Thursday, May 14, 2026
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समुदाय को गाली। समुदाय में रोष व्याप्त। लोक कलाकरो ने भी इस गीत की भर्त्सना की है।

मनोज सागर नाम के गायक ने अपने एक गीत में दे डाली ढोली समुदाय को गाली। समुदाय में रोष व्याप्त। लोक कलाकरो ने भी इस गीत की भर्त्सना की है

@Prem Pancholi

यह व्यक्ति जिनका नाम लोग मनोज सागर बता रहे है। वे यहां जो गीत गा रहे है यह व्यक्ति ढोली समुदाय को बहुत अभद्र गाली दे रहे है। मनोज सागर नाम के इस गायक ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर ढोल को नीचा दिखाने का कार्य इस गीत के माध्यम से किया है। अर्थात यह व्यक्ति ढोली को अपने गीत के मार्फत कह रहा है कि ढोली के दाढ़ी में आग लग गई है, यानी आग लगने का तात्पर्य वे बता रहे है कि यह ढोली बहुत असामाजिक है, इसलिए इसकी दाढ़ी आग के हवाले हो गई। यह गायक नाम का व्यक्ति यह बिल्कुल भी नहीं बता पा रहा है कि जिस ढोली को गायक मनोज सागर गीत गाकर गाली दे रहा है उसका कसूर क्या है।

कुलमिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह गायक पूर्वाग्रह से ग्रसित है। क्योंकि देव यात्राओं से लेकर सांस्कृतिक समारोह में ढोली समुदाय की सम्पूर्ण उत्तराखंड में सम्मान की जगह होती है। बताया यह भी जा रहा है कि यह मनोज सागर भी अनुसूचित जाति का ही है, मगर यह ढोली समुदाय की जैसी जगह नहीं बना पा रहे है। हो सकता है मनोज सागर को इस बहाने गाली का सहारा लेना पड़ा। गीत के इन अभद्र शब्दो पर अम्बेडकर न्याय मंच ने घोर एतराज जताया है।

इधर जौनसार बावर के ढोली समुदाय ने इस गीत पर शख्त नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने यह बताया कि इस तरह की गाली उस पुरुष को इी जाती है जो महिला हिंसा में लिप्त पाया जाता है या उसको इस तरह की गाली दी जाती है, जिसका समाज हर स्तर पर बहिष्कार करता दिखाई देता हो। ढोली समुदाय ने कहा कि इस गीत ने जहां ढोली समुदाय को गाली दी है उससे अधिक यह गीत उत्तराखंड सांस्कृतिक धरोहर पर भी कलंक है। समुदाय ने इस गीत को हिंसा भड़काने, समाज में वैमनस्य फैलाने और मानवाधिकारों के हनन करने वास्ते करार दिया है।

उत्तराखंड समता अभियान ने मनोज सागर की इस हरकत को मानसिक बीमारी बताई है। इधर जो भी इस गीत को सुन रहे है वे ऐसे लोक गायक को समाज से दूर रहने हिदायत दे रहे है। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि मनोज सागर ने इस तरह का असामाजिक गीत क्यों गाया है। सवाल इसलिए भी खड़े के खड़े हैं कि यह गीत गायक की योग्यता को दर्शा रहा कि बेचारा मनोज सागर इससे अच्छा गीत नहीं गा सकते हैं। यह अवश्य हैं कि यह गीत मनोज सागर जैसे गायको को पहचान दिला ही सकता है। फिलवक्त मनोज सागर की पत्नी ने सोशल मीडिया के मंच पर अपनी राय रखी है। जिसकी स्क्रीन शॉट यहां पेष्ट की जा रही है। साथ साथ गीत की उस पंक्ति की लिंक भी यहां पेष्ट की गई है।

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