ठंड से बचने के लिए लोग कमरे में अंगीठी जलाकर सो जाते हैं और फिर वह कभी नहीं उठते, नींद में ही कॉर्बन मोनाआक्साइड गैस उन्हें नींद में ही मौत की नींद सुला देती है। यह खबर इतनी आम हो जाती है सर्दियों के दौरान कि इस पर चर्चा तक नहीं होती न कोई आधिकारिक आंकड़े दर्ज किए जाते हैं। हालांकि, यह सीधे सीधे जागरूकता की ही कमी है जबकि लोग हर दिन अखबारों में पढ़ रहे हैं, चर्चाओं में सुन रहे हैं इसके बावजूद भी अंगीठी जलाकर सोने का जोखिम उठाते हैं और यह करने वाले सिर्फ मजदूर या अपढ़ श्रेणी के लोग ही नहीं हैं बल्कि कई बार शिक्षक, पढ़े लिखे लोग भी इन दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं।
सरकार ही जागरूकता का पाठ पढ़ाए यह भी जरूरी नहीं है लेकिन आम लोग भी इस जिम्मेदारी को उठा सकते हैं, सुबह सुबह व्हाट्सएप पर फंलाना धर्म खतरे में है की फर्जी कहानियां फारवर्ड करने की बजाए आम जन जीवन से जुड़ी कुछ जरूरी सूचनाएं ही फारवर्ड करना शुरू करें तो संदेश काफी लोगों तक पहुंचेगा।
छोड़ दीजिए कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है, पाकिस्तान में क्या हो रहा है इससे जुड़े संदेशों को फारवर्ड करने की बजाए अंगीठी जलाकर कमरे में न सोएं, फोन पर आने वाले अनजाने लिंक पर क्लिक न करें, पुलिस बनकर कोई वीडियो कॉल करके आपको डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी दें तो उसके झांसे में न आए, किसी निवेश योजना पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
अपने स्तर से ऐसे संदेश तैयार कीजिए, यह फर्जी मनोहर कहानियां भेजना व्हाट्सएप पर बंद कीजिए, कुछ काम का भेजकर देखिए सुकून मिलेगा शायद किसी की जिंदगी भी बच जाए







