्धि उन्हें उत्तराखंड की पहली शिल्पकार (टम्टा)समाज की महिला स्नातक होने का गौरव दिलाती है।

उच्च शिक्षा और पत्रकारिता की ओर कदम

 

1936 में लक्ष्मी देवी ने बनारस विश्वविद्यालय से डी.टी. (डिप्लोमा इन टीचिंग) प्राप्त किया और विवाह के बाद उन्होंने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर (Post Graduation) की डिग्री भी प्राप्त की। उन्होंने स्त्री शिक्षा के महत्व को न केवल समझा, बल्कि उसके प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

उनका विवाह 1931 में मदन मोहन नागर के पुत्र महिपत राय नागर से हुआ, जो एक गुजराती ब्राह्मण थे। यह विवाह अन्तर्जातीय विवाह था, जो उस समय समाज में अस्वीकार्य माना जाता था। इस कदम ने यह स्पष्ट कर दिया कि लक्ष्मी देवी टम्टा समाज की रूढ़िवादी सोच को तोड़ने का साहस रखती थीं।

‘समता’ पत्रिका और सामाजिक योगदान

 

लक्ष्मी देवी टम्टा के मामा मुंशी हरिप्रसाद टम्टा एक प्रतिष्ठित समाजसेवी और ‘समता’ पत्रिका के संस्थापक संपादक थे। लक्ष्मी देवी ने 1935 में इस पत्रिका के संपादन कार्य में भागीदारी निभानी शुरू की और बाद में वह स्वयं इसकी संपादक बनीं। ‘समता’ पत्रिका के माध्यम से उन्होंने समाज में फैली असमानता, जातिवाद और स्त्री शिक्षा के विरोध के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाई।

महत्वपूर्ण योगदान

– उत्तराखंड की पहली शिल्पकार समाज से महिला स्नातक होने का गौरव।

– शिल्पकार (टम्टा) समाज से पहली महिला जिसने स्नातक और फिर स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

– ‘समता’ पत्रिका की पहली महिला संपादक।

– शिल्पकार समाज की शिक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष।

– एक अन्तर्जातीय विवाह कर सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ा

दरअसल लक्ष्मी देवी टम्टा न केवल उत्तराखंड की महिलाओं के लिए, बल्कि पूरे देश के संचित वर्गों के लिए एक आदर्श और प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने जिस साहस और संकल्प से अपने समय की सामाजिक बाधाओं को पार किया, वह आज भी महिलाओं और समाज सुधारकों को प्रेरित करता है। उनका जीवन संघर्ष और सामाजिक चेतना का जीवंत उदाहरण है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जाना चाहिए।

साभार पहाड़ी भाई पी लो चाय फेसबुक पेज से

RELATED ARTICLES

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...